टेरर फंडिंग करने वाला गिरोह लखीमपुर Kheri से गिरफ्तार

लखीमपुर खीरी । उत्तर प्रदेश के डीजीपी ओपी सिंह ने शुक्रवार को खुलासा किया कि टेरर फंडिंग का काम करने वाले गिरोह को लखीमपुर खीरी से गिरफ्तार किया गया है। इसमें उम्मीद अली, संजय अग्रवाल, शमीम सलमानी तथा एक अन्य शामिल है। ये जानकारी उन्होंने पुलिस मुख्यालय, गोमती नगर विस्तार में मीडिया ब्रीफिंग के दौरान दी।

उन्होंने बताया कि गिरोह ने नेपाली बैंक की बेबसाइट हैक करके 49 लाख रुपये निकाले थे। ये रुपये भारत में आतंकी गतिविधियों के लिए भेजे गए थे। इसमें चार अन्य लोग नेपाल से आतंकी गतिविधियों में भी शामिल हैं। उनके पास से मोबाइल फोन व अन्य उपकरण भी बरामद किए गए हैं। मुमताज नाम के अपराधी की नेपाल और यूपी पुलिस तलाश कर रही है। खीरी पुलिस ने मुकदमा पंजीकृत किया है। यह मुकदमा अब एटीएस को ट्रांसफर किया जा रहा है।

ये लोग विदेशों से धन मंगाकर अवैध गतिविधियों को संचालित करने थे। इनके पास से नेपाली करेंसी भी बरामद हुई हैं। इस केस में लखीमपुर खीरी से तीन और एक को बरेली से हिरासत में लिया गया है। इस दौरान एडीजी लॉ एंड ऑर्डर पीवी रामशास्त्री, एडीजी एटीएस और आईजी एसटीएफ अमिताभ यश भी साथ थे।

आरोपियों के मोबाईल डेटा को रिट्रीव कर नेटवर्क से जुड़े और लोगों की तलाश में यूपी एटीएस लग गई है। डीजीपी के मुताबिक वो डिप्लोमैटिक प्रक्रिया के तहत नेपाल सरकार (Nepal Government) से भी संपर्क कर रहे हैं। बहरहाल, इस गिरफ्तारी के साथ ही एटीएस ने भारत में टेरर फंडिंग के नए रूट (New Root of Terror Funding) का भी खुलासा कर दिया है। फंडिंग की ये खेप सीधे भारत के बैंकों में आने की बजाए नेपाल के बैंकों में आ रही है और यहां से लोगों के माध्यम से आतंक की पौध में खपाई जा रही है।

इस तरह हुआ टेरर फंडिंग नेटवर्क का खुलासा
किसी भी देश में आतंकी या राष्ट्र विरोधी गतिविधियों को चलाने के लिए बड़ी रकम की जरूरत होती है। भारत में भी ऐसी रकम अलग-अलग रास्तों से आती है. यूपी एटीएस ने आज ऐसे ही एक रास्ते का खुलासा किया है। दरअसल, एटीएस के रडार पर बीते कुछ दिनों से नेपाल से सटे लखीमपुर खीरी के कुछ युवक थे। एटीएस के पास इनपुट था कि पिछले साल टेरर फंडिंग नेटवर्क से जुड़े कुछ लोगों से ये युवक संपर्क में थे। शक के आधार पर जब इन्हें हिरासत में लेकर पूछताछ की गई तो नेपाल से जुड़े टेरर फंडिंग नेटवर्क का खुलासा हुआ।

उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के पुलिस महानिदेशक ओपी सिंह (DGP OP Singh) ने शुक्रवार को पुलिस विवेचना (Police Investigation) से जुड़े कई मुद्दों पर अपनी स्पष्ट राय रखी। डीजीपी ने पिछले दिनों लाइसेंसी असलहों (Licenced Firearms) के कारतूस के हिसाब मांगे जाने के आदेश का जिक्र करते हुए कहा कि गृह विभाग के शासनादेश के बाद लाइसेंसी असलहों के कारतूस का हिसाब मांगा जा रहा है। उन्होंने कहा कि हम पॉक्सो (Pocso Act) के मामलों में कोर्ट में मजबूत पैरवी कर रहे हैं। उन्होंने कानपुर में 23 दिन में आए पॉक्सो के मामले में सजा के ऐलान का जिक्र करते हुए कहा कि औरैया, कानपुर और आगरा पुलिस ने पॉक्सो में अच्छी कार्रवाई की है. डीजीपी ने कहा कि प्रदेश में पॉक्सो और रेप के मामलों में कमी आई है।

एडीजी लॉ एंड ऑर्डर की अध्यक्षता में कमेटी गठित
पुलिस पर लग रहे भ्रष्टाचार के आरोपों पर जवाब देते हुए डीजीपी सिंह ने कहा कि एफआईआर लिखे जाने के बाद पुलिस की विवेचना के साथ ही पुलिस का भ्रष्टाचार शुरू होता है। हमने इसलिए इस तरह के मामलों में एडीजी लॉ एंड ऑर्डर पीवी रामास्वामी की अध्यक्षता में एक सदस्यीय कमेटी का गठन किया है। यह कमेटी संगीन मुकदमों में फर्जी नामजदगी न हो, इस पर नजर रखेगी और पारदर्शी ढंग से मुकदमों की पैरवी करेगी।

– एजेंसी

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