जापान में नए युग की शुरुआत, सम्राट अकिहितो ने नारोहितो को सौंपी राजगद्दी

126वें सम्राट बन कर नारोहितो औपचारिक रूप से जापान के राजसिंहासन पर बैठ गए हैं. भारतीय समयानुसार मंगलवार की आधी रात को सम्राट अकिहितो ने ‘क्राइसैंथिमम थ्रोन’ (राजगद्दी) अपने बेटे नारोहितो को सौंप दी. सम्राट नारोहितो ने राजसिंहासन पर बैठने के साथ ही अपने पहले संबोधन में खुशहाली और विश्व शांति की उम्मीद जताई.
इंपीरियल पैलेस में आयोजित पारंपरिक रीति-रिवाजों के बीच नारोहितो की ताजपोशी हुई और उन्हें जापान के शाही खजाने की चाबी सौंपी गई.
जापान में जब कोई राजा अपनी गद्दी छोड़ते हैं तो एक युग का अंत हो जाता है और नए राजा के बनने के साथ ही एक नया युग शुरू होता है.
जापान में नए युग की शुरुआत होने की हाल ही में घोषणा की गई थी.
नारोहिता के राजसिंहासन पर बैठने के साथ ही यह देश अब एक नए युग में प्रवेश कर गया है. इस नए युग का नाम रेइवा है जो नारोहितो के शासनकाल तक चलेगा.
जापान में राजा के पास कोई राजनीतिक शक्ति नहीं होती है लेकिन वो एक राष्ट्रीय प्रतीक के तौर पर देखे जाते हैं.
ताजपोशी और विदाई समारोह में क्या हुआ?
मंगलवार की रात स्थानीय समयानुसार रात 10.15 बजे ताजपोशी कार्यक्रम की शुरुआत हुई. इस दौरान 59 वर्षीय नए सम्राट नारोहिता को राजपरिवार की तलवार और मूल्यवान आभूषण सौंपे गए. इसे राज परिवार की ताक़त के प्रतीक के रूप में देखा जाता है.
पारंपरिक पोशाक में अकिहितो सबसे पहले शाही परिवार की कुल देवी अमेतरासु के मंदिर में गए जहां उन्होंने देवी को अपने पद छोड़ने की सूचना देने की परंपरा का पालन किया.
इसके बाद शाही महल में उनकी विदाई समारोह का आयोजन किया गया. इस दौरान शाही परिवार, देश के प्रधानमंत्री शिंजो आबे समते देश के कई शीर्ष अधिकारियों की मौजूदगी में उनके राजगद्दी छोड़ने का ऐलान किया गया.
सम्राट अकिहितो ने आख़िर राजगद्दी क्यों छोड़ी?
क़रीब 200 साल के जापानी राजघराने के इतिहास में अकिहितो ऐसे पहले राजा हैं जो अपनी इच्छा से राजगद्दी छोड़ रहे हैं. 85 वर्षीय अकिहितो ने स्वास्थ्य कारणों से राजगद्दी छोड़ा है.
साल 2016 में सम्राट अकिहितो ने देश के नाम एक ख़ास संबोधन में कहा था कि उन्हें इस बात का डर है कि उनकी बढ़ती उम्र के कारण वो एक राजा की ड्यूटी ठीक तरह से नहीं निभा पाएंगे.
उसी समय उन्होंने इस बात के साफ़ संकेत दिए थे कि वो राजगद्दी छोड़ना चाहते हैं.
उसके एक साल बाद 2017 में जापान की संसद ने एक ख़ास क़ानून बनाकर उन्हें राजगद्दी छोड़ने की इजाज़त दी.
अकिहितो ने 1989 में राजगद्दी संभाली थी. 30 सालों तक सम्राट रहने के बाद अकिहितो ने बतौर सम्राट अपने अंतिम संबोधन में सहयोग के लिए लोगों का आभार जताया और शांति की कामना की.
नारोहितो का परिचय
59 साल के नारोहितो ऑक्सफ़ोर्ड में पढ़े हैं और 28 साल की उम्र में युवराज घोषित कर दिए गए थे.
1986 में एक चाय पार्टी के दौरान उनकी मुलाक़ात प्रिंसेज़ मसाको ओवाडा से हुई जो बाद में 1993 में उनकी पत्नी बनीं.
नारोहितो और मसाको को सिर्फ़ एक बेटी है जिनका नाम प्रिंसेज़ आइको है और वो 18 साल की हैं लेकिन जापान के मौजूदा क़ानून के तहत महिलाओं को राजगद्दी नहीं मिलती है इसलिए वो जापान की अगली वारिस नहीं हैं.
इसलिए नए सम्राट नारोहितो के भाई राजकुमार फ़ुमिहितो अगले वारिस हैं.
जापान इस बदलाव को कैसे देख रहा है?
जापान में इस समय एक सप्ताह की सालाना छुट्टी मनाई जाती है लेकिन सम्राट के राजगद्दी छोड़ने और नए राजा के राज्यअभिषेक के कारण इस छुट्टी को बढ़ाकर दस दिनों की कर दी गई है.
जापान के लोग इसे एक त्योहार की तरह मना रहे हैं. 30 साल पहले जब अकिहितो सम्राट की गद्दी पर बैठे थे तब पूरे जापान में शोक मनाया जा रहा था क्योंकि उस समय अकिहितो के पिता और तत्कालीन सम्राट की मौत हुई थी.
लेकिन इस बार लोग ख़ुशियां मना रहे हैं. छुट्टी पर जा रहे हैं, सिनेमाघरों और बाज़ारों में भारी भीड़ देखी जा रही है. राजगद्दी छोड़ने से जुड़े समारोह को लाइव प्रसारित किया जा रहा है तो लोग घरों में या फिर बाज़ार में रहकर टीवी पर देख रहे हैं.
राजगद्दी छोड़ने के बाद अकिहितो को जोको का ख़िताब दिया जाएगा जिसका अर्थ होता है चक्रवर्ती महाराज.
राजघराना क्यों अहम है?
यह दुनिया में अकेला ऐसा राजघराना है जो पिछले 2600 साल से लगातार जापान पर शासन करता चला आ रहा है. जापान के सम्राट को भगवान समझा जाता था लेकिन अकिहितो के पिता सम्राट हिरोहितो ने दूसरे विश्व युद्ध में जापान की हार के बाद सार्वजनिक तौर पर कहा था कि उनके पास कोई दैवी शक्ति नहीं है.
विश्व युद्द के बाद जापान को जब आत्मसमर्पण करना पड़ा था तो उसके रुतबे को काफ़ी ठेस पहुंचा था लेकिन जब अकिहितो ने 1989 में राजगद्दी संभाली तब से उन्होंने जापान की शान-ओ-शौकत को दोबारा बहाल करने में बहुत हद तक सफलता पाई.
जापान के राजा आम जनता से शायद ही कभी मिलते थे लेकिन सम्राट अकिहितो ने इसे बदल दिया और आम लोगों से मेल-जोल करने लगे.
सम्राट अकिहितो पिछले 200 सालों में राजगद्दी छोड़ने वाले पहले राजा हैं लेकिन ऐसा नहीं है कि जापान के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है.
जापान के राष्ट्रीय प्रसारक एनएचके के अनुसार क़रीब आधे राजा और रानियों ने आठवी शताब्दी से 19वीं शताब्दी के दौरान राजगद्दी छोड़ दी थी.
-BBC

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