सरकार को छोड़ना पड़ेगा राजस्व का लोभ, तभी होगा मजदूरों का उद्धार

मानव संसाधन व प्राकृतिक संसाधन के बिना राष्ट्र और मानव का विकास और उपभोग की वस्तुयें असंभव सी होती है| मानव के बिना किसी भी वस्तु का निर्माण करना आज भी काफी हद तक असंभव ही है जबकि मशीनों ने मानव श्रम की काफी जगह ले ली है फिर भी मानव श्रम को नकारा नहीं जा सकता| अगर यह कहा जाए कि दुनिया मानव श्रम को चलाने में आज भी मुख्य भूमिका में कामगार लोगों की होती है तो यह कहना गलत नहीं होगा ।आज कामगार और मजदूरों को उन्हें आराम और उनके प्रति सहानुभूति प्रकट करने के लिए 1 मई को मजदूर दिवस एक छुट्टी के दिवस के रूप में मनाया जाता है |
कहाँ से हुई थी मजदूर दिवस मनाने की शुरुआत
अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस (Labour Day) की शुरुआत मई 1886 में अमेरिका के शिकागो से हुई थी| धीरे-धीरे यह दुनिया के कई देशों में फैल गया| भारत ने भी इसे अपना लिया|
भारत में कब से हुई थी मजदूर दिवस मनाने की शुरुआत
भारत में पहली बार 1 मई 1923 को लेबर डे यानी मजदूर दिवस सेलिब्रेट किया गया था| भारत में हिंदुस्तान किसान पार्टी ने मद्रास में मजदूर दिवस मनाया था| 1 मई को 80 से ज्यादा देशों में राष्ट्रीय छुट्टी होती है,वहीं, कनाडा में मजदूर दिवस सितंबर के पहले सोमवार को मनाया जाता है| इन दिन को अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस,इंटर्नैशनल लेबर डे, मई दिवस, श्रमिक दिवस और मजदूर दिवस भी कहा जाता है|ये दिन पूरी तरह श्रमिकों को समर्पित है|
कैसे हुई थी मजदूर दिवस मनाने की शुरुआत
मजदूरों ने अपने प्रदर्शनों के जरिए सैलरी बढ़ाने और काम के घंटे कम करने के लिए 1886 दबाव बनाना शुरू किया । मजदूरों ने अपने प्रदर्शनों में 8 घंटे काम की मांग को लेकर 2 लाख मजदूरों ने देशव्यापी हड़ताल कर दी थी| उस दौरान काफी संख्या में मजदूर सातों दिन 12-12 घंटे लंबी शिफ्ट में काम किया करते थे और सैलरी भी कम थी| बच्चों को भी मुश्किल हालात में काम करने पड़ रहे थे| अमेरिका में बच्चे फैक्ट्री, खदान और फार्म में खराब हालात में काम करने को मजबूर थे|
1889 में पेरिस में अंतरराष्ट्रीय महासभा की बैठक हुई|इस दौरान प्रस्ताव पारित किया गया कि तमाम देशों में अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस 1 मई को मनाया जाएगा|
अंतराष्ट्रीय मजदूर दिवस का लाभ
आज ही के दिन दुनिया के मजदूरों के अनिश्चित काम के घंटों को 8 घंटे में तब्दील किया गया था। -अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक संगठन (ILO) द्वारा इस दिन सम्मेलन का आयोजन किया जाता है। कई देशों में मजदूरों के लिए कल्याणकारी योजनाओं की घोषणाएं की जाती है। – टीवी, अखबार, और रेडियो जैसे प्रसार माध्यमों द्वारा मजदूर जागृति के लिए कार्यक्रम प्रसारित किए जाते हैं।-मजदूर वर्ग इस दिन पर बड़ी-बड़ी रैलियों व कार्यक्रमों का आयोजन करते हैं।

मई की एक तारीख़ अन्य विशेष
1 मई को ही महाराष्‍ट्र और गुजरात का स्‍थापना दिवस भी मनाया जाता है। भारत की आजादी के समय यह दोनों राज्‍य बॉम्‍बे प्रदेश का हिस्‍सा थे। महाराष्‍ट्र में इस दिन को महाराष्‍ट्र दिवस, जबकि गुजरात में इसे गुजरात दिवस के नाम से भी जाना जाता है।
आज की मजदूरों की चिंता
आज करोना काल में जब 1 मई 2020 को प्रवासी और अप्रवासी मजदूरों की जो दुर्दशा देखी गई थी कि किस तरीके से वह एक हजार किलोमीटर पैदल चलते हुए अपने गंतव्य पैतृक गांव पहुंचे थे और उन्होंने कसम खाई थी कि वह दोबारा नहीं जाएंगे ऐसे में संवेदनशील व्यक्ति और कम्युनिस्टों ने एक बार फिर इस पर पुनर्विचार करने का सोचा कि किस तरीके से सरकार से बात की जाए परंतु यह दंश के विचार विमर्श हो ही रहा था कि उन्हें आज 1 मई 2021 को करोना के द्वितीय और तृतीय चरण में और भी ज्यादा स्थिति को खराब कर दिया परंतु सरकार अपनी राजस्व के लिए मजदूरों की चिंता किए बिना आज सभी उद्यमियों को उद्यम चालू रखवा रही है ताकि उसकी तिजोरी भरती रहे| इस दौरान कोई भी करोना से अगर मरता है तो सरकार की संवेदना मज़दूर के लिए खत्म हो गई है| जबकि आज सभी वैज्ञानिकों का यह मानना है कि इस बार का करोना हवा में प्रसारित हो रहा है |सरकार द्वारा निर्मित करोना की गाइडलाइन शिक्षा के अभाव में और काम की करने के तरीके से वह गाइडलाइन की आपूर्ति कर पाना काफी मुश्किल सा दिखता है |आज अगर हम मजदूरों के प्रति संवेदनशील नहीं होंगे उनके स्वास्थ्य के प्रति सजग नहीं होंगे उनको भरपेट भोजन उपलब्ध नहीं करा पाएंगे तो कहीं ना कहीं हम मानवता पर और उनके परिवार के उत्थान में सहयोगी नहीं होंगे और सदियों पुरानी बंधुआ मजदूर वाली प्रवृत्ति को हम बढ़ावा देंगे |
सरकार की सहज नीतियो से होगा उद्धार
आज मेरा सभी प्रबुद्ध व्यक्तियों से और उद्यमियों के साथ विशेषकर सरकार से आग्रह है कि अब उसे प्रजातंत्र में पूंजीवादी और राजस्व की भूख को कम करना पड़ेगा साथ में उद्यमियों और मजदूरों को इस तरीके का संरक्षण दे कि ना तो कोई उद्यमी मजदूरों का शोषण कर सके और ना ही आप की नीतियों से कोई भी मजदूर और सरकार के नुमाइंदे उस उद्यमी का शोषण कर सके |आप की अनेक अव्यवाहरिक नीतियों के कारण ही उद्यमी उनसे बचता है और सही तरीके से अपने मजदूर भाइयों को मदद नहीं कर पाता है| आप सहज सरल नीतियां बनाइए जिसमें अगर उद्यम बढ़ेगा तो राष्ट्र की उन्नति होगी और तो ऑर मजदूर खुश होगा तो उद्यम बढ़ेगा इस प्रकार की आप की नीति होनी चाहिए |

आज सभी मजदूर भाइयों को बहनों को व उनको रोजगार देने वाले उद्यमियों को मैं बहुत-बहुत बधाई व शुभकामना देता हूं और उन से निवेदन करता हूं कि आप दोनों एक दूसरे के पूरक हैं आप दोनों को भी खुशहाल रहना है ऐसे आप दोनों के संबंध बनी रहे|

– राजीव गुप्ता जनस्नेही कलम से
लोक स्वर, आगरा

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