ड्यूक आफ एडिनबरा प्रिंस फ़िलिप का अंतिम संस्कार संपन्न

ड्यूक आफ एडिनबरा प्रिंस फ़िलिप का अंतिम संस्कार संपन्न हो गया है. शनिवार को विंडसर कैसल के सेंट जॉर्ज चैपल में उन्हें दफ़न कर दिया गया.
इस मौके पर जुटे उनके परिवार ने उन्हें अंतिम विदाई दी. विंडसर के डीन और केंटरबरी के आर्कबिशप की अगुआई में अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी की गई.
महारानी एलिजाबेथ ने इस कार्यक्रम के दौरान विंडसर कासल के मैदान में अपने परिवार और देश का नेतृत्व किया. पूरा ब्रिटेन इस समय शोकाकुल है.
महारानी के पीछे प्रिंस आफ वेल्स चार्ल्स और डचेज आफ कॉर्नवाल कैमिला थीं.
इस दौरान गायन मंडली ने ख़ुद ड्यूक के इस अवसर के लिए चुने संगीत को गाया और बजाया. इससे पहले ताबूत ढोने वाले उनके शरीर को शाही रास्ते से ले गए.
प्रिंस फ़िलिप के परिवार के लोग इस मौके पर मौजूद थे जो अंतिम यात्रा के दौरान शाही परिवार के पीछे थे.
इस कार्यक्रम में शामिल सबसे बजुर्ग शख़्स ड्यूक के निजी सचिव ब्रिगेडियर आर्ची मिलर-बेकवेल थे.
वे प्रिंस फ़िलिप के पूर्व मेट्रोपोलिटन पुलिस निजी सुरक्षा अधिकारी और दो पूर्व सेवकों के साथ मौजूद रहे.
इस मौके पर सेना के बैंड ने ड्यूक ऑफ़ एडिनबरा द्वारा चुना गया संगीत बजाया. इनमें यरूशलम और एल्गर की निमरोड जैसी धुनें शामिल थीं.
चतुर्भज के आकार में चल रहे लैंड रोवर, जो पूरे आयोजन का केंद्र बिंदु था, को सेना के जवानों ने सिर झुकाकर सलामी दी.
शाही परिवार के सदस्यों को क्वायर में उनके स्थानों पर ले जाया गया.
गाए जा रहे गीतों के बीच ताबूत को उस मंच की ओर ले जाया गया था, जहां प्रिंस फ़िलिप हमेशा के लिए आराम करेंगे.
गायन मंडली ने अंतिम संस्कार पर बाइबिल की पंक्तियां गाई. 18वीं सदी के संगीतकार विलियम क्रॉफ्ट ने बाइबिल की इन छंदों को स्वरबद्ध किया था.
इनके शब्द “मैं पुनरुत्थान और जीवन हूं” हैं, जो द गॉस्पेल आफ जॉन से लिया गया है. द बुक आफ जॉब से “मैं जानता हूं कि मेरा उद्धारक जीवित है” भी गाया गया.
कोरोना वायरस प्रतिबंधों की वजह से अंतिम संस्कार में सिर्फ़ तीस लोग ही शामिल हो पाए.
बकिंघम पैलेस ने एक बयान में कहा था कि महारानी एलिज़ाबेथ को शोकाकुलों की अंतिम सूची तैयार करने में मुश्किल फैसला लेना पड़ा.
शुरुआत में 800 लोगों के शामिल होने की तैयारी की गई थी.
महारानी चाहती थीं कि प्रिंस फ़िलिप के परिवार के सभी लोगों का अंतिम संस्कार समारोह में प्रतिनिधित्व हो.
चर्च ऑफ़ इंग्लैंड के प्रमुख ऑर्चबिशप ऑफ केंटरबरी ने कहा था कि प्रिंस फ़िलिप का अंतिम संस्कार महारानी के पास उन्हें अंतिम विदाई देने का ‘गंभीर’ अवसर होगा.
जस्टिन वेल्बी ने कहा था, “वो असाधारण मर्यादा, असाधारण सम्मान के साथ व्यवहार करेंगी जैसा कि वो हमेशा करती रही हैं.”
महारानी एलिज़ाबेथ ने तय किया था कि प्रिंस फ़िलिप के अंतिम संस्कार में कोई सैन्य पोशाक नहीं पहनेगा. अंतिम संस्कार में शामिल लोग मेडलों से सजे कोट या दिन में पहने जाने वाले कपड़े पहन सकेंगे.
प्रिंस फिलिप का 99 साल की उम्र में शुक्रवार 9 अप्रैल को विंडसर कासल में देहांत हो गया था.
अंतिम यात्रा में सबसे आगे ग्रेनाडियर गार्ड का बैंड था. उसके पीछे परिवार के लोग और सेना प्रमुख रहे.
ड्यूक के चारों बच्चों- द प्रिंस ऑफ़ वेल्स, द प्रिंसेस रॉयल, द ड्यूक ऑफ़ यॉर्क और द अर्ल ऑफ़ वेसेक्स के साथ-साथ उनके पोते ड्यूक ऑफ़ केंब्रिज और ड्यूक ऑफ़ ससेक्स और पीटर फिलिप्स ताबूत के पीछे-पीछे चल रहे थे.
महारानी बेंटले कार से शवयात्रा के सबसे आख़िर में रहीं और चर्च में बगल के दरवाज़े से दाख़िल हुईं.
कोविड के नियमों के तहत संस्कार में शामिल सभी लोग मास्क लगाए हुए थे और सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों का पालन कर रहे थे. हालांकि महारानी अकेली बैठी थीं.
शाही इतिहासकार प्रोफ़ेसर केट विलियम्स के मुताबिक बाकी शोकाकुलों से अलग अकेली बैठीं महारानी की तस्वीर गहरा प्रभाव छोड़ेगी.
-BBC

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