सीबीआई ने 2015 के मामले में तलब किए प्रो. GC Tripathi

बीएचयू के पूर्व कुलपति हैं प्रो. GC Tripathi

नई दिल्‍ली। 2015 में सिक्किम विश्वविद्यालय में हुई वित्तीय अनियमितता को दबाने के मामले में बीएचयू के पूर्व कुलपति प्रो. GC Tripathi को सीबीआई ने तलब किया है।
प्राप्‍त जानकरी के अनुसार प्रो. GC Tripathi जांच के लिए बनी मानव संसाधन मंत्रालय की इस फैक्ट फाइंडिंग कमेटी के सदस्य बनाए गए थे। तब इस समिति ने मंत्रालय को सौंपी रिपोर्ट में सिक्किम विश्वविद्यालय के तत्कालीन कुलपति एमपी लामा समेत अन्य आरोपियों को क्लीन चिट दे दी थी, लेकिन सीबीआई उस रिपोर्ट से संतुष्ट नहीं है। इसलिए प्रो. त्रिपाठी को तलब किया है।

सिक्किम उच्च न्यायालय के निर्देश पर सीबीआई की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा ने प्रो. त्रिपाठी के खिलाफ कोलकाता में यह मामला दर्ज किया है। सीबीआई सिक्किम विश्वविद्यालय के तत्कालीन कुलपति रहे एमपी लामा के कार्यकाल के दौरान हुई कथित वित्तीय अनियमिताओं का परीक्षण कर रही है।

सूत्रों के अनुसार सिक्किम यूनिवर्सिटी से दूरस्थ शिक्षा की संबद्धता और यूपी समेत अन्य राज्यों में इसके केंद्रों के संचालन से मामला जुड़ा है। इस केंद्र का प्रधान कार्यालय प्रयागराज की जिस समिति के भवन में संचालित है, उसका संबंध प्रो त्रिपाठी से जुड़ा है। तब दूरस्थ शिक्षा केंद्रों की आड़ में बड़े पैमाने पर स्नातक स्तर की डिग्रियां बांटने का खेल हुआ था।

शिकायत के बाद मानव संसाधन मंत्रालय ने जिस फैक्ट फाइंडिंग कमेटी से इस अनियमितता की जांच कराई, उसके सदस्य के रूप में बीएचयू के तत्कालीन वीसी रहे प्रो त्रिपाठी नामित थे। सीबीआई ने इस इस मामले में प्रो. त्रिपाठी को नोटिस जारी किया। इस मामले में प्रो. त्रिपाठी को बीती 18 दिसंबर 2018 को सीबीआई की एंटी करप्शन शाखा के एसपी के समक्ष पेश होना था, लेकिन वह गए नहीं।

प्रो. त्रिपाठी ने अमर उजाला से बातचीत में सीबीआई का नोटिस मिलने की पुष्टि की। उनका कहना था कि जिस दिन सीबीआई ने बुलाया था, उसी दिन दोपहर के समय उनको नोटिस मिला, ऐसे में कोलकाता जाना संभव नहीं था। उनका कहना है कि अगर सीबीआई उनकी जांच से संतुष्ट नहीं है तो इसका मतलब यह नहीं कि वह दोषी हैं। किसी दूसरी समिति से परीक्षण करा लिया जाए।

नियुक्तियों में धांधली से गिरी विवि की साख

बीएचयू में कुलपति के रूप में तैनाती के दौरान प्रो. जीसी त्रिपाठी का विवादों से नाता लगातार जुड़ा रहा। शिक्षकों की नियुक्ति में भाई-भतीजावाद और वसूली से लेकर सर सुंदरलाल अस्पताल में घटिया ऑक्सीजन की आपूर्ति के कारण मरीजों की मौत का मामला हो या फिर हक के लिए आवाज उठाने वाली छात्राओं पर लाठीचार्ज की घटना हो, प्रो. त्रिपाठी लखनऊ से लेकर नई दिल्ली तक चर्चा में रहे।

इस दौरान बीएचयू की साख गिरने को लेकर देशभर में चर्चा होती रही। हालात अनियंत्रित होने पर प्रो. त्रिपाठी को कार्यकाल पूरा होने के दो महीना पहले ही विश्वविद्यालय छोड़ना पड़ा। इलाहाबाद विश्वविद्यालय में अर्थशास्त्र विभाग के प्रोफेसर त्रिपाठी बीएचयू में कुलपति के रुप में 27 नवंबर, 2014 को आए थे।

केंद्र में भाजपा की सरकार बनने के बाद बीएचयू में राष्ट्रीय संस्कृति महोत्सव के आयोजन में भी परिसर के भगवाकरण का आरोप लगा था। इसके बाद से सर सुंदरलाल अस्पताल में गैस कांड होने से मरीजों की मौत के बाद जब जांच शुरू हुई तो पता चला कि अस्पताल में ऑक्सीजन सिलिंडर की आपूर्ति करने वाली फर्म भी उनके करीबियों की थी। प्रो. त्रिपाठी के कार्यकाल में कैंपस में छात्र-छात्राओं से रैगिंग, आगजनी, मारपीट और तोड़फोड़ की घटनाएं भी खूब हुई थीं।
-एजेंसी

 

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