तेलुगू सुपरस्टार महेश बाबू बोले, बॉलीवुड मुझे ‘अफ़ोर्ड’ नहीं कर सकता

साउथ की क़ॉफी के प्याले से एक बार फिर तूफान उठा है. वर्चस्व की लड़ाई अब गुरूर और गर्व तक पहुंच गई है.
ताज़ा वाक़या है महेश बाबू का बयान, जो साफ संकेत देता है कि वो बॉलीवुड की ‘महानता’ को अपने आगे कुछ नहीं समझते.
दरअसल, विवाद तेलुगू सुपरस्टार महेश घट्टामनेनी यानी महेश बाबू के हालिया बयान को लेकर शुरू हो गया है जो उन्होंने अपनी आने वाली फ़िल्म ‘मेज़र’ के ट्रेलर लॉन्च के दौरान दिया है.
महेश बाबू ने एक सवाल के जवाब में कहा कि उन्हें लगता है कि बॉलीवुड उन्हें ‘अफ़ोर्ड’ नहीं कर सकता, इसलिये वो वहाँ जा कर अपना समय बर्बाद नहीं करना चाहते. इस बयान के बाद जब उन्‍हें क्रिटिसाइज किया गया तो उनकी पीआर टीम की तरफ से एक स्टेटमेंट जारी कर अपनी सफाई दी गई. अपनी सफाई में महेश बाबू ने कहा कि वो सिनेमा से प्यार करते हैं और सभी भाषाओं की इज्जत करते हैं.
महेश बाबू को पैन इंडिया स्टार नहीं बनना है. वो तेलुगू में ही खुश हैं. महेश बाबू ने ये भी बताया कि उन्हें कई बॉलीवुड फिल्मों के ऑफ़र मिले हैं लेकिन वो तेलुगू के लिए ही सिनेमा बनाएंगे क्योंकि वो इससे ज़्यादा खुश नहीं होना चाहते.
अब ‘अफोर्ड’ के आप कई सारे मतलब बता सकते हैं लेकिन इसका सीधा साधा अर्थ तो यही लगता है कि बॉलीवुड वालों के पास इतना पैसा नहीं है कि वो महेश बाबू को अपनी फिल्म में कास्ट कर सकें.
यानी बाबू महेश इतने महँगे हो गए हैं!
वैसे महेश बाबू हिंदी पट्टी के लोगों के लिये भी कोई नया नाम नहीं है. कोल्ड ड्रिंक और एक विवादित टोबैको प्रोडक्ट की ऐड के जरिए देश-दुनिया में फेमस होने से पहले भी नॉन-दक्षिण भारतीय दर्शक साउथ की हिंदी डब फिल्मों के ज़रिये इनके चार्मिंग लुक को बहुत पसंद करते रहे हैं.
ग़ैर विवादित फैमिली मैन
‘प्रिंस ऑफ टॉलीवुड’ के नाम से फेमस महेश बाबू को गैर विवादित फैमिली मैन भी कहा जाता रहा है .
करीब 47 साल के महेश बाबू का एक्टिंग करियर बचपन में ही शुरू हो गया था. तेलुगू के जाने-माने अभिनेता कृष्णा के छोटे बेटे महेश ने फिल्म नीडा से शुरुआत कर बतौर चाइल्ड आर्टिस्ट आठ फिल्में की और ‘राजाकुमारुडू’ के लिये उन्हें उनका पहला अवॉर्ड भी मिला.
महेश बाबू ने 2003 में आई सुपरहिट फिल्म ‘ओक्काडू’ में कबड्डी प्लेयर की भूमिका निभाई थी जिसे तेलुगू की सबसे हिट फिल्मों में गिना जाता है.
उसके दो साल बाद आई ‘अथाडु’ ने भी कमाई के सारे रिकॉर्ड तोड़े थे. ‘मुरारी’, ‘पोकिरी’, ‘ननेक्कोडाइन’, ‘सरिमंथुडू’, ‘व्यापारी’, ‘सीथम्मा वकितलो सरिमल्ले चेट्टू’ जैसी फिल्मों के बाद महेश बाबू न सिर्फ इंटरनेशनल फेम सुपरस्टार बन गए बल्कि उन्हें फिल्मफेयर का बेस्ट एक्टर सहित कई पुरस्कार भी मिले.
अक्सर सोशल मीडिया पर अपनी फैमिली फोटोज के साथ एक्टिव रहने वाले महेश बाबू की शानोशौकत किसी से छिपी नही है.
महेश बाबू का नेटवर्थ
साल 2012 में फोर्ब्स की सेलिब्रिटी 100 लिस्ट में शामिल महेश बाबू का हैदराबाद स्थित घर वहां के सबसे महंगे घरों में एक है, जहां जिम, स्विमिंग पूल, मिनी थिएटर सहित काफी कुछ है.
हैदराबाद की जुबिली हिल्स में 30 करोड़ रुपये की कीमत के दो बड़े बंगले हैं. बेंगलुरु में भी कई प्रॉपर्टीज हैं.
एक डॉटकॉम कंपनी की रिपोर्ट के मुताबिक महेश बाबू का नेटवर्थ करीब 135 करोड़ रुपये हैं और वो एक फिल्म के लिये 55 करोड़ रुपये चार्ज करते हैं और प्रॉफिट में कमीशन भी लेते हैं.
ब्रांड्स एंडोर्समेंट से कमाई 15 करोड़ रुपये से अधिक है. एक करोड़ रुपये से महंगी कई गाड़ियां हैं, 7 करोड़ की वैनिटी वैन है.
पिछले 20 साल में 40 से अधिक फिल्में करने वाले महेश बाबू का अपना एक प्रोडक्शन हाउस भी है.
नम्रता शिरोडकर से शादी
साल 2005 में महेश बाबू ने बॉलीवुड एक्ट्रेस और शिल्पा शिरोडकर की बहन नम्रता शिरोडकर से शादी कर ली. महेश बाबू के दो बच्चे गौतम और सितारा हैं.
सितारों के मोम के पुतले दुनिया भर में वैक्स म्यूज़ियम में रखे जाते हैं लेकिन महेश बाबू एकमात्र ऐसे भारतीय एक्टर हैं जिनके मोम के पुतले को एक दिन में हैदराबाद में ला कर उस पर से पर्दा उठाया गया था.
हाल के वर्षों में महेश बाबू की लोकप्रियता सचमुच लोगों के सिर चढ़ बोली है.
महेश बाबू ने ‘सीरीमंथुडू’, ‘ब्रम्होत्सवम’, ‘स्पाइडर’, ‘भरत अने नेनु’, ‘महर्षि’, ‘सरिलेरू निकेवारू’ और ‘सरकारू वारी पाटा’ जैसी सुपरहिट फिल्में दे कर निर्माताओं की झोली भर दी है.
-एजेंसियां

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