मंदिर के बाहर भिक्षा मांगने वाले ने दान किए आठ लाख रुपये

विजयवाड़ा। भिखारी, भिक्षुक और मांगने वाले साधु जैसे शब्द सुनकर मन में फटेहाल और गरीब इंसान की छवि बनती है। तेलंगाना के विजयवाड़ा में रहने वाले यदि रेड्डी ने यह छवि एक झटके में तोड़ दी है। कमंडल लेकर भिक्षा मांगने वाले यदि रेड्डी ने मुत्यलमपाडु के साईं मंदिर में आठ लाख रुपये का दान दिया है। मंदिर में आने वाले श्रद्धालु इस भगवाधारी साधु के सामने रखे कमंडल में दान देते हैं और उनका आशीर्वाद लेते हैं।
साईं बाबा मंदिर की गौशाला, अन्नदान केंद्र और अन्य जगहों पर यदि रेड्डी की तस्वीरें लगाई गई हैं। यदि रेड्डी मंदिर के गेट पर ही भिक्षा मांगते हैं। अभी तक वह कई सालों में मंदिर के कई कामों के लिए लगभग आठ लाख रुपये दान कर चुके हैं। उन्हीं से प्रेरित होकर कई और लोगों ने भी दान करना शुरू कर दिया है।
30 साल रिक्शा चलाया फिर मांगने लगे भीख
तेलंगाना के नालगोंडा जिले में जन्मे यदि रेड्डी 10 साल की उम्र में ही विजयवाड़ा आ गए थे। 30 सालों तक उन्होंने रिक्शा चलाया। बाद में वह बीमार होने के बाद वह मंदिर के बाहर भीख मांगने लगे। यदि रेड्डी कहते हैं, ‘मैं साईं बाबा की पूजा की और वादा किया कि अगर मैं ठीक हो गया तो एक लाख रुपये का दान करूंगा। मैंने ठीक होने के बाद एक लाख का दान किया था। शुरुआत में तो मंदिर प्रशासन के लोग हैरान रह गए लेकिन धीरे-धीरे श्रद्धालुओं की कृपा से मैं दान करता गया।’
मंदिर के अध्यक्ष पी गौतम रेड्डी बताते हैं, ‘यदि रेड्डी ने मंदिर की गोशाला के लिए तीन लाख रुपये दान दिए। उन्होंने दत्तात्रेय मंदिर के निर्माण में मदद की और चांदी के गहने भी दान किए। वह अपनी सारी कमाई मंदिर को ही दान कर देते हैं क्योंकि उनका कोई परिवार नहीं है।’
सेवा ही है मकसद, सारी कमाई कर देते हैं दान
अपनी दानवीरता के बारे में यदि कहते हैं कि इससे बाकी लोग भी दान देने के लिए आगे आएंगे। उनका कहना है, ‘मैंने हमेशा से साईं बाबा की सेवा करने के बारे में सोचा। मैं अपनी सारी कमाई भलाई के काम में खर्च करता हूं। मंदिर में कोई निर्माण कार्य होता है, तब भी मैं मदद करने की कोशिश करता हूं। यह मेरी इच्छा है।’
-एजेंसियां

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