पदक गंवाकर भी भुलाए नहीं भूली जाएगी भारतीय महिला हॉकी टीम की दिलेरी

भारतीय महिला हॉकी टीम टोक्यो ओलंपिक में कांस्य पदक तो हासिल नहीं कर सकी लेकिन उसने जिस दिलेरी से ग्रेट ब्रिटेन जैसी मजबूत टीम से संघर्ष किया, वह कोई भुलाए नहीं भूलेगा.
भारत को इस मुकाबले में 3-4 से हार का सामना करना पड़ा, लेकिन भारतीय महिला टीम के हिसाब से यह प्रदर्शन काबिल ए तारीफ़ है.
जिस टीम के बारे में क्वार्टर फ़ाइनल में स्थान बनाने में भी संशय व्यक्त किया जा रहा था, उस टीम ने ऑस्ट्रेलिया जैसी दिग्गज टीम को हराकर ना सिर्फ सेमी फ़ाइनल में स्थान बनाया बल्कि आख़िर तक अपनी लड़ाई जारी रखी.
इस ओलंपिक में शानदार प्रदर्शन से भारतीय टीम बिग लीग टीमों में अपना नाम शुमार कराने में सफल हो गई है. वह नई रैंकिंग में छठे स्थान पर आ सकती है.
ब्रिटेन के तीसरे कवार्टर में बराबरी पाने के बाद भारत को आख़िरी 15 मिनट में जीत के लिए सब-कुछ झोंक देने की ज़रूरत थी मगर शायद टीम सामने वाली टीम के शुरुआत से ही दवाब बनाने की वजह से इस रणनीति पर काम नहीं कर सकी.
टीम इस क्वार्टर में काफ़ी समय जहां बचाव में ही व्यस्त रही वहीं ब्रिटेन के ग्रेस बाल्सडन द्वारा चौथा गोल जमाने के बाद भारतीय खिलाड़ियों पर दवाब दिखने लगा. वो गेंद को ढंग से क्लियर नहीं कर पा रही थीं और हमले बनाते समय गेंद पर नियंत्रण बनाने में भी उन्हें दिक्क़त हुई.
भारत की यादगार वापसी
पहले 24 मिनट के खेल में ब्रिटेन की 2-0 की बढ़त और ग्रेट ब्रिटेन के लगातार हमलावर रहने से लग रहा था कि मैच का हश्र ग्रुप मुकाबले वाला ही होने वाला है लेकिन दूसरे क्वार्टर के आख़िरी छह मिनट में भारतीय टीम एक अलग ही अंदाज़ वाली दिखी.
इस अंदाज़ को देखने से लगा कि भारत की क्वार्टर फ़ाइनल में ऑस्ट्रेलिया पर जीत कोई तुक्का नहीं थी.
भारत ने इस दौरान हमले बनाकर अपने ऊपर से दवाब ही नहीं हटाया बल्कि पहले ड्रैग फ़्लिकर गुरजीत कौर के पेनल्टी कार्नर पर जमाए दो गोलों से बराबरी की और फिर वंदना कटारिया के शानदार गोल से मैच में पहली बार बढ़त बनाकर अपनी श्रेष्ठता साबित की.
दवाब में ब्रिटेन का डिफ़ेंस चरमराया
पहले 24 मिनट के खेल में ग्रेट ब्रिटेन की सही मायनों में सही परीक्षा नहीं हुई लेकिन भारत ने जब दूसरे क्वार्टर के आखिरी छह-सात मिनट जब ताबड़तोड़ हमले बनाए तो डिफ़ेंस में कमज़ोरी साफ़ दिखाई दी.
ब्रिटेन के डिफ़ेंडर गेंद क्लियर करने में जहां ग़लतियां करते नज़र आ रहे थे वहीं भारतीय हमलावरों ने पहले सीधा गोल जमाने के बजाय पेनल्टी कॉर्नर हासिल करने की रणनीति पर काम किया और उनकी यह रणनीति कारगर साबित हुई.
इस रणनीति की वजह से मिले पेनल्टी कॉर्नरों को भारत गोल में बदलकर पहले 2-2 की बररबरी की. बराबरी से बने टेंपो को भारत ने खत्म नहीं होने दिया और वंदना कटारिया के बनाए हमले में कम से कम तीन खिलाड़ियों तक गेंद पहुंचने के बाद वंदना को गेंद मिली और वह गोल जमाने में सफल रहीं. इस गोल ने भारतीय टीम के हौसले को दोहरा कर दिया.
भारतीय टीम के नाम ब्रितानी टीम का संदेश: आपने टोक्यो में कुछ ख़ास किया है
भारतीय महिला हॉकी टीम भले ही ब्रॉन्ज़ मेडल जीतकर इतिहास बनाने से भले रह गई हो लेकिन उसके प्रदर्शन की चौतरफ़ा तारीफ़ हो रही है.
भारत को हराने वाली ब्रिटेन की हॉकी टीम ने भी इसकी तारीफ़ करते हुए अद्भुत खेल के लिए बधाई दी है.
ग्रेट ब्रिटेन हॉकी के ट्विटर हैंडल से ट्वीट किया गया, “अद्भुत मैच और अद्भुत विपक्षी टीम.आपने टोक्यो ओलंपिक में कुछ ख़ास किया है. आपके अगले कुछ साल बहुत उज्ज्वल दिख रहे हैं.”
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, महिला हॉकी टीम पर गर्व है
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत की महिला हॉकी टीम की हौसला आफ़जाई की है और कहा कि उन्हें टीम पर गर्व है.
प्रधानमंत्री ने ट्वीट किया,“हम महिला हॉकी में ब्रॉन्ज़ मेडल जीतते-जीतते रह गए लेकिन यह टीम नए भारत के जुनून को दिखाती है- जहाँ हम अपना बेहतरीन प्रदर्शन करते हैं और नई सीमाओं को छूते हैं. ज़्यादा महत्वपूर्ण बात यह है कि टोक्यो ओलंपिक में महिला टीम की सफलता भारत की बेटियों को हॉकी खेलने और इसमें महारत हासिल करने के लिए प्रेरित करेगी.”
पीएम मोदी ने एक अन्य ट्वीट में कहा, “हमें टोक्यो ओलंपिक में हमारी महिला हॉकी टीम का बेहतरीन प्रदर्शन हमेशा याद रहेगा. उन्होंने हर मैच में अपनी बेस्ट परफ़ॉर्मेंस दी है. टीम की हर सदस्य में गज़ब का साहस और कौशल है. भारत को अपनी शानदार टीम पर गर्व है.”
-एजेंसियां

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