माल्या के प्रत्यर्पण की कानूनी प्रक्र‍िया पूरी, 10 द‍िन में लाया जा सकता है भारत

नई द‍िल्ली। शराब कारोबारी और भगोड़ा घोष‍ित क‍िये जा चुके विजय माल्या को अगले कुछ दिनों में कभी भी भारत प्रत्यर्पण (extradition of Mallya) किया जा सकता है। सरकार के वरिष्ठ सूत्रों ने बुधवार को बताया कि माल्या के प्रत्यर्पण से संबंधित सभी औपचारिकताएं पूरी हो चुकी हैं।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के एक वरिष्ठ सूत्र ने बताया आनेवाले दिनों में हम किसी भी समय माल्या को ब्रिटेन से वापस भारत ले आएंगे। हालांकि यह प्रत्यर्पण किस दिन होगा उन्होंने यह बताने से इन्कार कर दिया। ईडी के सूत्र के अनुसार ब्रिटेन के सुप्रीम कोर्ट में माल्या की याचिका खारिज हो चुकी है। भारतीय जांच एजेंसी ने उसके प्रत्यर्पण के लिए सारी कानूनी औपचारिकताएं पूरी कर ली हैं।

सीबीआइ और ईडी की टीमें उसके प्रत्यर्पण पर काम कर रही हैं। इस मामले से जुड़े सीबीआइ के सूत्र ने बताया कि प्रत्यर्पण के बाद हम सबसे पहले उसे कस्टडी में लेंगे क्योंकि उसके खिलाफ हमने सबसे पहले केस दर्ज किया था। माल्या के प्रत्यर्पण में सबसे बड़ी बाधा 14 मई को उस समय दूर हो गई जब माल्या अपने प्रत्यर्पण के खिलाफ केस हार गया। अब सरकार को अगले 28 दिनों के भीतर उसे वापस लेकर आना है। 14 मई के बाद से 20 दिन पहले ही गुजर चुके हैं। ऐसे में उसे अगले आठ दिनों के भीतर वापस लाना है।

पूर्व सांसद और देश की सबसे बड़ी शराब कंपनी युनाइटेड ब्रुअरीज के मालिक माल्या ने किंगफिशर एयरलाइंस शुरू की थी जो बाद में बंद हो गई। उस पर भारत के कई बैंकों से 9000 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी और मनी लांड्रिंग का केस दर्ज किया गया, लेकिन वो व्यक्तिगत कारण बताकर मई 2016 में भारत से भाग गया था। तब से वह ब्रिटेन में ही रह रहा है। माल्या ने कम से कम 17 भारतीय बैंकों को धोखा देकर कर्ज लिया और अवैध रूप से लोन का पूरा पैसा या एक हिस्सा विदेश में करीब 40 कंपनियों के खातों में ट्रांसफर कर दिया।

विगत अप्रैल में ब्रिटेन के हाई कोर्ट ने अपने एक फैसले में कहा था कि विजय माल्या को भारत प्रत्यíपत किया जा सकता है। इसके बाद 14 मई को कोर्ट ने माल्या को सुप्रीम कोर्ट जाने का मौका देने से इन्कार कर दिया था। ब्रिटेन के कानून के बारे में जानकारी रखने वाले लोगों के मुताबिक प्रत्यर्पण को टालने के लिए माल्या के पास दो तरीके हैं, जिनमें से एक शरण मांगना है। माल्या को भारत प्रत्यर्प‍ित करने के लिए दिसंबर, 2018 में ही लंदन की वेस्टमिन्सटर कोर्ट ने आदेश दिया था।

– एजेंसी

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