कोरोना की मार से देश का रियल एस्टेट कारोबार और डूबा

नई दिल्‍ली। रियल एस्टेट सेक्टर पहले से बहुत दबाव और सुस्ती को झेल रहा था लेकिन कोरोना के कारण इस सेक्टर की परेशानी और बढ़ गई है। वर्तमान में रियल एस्टेट सेक्टर का क्या हाल है इसकी सुध लेना भी जरूरी है।
एक रिपोर्ट के मुताबिक देश के सात बड़े शहरों में डिवेलपर्स पर करीब 3.7 लाख करोड़ रुपये की अनसोल्ड इन्वेंट्री का भारी बोझ है। दिल्ली-एनसीआर में 1.21 लाख करोड़ की अनसोल्ड इन्वेंट्री है, मुंबई में 1.24 लाख करोड़ की इन्वेंट्री, बेंगलुरू में 89 हजार करोड़ की इन्वेंट्री है।
2019 के पहले तीन महीने के मुकाबले 2020 के पहले तीन महीने में रेसिडेंशियल यूनिट की बिक्री में करीब 29 फीसदी की गिरावट आई है जबकि पिछले साल की पहली तिमाही के मुकाबले इस तिमाही में नए यूनिट लॉन्च में 3 फीसदी की तेजी आई है। 2020 की पहली तिमाही में 40574 नए प्रॉजेक्ट लॉन्च किए गए हैं।
60 पर्सेंट नए प्रोजेक्ट मुंबई में
नए प्रोजेक्ट का 60 फीसदी केवल मुंबई और बेंगलुरु में लॉन्च किए गए हैं। दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु की तुलना करें तो 2019 की पहली तिमाही के मुकाबले दिल्ली में नए प्रोजेक्ट लॉन्च में 3 फीसदी की गिरावट, बेंगलुरू में 3 फीसदी की तेजी और मुंबई में 18 फीसदी की गिरावट आई है।
सरकार के कदम पर होगी नजर
JLL रियल एस्टेट कंसल्टेंसी का कहना है कि बाजार पर कितना प्रभाव पड़ेगा यह इस बात पर निर्भर करता है कि कोरोना का असर कितने दिनों तक प्रभावी रहता है और रिजर्व बैंक समेत सरकार की तरफ से कितना जल्द फैसला लिया जाता है। फिलहाल बायर्स ने कोरोना महामारी के कारण खरीदारी रोक दी है। यही वजह है कि बिक्री में 30 पर्सेंट तक गिरावट आई है।
2020 के अंत में डिमांड में तेजी की संभावना
JLL के सीईओ रमेश नैयर का कहना है कि 2019-20 की विकास दर 5 फीसदी के नीचे रहने वाली है लेकिन 2008 के मुकाबले इस समय हालात रियल एस्टेट के खिलाफ नहीं है। बैंक में लिक्विडिटी पर्याप्त होने का असर दिखाई देगा और 2020 के अंत जाते-जाते डिमांड में तेजी आएगी।
-एजेंसियां

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