इसी दिन लोकतंत्र की दहलीज तक पहुंचा था आतंक का काला साया

2001 में 13 दिसंबर की सुबह आतंक का काला साया देश के लोकतंत्र की दहलीज तक आ पहुंचा था। देश की राजधानी के बेहद महफूज माने जाने वाले इलाके में शान से खड़ी संसद भवन की इमारत में घुसने के लिए आतंकवादियों ने सफेद रंग की ऐंबैसडर का इस्तेमाल किया और सुरक्षाकर्मियों को गच्चा देने में कामयाब रहे, लेकिन उनके कदम लोकतंत्र के मंदिर को अपवित्र कर पाते उससे पहले ही सुरक्षा बलों ने उन्हें ढेर कर दिया।
सुरक्षाकर्मियों की चौकसी से टला हादसा
इस घटना ने देश के सिक्योरिटी सिस्टम की भारी चूक को दिखाया। इस तरह के हमलों की खुफिया सूचना मिलने के बाद भी पर्याप्त एहतियाती कदम नहीं उठाए गए थे। सुरक्षा तंत्र में चूक का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि एक कार 30 किलोग्राम आरडीएक्स और हैंड ग्रेनेड के साथ संसद भवन के परिसर में आसानी से पहुंच गई थी।
घटना वाले दिन क्या हुआ
विपक्ष ‘ताबूत घोटाले’ को लेकर तत्कालीन रक्षा मंत्री जॉर्ज फर्नांडीस का इस्तीफा मांग रहा था। उसके बाद संसद के दोनों सदनों को 11. 20 बजे स्थगित कर दिया गया था। सांसद या तो संसद परिसर से निकल चुके थे या फिर सेंट्रल हॉल या लाइब्रेरी में थे। करीब 11.40 बजे जोरदार धमाका हुआ और उसके बाद गोलीबारी की आवाज आने लगी।
सुरक्षाकर्मी जे. पी. यादव की चौकसी
शुरू में सांसदों ने समझा कि पार्लियामेंट हाउस के अगल-बगल पटाखे छूट रहे हैं, उसी वजह से आवाज आ रही है लेकिन जब उनको पता चल गया कि यह आतंकी हमला है तो सभी का धैर्य जवाब देने लगा। सीआरपीएफ के जवानों ने तुरंत पोजिशन ली और जवाबी फायरिंग की। इस बीच निगरानी में लगे सुरक्षाकर्मियों ने सभी सांसदों को सुरक्षित जगह पर पहुंचा दिया। गेट नंबर 11 पर तैनात जे. पी. यादव ने परिसर के अंदर के साथियों को अलर्ट किया और उसके बाद बिजली की गति से पार्लियामेंट हाउस के सारे दरवाजे बंद कर दिए गए। संसद भवन के बाहर आतंकियों और सुरक्षाबलों के बीच मुकाबला होता रहा। करीब 30 मिनट तक दोनों तरफ से गोलियां चलती रहीं। आतंकी एक-47 और अपने साथ लाए हैंड ग्रेनेड से हमला कर रहे थे।
जब संसद भवन परिसर के अंदर घुसे आतंकी
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार आतंकी एक सफेद ऐंबैसडर कार में आए थे। उस पर गृह मंत्रालय का लेबल लगा हुआ था और उनके पास पार्लियामेंट का एंट्री पास था। गाड़ी पर लाल बत्ती भी लगी हुई थी। कार तेजी से पार्लियामेंट स्ट्रीट में मुख्य प्रवेशद्वार से तेजी के साथ लाल लाइट जलाते हुए गुजरी। गाड़ी तेजी से गेट नंबर 12 की ओर बढ़ी जो राज्य सभा का प्रवेशद्वार है। उस दिन प्रधानमंत्री राज्यसभा आने वाले थे लेकिन सदन के स्थगित होने के कारण वह नहीं आए।
उपराष्ट्रपति के ड्राइवर ने आतंकियों को डांटा
पार्लियामेंट के सुरक्षाकर्मियों के मुताबिक गेट नंबर 11 के सामने उपराष्ट्रपति कृष्णकांत की पायलट कार खड़ी थी। कुछ देर में उपराष्ट्रपति वहां से जाने वाले थे। आतंकी ने उनकी पायलट कार को हल्की टक्कर मार दी। इस पर पायलट कार के ड्राइवर ने ऐंबैसडर को रोका और उसके ड्राइवर को डांटा। ऐंबैसडर के ड्राइवर ने पायलट कार के ड्राइवर को धमकी दी और कहा कि रास्ते से हटो वरना मार डालेंगे।
कार छोड़कर भागने लगे आतंकी
इस सब हंगामे की ओर गेट नंबर 11 पर तैनात सुरक्षाकर्मी जे. पी. यादव का ध्यान गया। वे आतंकियों की ओर भागे और उनसे कार रोकने को कहा। कार के अंदर मौजूद आतंकी घबरा गए और कार को तेजी से गेट नंबर 9 की ओर मोड़ दिया। जब प्रधानमंत्री राज्यसभा में आते हैं तो गेट नंबर 9 का इस्तेमाल करते हैं। कार तेजी से वहां से मुड़ी। गेट नंबर 11 पर तैनात सीआरपीएफ कॉन्स्टेबल कमलेश कुमारी भी गाड़ी की ओर भागी और ड्राइवर को रुकने को कहा। आतंकी कार छोड़कर गेट नंबर 9 की ओर भागने की कोशिश करने लगे। अब आतंकियों ने गोली चलाना शुरू कर दिया था। आतंकियों की गोलीबारी में जे. पी. यादव और कमलेश की मौत हो गई। उनका शव गेट नंबर 11 पर पड़ा हुआ था। तब वहां तैनात सीआरपीएफ के जवानों ने जवाब में गोली चलाना शुरू किया और तीन आतंकियों को घायल कर दिया। घायल आतंकी दीवर पर चढ़कर गेट नंबर 9 को पार करने की कोशिश की। जब वे गेट पर पहुंचे तो उनको सुरक्षाकर्मियों ने मार गिराया। उसके बाद बाकी के आतंकियों को भी मार गिराया गया। हमले में छह पुलिसकर्मी, संसदीय सुरक्षा सेवा के दो जवान और एक माली की भी मौत हुई।
हमले में आतंकी संगठन का हाथ
इस हमले में पाकिस्तानी आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद का हाथ सामने आया। व्यापक जांच के बाद अफजल गुरु, शौकत हुसैन, एस. ए. आर. गिलानी और नवजोत संधू को आरोपी बनाया गया। नवजोत संधू को सभी आरोपों से मुक्त कर दिया गया, सिर्फ आईपीसी की सेक्शन 123 के तहत उस पर मुकदमा चला। इसके लिए नवजोत को दोषी ठहराया गया। उसे पांच सेल की जेल और जुर्माने की सजा सुनाई गई। ट्रायल कोर्ट ने बाकी की तीन लोगों को मौत की सजा सुनाई। बाद में एस. ए. आर. गिलानी को दिल्ली हाई कोर्ट द्वारा बरी कर दिया गया और शौकत हुसैन की मौत की सजा कम करके आजीवन कारावास की सजा कर दी गई। शौकत हुसैन को अच्छे व्यवहार की वजह से बरी होने की ऑफिशल डेट से नौ महीने पहले छोड़ दिया गया।
अफजल गुरु को फांसी
अफजल गुरु की फांसी की सजा बरकरार रही। उसने सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू पिटीशन दाखिल किया था जिसे सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया था। उसके बाद अफजल गुरु ने तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के पास दया याचिका दाखिल की जिसे राष्ट्रपति ने खारिज कर दिया। 9 फरवरी 2013 को तिहाड़ जेल में अफजल गुरु को फांसी दे दी गई।
-एजेंसियां

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