तालिबान का प्रतिनिधिमंडल पहली बार चीन पहुंचा, विदेश मंत्री से की मुलाकात

अफगानिस्‍तान के 90 फीसदी इलाकों पर कब्‍जा करने का दावा करने वाले तालिबान का प्रतिनिधिमंडल मुल्‍ला अब्‍दुल गनी बरादर के नेतृत्‍व में चीन पहुंचा है। अमेरिकी सेनाओं की वापसी के ऐलान के बाद ऐसा पहली बार है जब तालिबानी नेता चीन पहुंचे हैं। इस यात्रा के दौरान तालिबानी नेताओं की चीन के विदेश मंत्री वांग यी के साथ मुलाकात हुई। राजनयिक हलकों में अफगानिस्‍तान को लेकर यह मुलाकात काफी अहम मानी जा रही है।
मुल्‍ला बरादर ने चीन को आश्‍वासन दिया कि अफगान धरती का इस्‍तेमाल किसी देश की सुरक्षा के खिलाफ नहीं होने दिया जाएगा। यह मुलाकात ऐसे समय पर हो रही है जब कुछ दिन पहले ही पाकिस्‍तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी और पाकिस्‍तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई के चीफ फैज हामिद ने भी चीन जाकर वांग यी से मुलाकात की थी। तालिबान ने चीन के शिंजियांग प्रांत से सटे देश के आधे से ज्‍यादा सीमाई इलाके पर कब्‍जा कर लिया है। चीन को डर सता रहा है कि आतंकी संगठन उसके शिंजियांग प्रांत में घुसपैठ कर सकते हैं।
चीन ने तालिबान से दोस्‍ती के लिए रखी बड़ी शर्त
इस लिहाज से भी तालिबान नेताओं के साथ चीनी विदेश मंत्री की मुलाकात काफी अहम मानी जा रही है। दोनों पक्षों के बीच चीन के तिआनजिन शहर में मुलाकात हुई। चीन ने तालिबान नेताओं से स्‍पष्‍ट रूप से कहा है कि वे सभी आतंकी संगठनों से अपने संबंध को पूरी तरह से खत्‍म करें। इसमें अलकायदा समर्थित उइगर मुस्लिम अतिवादी संगठन ETIM भी शामिल है जो शिंजियांग प्रांत की स्‍वतंत्रता के लिए लड़ाई लड़ रहा है।
वांग यी ने पिछले दिनों दुशांबे में कहा था कि गृहयुद्ध से बचा जाना चाहिए और बातचीत को फिर से शुरू करना चाहिए। वांग यी ने अफगानिस्‍तान के राष्‍ट्रपति अशरफ गनी की भी जमकर प्रशंसा की थी और कहा था कि उन्‍होंने राष्‍ट्रीय एकता के लिए काफी काम किया है। हालांकि तालिबान के दोस्‍त पाकिस्‍तानी विदेश मंत्री की चीन यात्रा के बाद ड्रैगन और मुल्‍ला बरादर की मुलाकात का क्‍या परिणाम निकलता है, यह देखना अहम होगा।
चीन के सख्‍त रुख के बाद पाकिस्‍तान ने साधने की कोशिश की
दरअसल, तालिबान को अंतर्राष्‍ट्रीय दोस्‍तों की दरकार है जो अफगान सरकार के खिलाफ जंग में उसकी मदद कर सकें। हालांकि उसके आतंकी इतिहास को देखते हुए ऐसा होता दिख नहीं रहा है। चीन के सख्‍त रुख के बाद पाकिस्‍तान ने उसे साधने की कोशिश की है। इससे पहले तालिबान ने चीन को दोस्‍त बताकर उसे अपने पाले में लाने का प्रयास किया था। तालिबान ने यह भी कहा कि वह अफगानिस्‍तान के पुनर्निमाण में चीन के निवेश पर जल्‍द से जल्‍द बातचीत करना चाहता है।
तालिबान के प्रवक्‍ता सुहैल शाहीन ने उइगर मुस्लिमों पर चीन का साथ देते हुए कहा क‍ि हम ड्रैगन विरोधी उइगर लड़ाकुओं को अपने देश में शरण नहीं देंगे। शाहीन ने कहा कि वह चीनी निवेश और उनके कामगार वापस लौटते हैं तो वह उनकी सुरक्षा की गारंटी देता है। उन्‍होंने कहा, ‘हम चीन का स्‍वागत करते हैं। अगर उनकी निवेश की इच्‍छा है तो हम उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करेंगे। चीनी निवेश और उनके कामगारों की सुरक्षा हमारे लिए बहुत महत्‍वपूर्ण है।’
अफगानिस्‍तान में छिपी है एक ट्रिल्‍यन डॉलर की संपदा
बता दें कि अफगानिस्‍तान में तांबा, कोयला, लोहा, गैस, कोबाल्‍ट, पारा, सोना, लिथियम और थोरियम के दुनिया के सबसे बड़े भंडारों में से एक हैं। इनकी कुल कीमत करीब एक ट्रिल्‍यन डॉलर आंकी गई है। चीन की कंपनी को वर्ष 2011 में तीन तेल क्षेत्र के लिए 40 करोड़ डॉलर का ठेका मिला था। चीन को लोगर प्रांत में तांबे के उत्‍खनन का भी अधिकार मिला था। यह काबुल से मात्र 40 किमी दूर है।
-एजेंसियां

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