ट्विटर के एमडी को कर्नाटक हाईकोर्ट ने दी अंतरिम राहत

गाजियाबाद। कर्नाटक उच्च न्यायालय ने ट्विटर के एमडी मनीष माहेश्वरी को अंतरिम राहत दे दी है। इसके साथ ही हाइकोर्ट ने गाजियाबाद पुलिस को उनके खिलाफ कोई कठोर कदम नहीं उठाने का निर्देश दिया है। कर्नाटक हाईकोर्ट का कहना है कि अगर गाजियाबाद पुलिस ट्विटर एमडी की जांच करना चाहती है तो वह वर्चुअल मोड के जरिए ऐसा कर सकती है। कर्नाटक उच्च न्यायालय ने धारा 41ए सीआरपीसी के तहत गाजियाबाद, यूपी पुलिस द्वारा जारी नोटिस के खिलाफ ट्विटर के प्रबंध निदेशक मनीष माहेश्वरी की याचिका पर सुनवाई के बाद ये निर्देश दिया।

गौरतलब है कि बुलंदशहर निवासी बुजुर्ग की लोनी में दाढ़ी काटने के मामले में वायरल वीडियो को लेकर ट्विटर इंडिया के MD मनीष माहेश्वरी को आज लोनी थाने पहुंचकर अपने बयान दर्ज कराने थे। उनके आने से पहले ही लोनी थाने के बाहर मीडिया कर्मियों का बड़ा जमावड़ा भी लग गया था।

मीडियाकर्मियों के जमावड़े के चलते लोनी थाने के बाहर ट्रैफिक जाम हो गया। लोनी बॉर्डर थाने पर मनीष से सवाल जवाब करने के लिए आईओ और सीओ अतुल कुमार सोनकर मौजूद रहे।

अब मनीष माहेश्वरी द्वारा कर्नाटक हाईकोर्ट में डाली गई एक याचिका के चलते उनकी लोनी थाने में पेशी की संभावना न के बराबर हो गई है।

गिरफ्तारी से बचने के लिए माहेश्वरी के वकील ने कर्नाटक हाईकोर्ट में डाली याचिका
एक ओर जहां गाजियाबाद थाने में मनीष माहेश्वरी का इंतजार चल रहा है तो दूसरी तरफ गिरफ्तारी से बचने के लिए माहेश्वरी के अधिवक्ता ने कर्नाटक हाईकोर्ट में याचिका डाली है। लोनी थाना प्रभारी अखिलेश मिश्र ने बताया कि टि्वटर के एमडी मनीष महेश्वरी के अधिवक्ता शशांक जैन से फोन पर बात हुई है। कर्नाटक हाईकोर्ट में अधिवक्ता ने याचिका डाली थी, जिसकी सुनवाई लंच से पहले होनी थी लेकिन लंच से पहले सुनवाई नहीं हुई। सुनवाई के बाद अधिवक्ता एमडी के लोनी पहुंचने की जानकारी देंगे।
क्या है पूरा मामला
ट्विटर इंडिया के एमडी मनीष माहेश्वरी को आज लोनी बॉर्डर थाने में पेश होकर भड़काऊ ट्वीट डिलीट न करने के संबंध में अपना पक्ष रखना था। पुलिस ने 21 जून को ट्विटर इंडिया के एमडी को नोटिस भेजकर 24 जून की सुबह साढ़े 10 बजे तक लोनी बॉर्डर थाने में पेश होकर अपना पक्ष रखने के निर्देश दिए थे। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि निर्धारित समय पर पेश न होने पर एमडी के खिलाफ कार्यवाही की जाएगी।

गत 5 जून को बुलंदशहर के अनूपशहर निवासी बुजुर्ग तांत्रिक सूफी अब्दुल समद के साथ मारपीट कर उनकी दाढ़ी काटी गई थी। 14 जून को घटना की वीडियो वायरल होने पर कुछ लोगों ने इसे सांप्रदायिक रूप देने की कोशिश की। पुलिस ने 15 जून को ट्विटर समेत 9 लोगों के खिलाफ धार्मिक उन्माद फैलाने का केस दर्ज किया था। इसमें आरोप था कि पुलिस द्वारा खंडन करने के बाद भी ट्विटर ने भड़काऊ ट्वीट डिलीट नहीं किया।
गाजियाबाद साइबर सेल ने 16 जून अमेरिका स्थित ट्विटर मुख्यालय को नोटिस भेजकर भड़काऊ ट्वीट करने वाले आरोपियों की डिटेल समेत 12 बिंदुओं पर जानकारी मांगी तो साथ ही 17 जून को लोनी बॉर्डर पुलिस ने ट्विटर इंडिया के एमडी को नोटिस भेजकर एक सप्ताह के भीतर थाने आकर बयान दर्ज कराने के निर्देश दिए थे। ट्विटर इंडिया के एमडी की तरफ से गत 18 जून को गाजियाबाद पुलिस के पास स्पष्टीकरण भेजा गया, जिसमें उन्होंने वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये प्रक्रिया पूरी करने का प्रस्ताव रखा। पुलिस ने उसे खारिज करते हुए दूसरा नोटिस भेजकर 24 जून को पेश होने के निर्देश दिए थे।
-एजेंसियां

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