मथुरा में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी: रजत-कमल पुष्प में होगा ठाकुरजी का प्राकट्य एवं महाभिषेक

मथुरा। जिस मथुरापुरी का महिमागान श्रीमद्भागवत, महाभारत, गर्ग संहिता, अष्टादश पुराण सहित अनेकानेक उत्कीर्ण संस्कृत अभिलेखों में किया गया है, भगवान श्रीकृष्ण की उसी पवित्र प्राकट्य भूमि पर पूर्णावतार, रसावतार, प्रेमावतार भगवान श्रीकृष्ण का जन्म महोत्सव शास्त्रीय मर्यादाओं एवं परंपराओं के अनुसार भाद्रपद कृष्ण अष्टमी तद्नुसार दिनांक 24 अगस्त 2019 शनिवार को मनाया जा रहा है।

भगवतप्राप्त संतों का मत रहा है कि श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के दिन श्रीकृष्ण जन्मभूमि का महोत्सव अखिल ब्रह्माण्ड में स्थित समस्त तीर्थों में अनूठा है क्योंकि भगवान श्रीनारायण ने पूर्णावतार, प्रेमावतार रूप में श्रीकृष्ण जन्म की लीला मथुरा में ही की है।

Press conference By kapil sharma and gopeshwar chaturvedi , officiales of Shri Krishna JanmaSthan
Press conference By kapil sharma and gopeshwar chaturvedi at Shri KrishnaJanmaSthan seva  Sansthan

इस संबंध में श्रीकृष्ण जन्मभूमि न्यास के सचिव श्री कपिल शर्मा ने जानकारी देते हुये बताया कि श्रीकृष्ण-जन्मभूमि के संपूर्ण परिसर को अद्भुद कलात्मकरूप से सजाया जा रहा है। इस अवसर की महत्ता, जन्मभूमि की गरिमा एवं भक्तों की भावनाओं के अनुरूप जन्मभूमि की नयनाभिराम भव्य साज-सज्जा को देखकर श्रद्धालुगण अभिभूत हो उठेंगे। जन्मभूमि के संपूर्ण प्रांगण, भवनों एवं देवालयों को ब्रज के भावुक भक्त सज्जाकारों के साथ-साथ देश के विभिन्न भागों से पधारे कारीगर अद्भुद् स्वरूप प्रदान करने के लिए दिन-रात साज-सज्जा एवं विद्युत सजावट के कार्यों में लगे हुये हैं। जन्मभूमि के अंदर से अथवा परिसर के बाहर से श्रद्धालुगण जिस दिशा से भी श्रीकृष्ण जन्मभूमि के दर्शन करेंगे, वहीं से उनको जन्मभूमि की नयनाभिराम छटा के दर्शन प्राप्त हों, ऐसा संस्थान का प्रयास है।

जन्मभूमि परिसर में स्थित श्रीकेशवदेव मंदिर में विविध प्रकार के पुष्प, पत्र एवं वस्त्रों से निर्मित भव्य बंगले में ठाकुरजी विराजमान होंगे। भगवान की प्राकट्य भूमि एवं कारागार के रूप में प्रसिद्ध गर्भगृह की सज्जा चित्ताकर्षक होगी। मंदिर के प्राचीन वास्तु के अनुरूप गर्भगृह के भीतरी भाग को सजाया जायेगा। पुष्प, रत्न प्रतिकृति के अद्भुत संयोजन से गर्भगृह के मूल स्वरूप में बिना कोई परिवर्तन किये दिव्य स्वरूप प्रदान किया जायेगा। साथ ही पर्व के अनुकूल प्रकाश का संयोजन भी गर्भगृह की भव्यता एवं दिव्यता में वृद्धि करेगा। गर्भगृह के बाहरी हिस्से में उत्कीर्ण भगवान के जन्म से पूर्व की लीलाऐं भक्तों के आकर्षण का केन्द्र रहती हैं। इन स्थानों पर प्रकाश की विशेष व्यवस्था रहेगी।
भागवत भवन मंदिर की साज-सज्जा व्यवस्था हेमन्त मुकुटवाले एवं गोविन्द अग्रवाल, श्रीकेशवदेव मंदिर प्रांगण की साज-सज्जा में अनिलभाई ड्रेसवाले विशेष योगदान दे रहे हैं तथा विद्युत सजावट में भागवत भवन मंदिर प्रांगण में आगरा के राजेश सिन्हा, श्रीकेशवदेव मंदिर प्रांगण में अलीगढ़ के सोमेन्द्र गुप्ता एवं बाह्य क्षेत्र में मथुरा के निरंजन प्रसाद गुप्ता का निरन्तर सहयोग मिल रहा है।

पत्र, पुष्प, रत्न प्रतिकृति, वस्त्र आदि के अद्भुद संयोजन से बनाये गये ‘पुष्प तेजोमहल’ बंगले में विराजमान हो ठाकुरजी बड़े ही मनोहारी स्वरूप में दर्शन देंगे। पत्र, पुष्प, काष्ठ आदि से निर्मित इस बंगले की छठा और कला निश्च‍ित ही अनूठी होगी।

इस पवित्र अवसर पर ठाकुरजी रेशम, जरी एवं रत्न प्रतिकृति के सुन्दर संयोजन से बनी ‘मृगांक कौमुदी’पोषाक धारण करेंगे। श्रीकृष्ण -जन्माष्टमी 24अगस्त शनिवार को प्रातः मंगला-दर्शन से पूर्व भगवान इसी पोषाक को धारण कर दर्शन देंगे। पोशाक में रत्न, मोती एवं रेशम का उपयोग करते हुये कमल-पुष्प, पत्ती, लता-पता आदि की जड़ाई की गयी है। रेशम एवं रत्न प्रतिकृति के प्रयोग करते समय यह ध्यान रखा गया है कि भक्तों को सभी आकृतियां स्पष्ट रूप से दृष्टव्य हों ।

श्रीकृष्ण जन्मभूमि न्यास के सचिव कपिल शर्मा ने बताया कि जन्माष्टमी की पूर्व संध्या 23 अगस्त शुक्रवार को सांय 6.00 बजे श्रीकेशवदेव मंदिर से संत एवं भक्तजन ढोल-नगाड़े, झांझ-मंजीरे, के मध्य भगवान श्री राधाकृष्ण की दिव्य पोशाक अर्पित करने के लिए संकीर्तन करते हुये जायेंगे। पोशाक, मुकुट, श्रंगार, दिव्य मोर्छलासन, कामधेनु गाय की प्रतिकृति एवं दिव्य रजत कमल के विशेष दर्शन होंगे। इस वर्ष सुन्दर जरी, रेशम एवं रत्नप्रतिकृतियों के संयोजन से दिव्य ‘ब्रजरत्न’ मुकुट, जन्माष्टमी के पवित्र दिन ठाकुरजी धारण करेंगे। इस वर्ष भगवान श्रीराधाकृष्ण के दिव्य विग्रह को नवरत्न जड़ित स्वर्ण-कण्ठा धारण कराया जायेगा।

23 अगस्त शुक्रवार की सांय 6.30 बजे भागवत भवन में जन्म महोत्सव की ‘मृगांक कौमुदी’ पोशाक, मोर्छलासन, स्वर्ण मण्डित रजत कामधेनु स्वरूपा गौ प्रतिमा एवं ‘ब्रजरत्न’ मुकुट के एवं दिव्य रजत कमल-पुष्प् के विशेष दर्शन होंगे। यह अवसर जन्माष्टमी महोत्सव का महत्वपूर्ण अंग है।

दिनांक 24 अगस्त शनिवार को प्रातः दिव्य शहनाई एवं नगाड़ों के वादन के साथ भगवान की मंगला आरती के दर्शन होंगे। तदोपरान्त भगवान का पंचामृत अभिषेक किया जायेगा एवं ठाकुरजी के प्रिय स्त्रोतों का पाठ एवं पुष्पार्चन होगा। प्रातः 10.00 बजे श्रीकृष्ण जन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष पूज्यनीय महंत श्रीनृत्यगोपाल दासजी महाराज एवं कार्ष्ण‍ि गुरूशरणानन्दजी महाराज के भावमय सानिध्य में दिव्य पुष्पांजलि का कार्यक्रम श्रीकृष्ण जन्मभूमि के सिद्ध लीलामंच पर संपन्न होगा।

प्रातः 10.00 बजे से जन्मस्थान के सिद्ध लीलामंच पर भगवान की आरती एवं कीर्ति किशोरी जी द्वारा सुन्दर भजन गायन होगा।

जन्म महाभिषेक का मुख्य एवं अलौकिक कार्यक्रम रात्रि 11.00 बजे श्रीगणेश-नवग्रह आदि पूजन से शुरू होगा। रात्रि 12.00 बजे भगवान के प्राकट्य के साथ संपूर्ण मंदिर परिसर में बज उठेंगे शंख, ढोल-नगाड़े, झांझ-मंजीरे और मृदंग एवं हरिबोल एवं करतल ध्वनि के साथ नाच उठेंगे असंख्य भक्तजन, संत एवं भगवान के जन्म की प्राकट्य आरती शुरू होगी जो रात्रि 12.10 बजे तक चलेगी। शंख एवं ढोल, मृदंग आदि अभिषेक स्थल पर तो बजेंगे ही साथ-ही-साथ सपूर्ण मंदिर परिसर में स्थान-स्थान पर भी इनका वादन होगा।

इस वर्ष लीलामंच, मुख्यद्वार पर लगे पी0ए0 सिस्टम के माध्यम से श्रीकृष्ण-जन्मभूमि से किया जा रहा शंखनाद का अलौकिक आनन्द मथुरा नगर के एक बड़े भाग में स्पष्ट सुनाई देगा।

इस वर्ष मुंबई से विशेष रूप से ढोल वादक बुलाये गये हैं जो घण्टे, घड़ियाल एवं ढोल के सामंजस्य से अद्भुद एवं दिव्य मंगल वादन करेंगे। सायंकाल लीलामंच के समक्ष एवं रात्रि में अभिषेक स्थल पर यह अद्भुद ढोल वादन, उत्सव के आनन्द में निश्च‍ित ही वृद्धि करेंगे। इससे आनन्दविभोर श्रद्धालु हरिनाम संकीर्तन एवं नृत्य आदि कर भगवान के समक्ष अपने भावसुमन अर्पित कर पायेंगे। तदोपरान्त केसर आदि सुगन्धित द्रव्यों से लिपटे हुये भगवान श्रीकृष्ण के चल विग्रह मोर्छलासन में विराजमान होकर अभिषेक स्थल पर पधारेंगे।

पौराणिक एवं शास्त्रीय परंपराओं के अनुसार ऐसी मान्यता है कि भगवान के जन्ममहाभिषेक महोत्सव के दर्शन करने के लिए देव के देव देवाधिदेव महादेव सहित 33 कोटि देवतागण उपस्थित रहते हैं। भगवान का प्रथम जन्माभिषेक स्वर्ण मण्डित रजत से निर्मित कामधेनु स्वरूपा गौमाता करेंगी। शास्त्रीय मान्यता है कि गौमाता में स्वयं 33 कोटि देवतागण वास करते हैं। रजत कमलपुष्प में विराजमान ठाकुरजी के श्रीविग्रह का अभिषेक स्वर्ण मण्डित रजत गौ विग्रह के पयोधरों से निकली दुग्धधारा से होगा। ठाकुरजी के अभिषेक से पूर्व गौमाता का पूजन कर देवताओं का आव्हान पूजाचार्य करेंगे।

ठाकुरजी के श्रीविग्रह का दूध, दही, घी, बूरा, शहद आदि सामग्रियों से दिव्य महाभिषेक किया जायेगा। जन्माभिषेक के उपरान्त इस महाप्रसाद का वितरण जन्मभूमि के निकास द्वार के दोनों ओर वृहद मात्रा में किया जायेगा। भगवान का जन्म महाभिषेक रात्रि 12.15 बजे से रात्रि 12.30 बजे तक चलेगा। तदोपरान्त 12.40 से 12.50 तक श्रंगार आरती के दर्शन होंगे। जन्म के दर्शन रात्रि 1.30 बजे तक खुले रहेंगे।

‘‘कृष्णंं वन्दे जगद्गुरूम्’’ भगवान श्रीकृष्ण का संपूर्ण जीवन, दर्शन, लीलाओं में मानवता का कल्याण एवं उत्थान का संदेश स्पष्ट है। आज विश्व के अधिकांष देशों में भगवान श्रीकृष्ण के द्वारा उद्भाशित परम दिव्य श्रीमद्भगवत गीता एवं कृष्ण लीलाओं का चिन्तन एवं अनुसरण करने वाले भक्त अवश्य मिल जायेंगे। भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं, दर्शन एवं उपदेशों को व्यापक रूप से लोगों तक पहुंचाने के लिए ‘कृश्णं वन्दे जगद्गुरूम्’ के भाव को हृदयंगम कर सशक्त भारत, समृद्ध भारत, अखण्ड भारत के संकल्प के साथ 5246वें जन्मोत्सव की पूजा, संकल्प एवं महाभिषेक होगा।

इस नयनाभिराम दृश्य को विभिन्न टी0वी0 चैनलों पर प्रसारित होने वाले कार्यक्रम में सजीवता के साथ दिखाया जा सके इसके लिए अभिषेक स्थल पर बनाये जा रहे मंच को भी विशेष स्वरूप प्रदान किया जायेगा।

श्रीकृष्ण-जन्मस्थान सेवा-संस्थान की प्रबंध समिति के सदस्य  गोपेष्वरनाथ चतुर्वेदी ने बताया कि भगवान के दर्शनार्थ बाहर से आने वाले श्रद्धालु जहां स्थान की भव्यता एवं दिव्यता को देखकर आनन्दित हो उठेंगे , वहीं टी0वी0 चैनलों के माध्यम से इस अलौकिक महोत्सव के प्रसारण को देखने वाले श्रद्धालुओं को भी वही आभास होगा जैसे वे स्वयं कृष्ण की पवित्र प्राकट्य भूमि पर मनाये जा रहे इस जन्म महोत्सव अभिषेक में सम्मिलित हों, ऐसा संस्थान का प्रयास है। संस्थान का यह भी प्रयास है कि जो भावना एवं कल्पना इस पवित्र स्थान पर इस अलौकिक जन्म महोत्सव के लिए भक्तों के हृदय में सदैव बनी रहती है। वह इस उत्सव के दर्शन से अधिक पुश्ट हो।

इस जन्माष्टमी महोत्सव पर ठाकुरजी को मुख्यतः मेवा लड्डू , कूटू लड्डू , गोंद लड्डू , मिंगी लड्डू , मेवापाक, पकवान एवं फल आदि का भोग वृहद मात्रा में अर्पित किया जायेगा, साथ ही इस प्रसाद को सुचारू एवं व्यवस्थित रूप से वितरण भी कराया जायेगा।

देश-विदेश से पधारने वाले लाखों श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए जन्मभूमि के सभी संपर्क मार्गो पर जूताघर एवं सामान घर की व्यवस्था की गयी है, सभी आवश्यक स्थानों पर पेयजल उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है, जो श्रद्धालु मंदिर में भीड़- भाड़ के कारण प्रवेश न कर पायेंगे उनके लिए सी0सी0 स्क्रीन मंदिर के प्रांगण एवं मंदिर परिसर से बाहर लगायी जायेंगी। जन्मभूमि के निकट खुले स्थानों पर तिरपाल आदि की व्यवस्था की गयी है, जिससे दूर से आने वाले श्रद्धालुजन विश्राम कर सकें, श्रद्धालुओं के सुगम प्रवेश को दृष्ट‍िगत रखते हुये लाउडस्पीकर के माध्यम से निर्देश दिये जायेंगे, साथ ही बैरीकेडिंग इस प्रकार से की जा रही है कि जिससे कि श्रद्धालु कम से कम समय में दर्शन प्राप्त कर सकें। जन्माष्टमी के दिन श्रद्धालुओं का प्रवेश गोविन्द नगर द्वार (गेट नं0-3) से होगा एवं निकास मुख्य द्वार (गेट नं0-1) से होगा।

श्रद्धालु जन्मभूमि के लिए प्रस्थान करते समय अपने आवश्यक सामान जैसे – मोबाइल फोन, कैमरा, रिमोट कीरिंग, थैला, माचिस, बीड़ी, सिगरेट, तम्बाकू ,चाकू, ब्लेड आदि अन्य कोई भी इलैक्ट्रोनिक सामान अपने साथ न ले जायें। इन्हें या तो अपने वाहन में, अपने ठहरने के स्थान पर छोड़ कर आयें अथवा मार्ग में बने सामान घर में जमा कर रसीद/कूपन अवश्य प्राप्त कर लें। साथ ही प्रशासन से अनुरोध किया है कि जहां भी यथाआवश्यक सड़कों, नालियों की सफाई एवं मरम्मत आदि के कार्यो को प्राथमिकता के आधार पर संपन्न करायें, जिससे श्रद्धालुओं को कोई असुविधा न हो।

श्री चतुर्वेदी ने पुलिस-प्रशासन, नगर निगम एवं अन्य संबंधित विभागों से श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए निष्चित किये गये कार्य शीघ्र अति षीघ्र संपन्न कराने का अनुरोध किया है। सड़कों की मरम्मत, पर्याप्त विद्युत व्यवस्था, पार्किंग आदि की व्यवस्थायें शीघ्र अतिशीघ्र हो जायें। यह उत्सव की गरिमा एवं श्रद्धालुओं के हित में है।

श्रीकृष्ण-जन्मस्थान सेवा-संस्थान विगत वर्षों की भांति पांच स्थानों पर जूताघर- सामानघर का संचालन करेगा। यह सामान घर 1-श्रीजी बाबा आश्रम के निकट, 2-रूपम सिनेमा 3-श्रीकृष्ण पार्क (श्रीगर्तेश्वर मंदिर के निकट) 4-श्रीगर्तेश्वर मंदिर के निकट 5-राधिका गेस्ट हाउस (पतंजलि स्टोर के निकट) पर बनाये जायेंगे। प्रत्येक सामान घर, जूता घर के साथ आपात कालीन स्थिति में श्रद्धालुओं को प्राथमिक चिकित्सा सेवा प्रदान करने के लिए मुख्य चिकित्साधिकारी, मथुरा के सहयोग से व्यवस्थायें सुनिश्च‍ित की जायेंगी।

श्रद्धालुओं की सुविधा, सामान घर-जूता घर के सुचारू संचालन एवं श्रद्धालुओं के परिसर में सुगम एवं निर्बाध प्रवेश को दृष्ट‍िगत रखते हुये संस्थान द्वारा गोविन्द नगर थाने के समीप जन्मस्थान सेवा-संस्थान के गौ चिकित्सालय (महाविद्या चौराहा के निकट) में सेवा नियंत्रण-कक्ष बनाया जायेगा। जहां संस्थान के अधिकारी श्रद्धालुओं की आवष्यकता अनुसार सेवा के लिए उपलब्ध रहेंगे।

संस्थान द्वारा परिजनों से बिछुड़े हुये लोगों को मिलाने के लिए परिसर के चारों तरफ खोया-पाया सूचना केन्द्र स्थापित किये जायेंगे। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए जन्मभूमि द्वारा स्थापित किये जा रहे प्रत्येक जूताघर-सामानघर के साथ ही खोया-पाया सूचना केन्द्र भी स्थापित होंगे, जिससे परिवार से बिछुड़े लोग इधर-उधर नहीं भटकेंगे और शीघ्र ही उनको परिवार से मिलाने की व्यवस्थाएं सुनिश्च‍ित की जायेंगी।

श्री चतुर्वेदी ने आगे बताया कि संस्थान द्वारा 27जुलाई 2019 को माननीय जिलाधिकारी महोदय को प्रेष‍ित पत्र में जन्माष्टमी महोत्सव संबंधी संपर्क मार्गो के निर्माण, श्रद्धालुओं हेतु वाहन पार्किंग, निर्बाध विद्युतापूर्ति, मोबाइल शौचालयों की उपलब्धता, पशुवध, मांस की दुकानों व शराब की दुकानों की बन्दी आदि जिन समस्याओं पर प्रशासन का ध्यान आकर्ष‍ित किया है। उन्होंने अपेक्षा की कि श्रद्धालुओं की सुविधा व धार्मिक श्रद्धा के दृष्ट‍िगत प्रशासन सभी अपेक्षाओं को पूरा करने का प्रयास अवश्य करेगा।
प्रेस वार्ता में संयुक्त मुख्य अधिशाषी राजीव श्रीवास्तव, ओएसडी गिर्राज षरण गौतम, विजय बहादुर सिंह, अनुराग पाठक, भगवान स्वरूप वर्मा, नारायन राय, रणधीर कुमार सिंह आदि उपस्थित थे।

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