अफगानिस्‍तान: अब्‍दुल रशीद दोस्‍तम के आलीशान ‘महल’ पर तालिबान का कब्‍जा, यूं ऐश कर रहे हैं आतंकवादी…

काबुल। तालिबानी आतंकियों ने अशरफ गनी के नेतृत्‍व वाली अफगान सरकार को उखाड़ फेंककर उसकी जगह पर अपनी अंतरिम सरकार बना ली है। तालिबान के लड़ाकुओं ने देश के सबसे कुख्‍यात वार लॉर्ड और देश छोड़कर भाग चुके पूर्व उप राष्‍ट्रपति अब्‍दुल रशीद दोस्‍तम के काबुल स्थित घर पर भी कब्‍जा कर लिया है। यह घर केवल नाम का ही है, अगर इसकी सुविधाओं को देखा जाए तो यह किसी अच्‍छे आलीशान महल को भी पीछे छोड़ देगा। तालिबान के सबसे बड़े दुश्‍मन कहे जाने वाले अब्‍दुल रशीद दोस्‍तम के सोने-चांदी के बर्तनों और बेशकीमती सामानों से भरे इस ‘महल’ में अब आतंकी ऐश कर रहे हैं। एक तरफ अफगान जनता गरीबी और बदहाली से जूझ रही थी, वहीं अब्‍दुल रशीद ऐशो-आराम से भरे महल में रहते थे। इन तस्‍वीरों के सामने आने के बाद दोस्‍तम कठघरे में हैं। तालिबानियों का कहना है कि अब्‍दुल रशीद दोस्‍तम ने भ्रष्‍टाचार के बल पर अपने महल को खड़ा किया था।
‘हरियाली’ से सराबोर है अब्‍दुल रशीद दोस्‍तम का महल
कभी मजार-ए-शरीफ के शेर कहे जाने वाले अब्‍दुल रशीद दोस्‍तम अब अपने महल को लेकर पूरी दुनिया में सुर्खियों में बने हुए हैं। इनका यह महल हर तरफ हरियाली से भरा हुआ है। पूरे महल में जहां हरे रंग की कालीन बिछी हुई है, वहीं एक शानदार बगीचा घर के अंदर मौजूद है। अब इस पूरे महल पर तालिबान‍ियों का कब्‍जा है। ताल‍िबानी लड़ाके कालीन, आलीशान सोफे पर सो रहे हैं। वहीं बगल में उनकी राइफलें भी पड़ी हुई हैं। महल के अंदर 7 विशाल टैंक बनाए गए हैं जिनमें मछलियां भरी हुई हैं। महल में गर्मी से निजात दिलाने के लिए कूलर और एसी लगे हुए हैं। कुछ सोफे दोस्‍तम के बगीचे में लगे हुए हैं, जहां पर अब तालिबानी आराम फरमाते हैं। आम अफगान जनता के लिए ये ऐशो आराम किसी सपने से कम नहीं था लेकिन दोस्‍तम अपने काबुल के इस महल में ऐश करते थे। घर में बने विशाल हॉल के अंदर शीशे के चैण्डेलयर (झाड़ फानूस) लगाए गए हैं जो देखने में बेहद आकर्षक लग रहे हैं। इस घर के अंदर ही एक विशाल और भव्‍य इंडोर स्विम‍िंग पूल भी मौजूद है।
​दोस्‍तम के महल पर अब तालिबानी कमांडर का कब्‍जा
अफगानिस्‍तान में तालिबान राज आने के बाद अब अब्‍दुल रशीद दोस्‍तम के इस पूरे महल पर आतंकियों का कब्‍जा हो गया है। इस महल में तालिबान के सबसे शक्तिशाली कमांडरों में से एक कारी सलाहूद्दीन अयोउबी और उसके समर्थक ऐश कर रहे हैं। तालिबानी कमांडर की सुरक्षा में तैनात 150 आतंकी अब इस घर में रह रहे हैं। गत 15 अगस्‍त को काबुल पर तालिबान के कब्‍जे के बाद से ही ये आतंकी दोस्‍तम के घर में मजे लूट रहे हैं। महल के अंदर तुर्की की शैली में भाप से नहाने का पूरा इंतजाम मौजूद है। यही नहीं, महल के अंदर ही मार्शल दोस्‍तम के लिए उपकरणों से लैस जिम भी बनाया गया है। तालिबानी आतंकियों के लिए यह किसी सपने की तरह से है जो करीब 20 साल से पहाड़ों और घाट‍ियों में जिंदगी बिता रहे थे। उधर, चार प्रांतों के तालिबानी कमांडर कारी ने स्‍पष्‍ट कर दिया है कि उसके लड़ाके इस लग्‍जरी लाइफ के आदी नहीं होंगे। कारी ने कहा, ‘इस्‍लाम कभी नहीं चाहता है कि इस तरह आलीशान जिंदगी बिताई जाए।’ उसने कहा है कि मरने के बाद जन्‍नत में आलीशान जिंदगी मिलेगी।
​तालिबान के सबसे बड़े दुश्‍मन रहे हैं अब्‍दुल रशीद दोस्‍तम
तालिबान के सबसे बड़े दुश्‍मन कहे जाने वाले अब्‍दुल रशीद दोस्‍तम का पूरा जीवन विवादों से भरा रहा है। वह पूर्व पैराट्रूपर, कम्‍यूनिस्‍ट कमांडर, वॉर लार्ड रह चुके हैं । दोस्‍तम उज्‍बेक मूल के हैं और पूर्व सरकार उन पर काफी भरोसा करती थी। तालिबानी आतंकी जब मजार-ए-शरीफ की ओर कब्‍जा करने के लिए बढ़े तो दोस्‍तम वहां से पड़ोसी देश उज्‍बेकिस्‍तान फरार हो गए। दोस्‍तम पर आरोप है कि उन्‍होंने भ्रष्‍टाचार की मदद से पिछली सरकार में काफी पैसा बनाया। तालिबानी दोस्‍तम से नफरत करते थे और इसकी खास वजह थी। वर्ष 2001 में दोस्‍तम पर आरोप लगा था कि उन्‍होंने तालिबान के 2000 से ज्‍यादा लड़ाकुओं को मार दिया। इन तालिबानियों को दोस्‍तम ने कंटेनर में भरकर रेगिस्‍तार में छोड़ दिया। तेज धूप के बीच उनकी दम घुटने से तड़प-तड़पकर मौत हो गई थी। उधर, तालिबानी कमांडर कारी ने कहा कि वह दोस्‍तम के लोगों से बदला नहीं लेंगे। कारी ने कहा, ‘हमारी तरह से दबाए गए लोग अगर यहां आए होते तो उन्‍होंने यहां की कुर्सियों और टेबल को बर्बाद कर दिया होता। हमारी नई सरकार इस तरह के लग्‍जरी महल को बनाने की अनुमति भविष्‍य में नहीं देगी। हम गरीबों के साथ हैं।’
अब्‍दुल रशीद दोस्‍तम ने छोड़ा अहमद मसूद का साथ
अब्दुल रशीद दोस्तम का अफगानिस्तान के उत्तरी इलाकों में बड़ा प्रभाव है। तालिबान का साथी पाकिस्तान भी दोस्तम के नाम से कांपता है। वर्ष 1990 में जब तालिबान के लड़ाके पूरे देश पर कब्जा करने के लिए हमला कर रहे थे तब उन्होंने अकेले ही उत्तरी क्षेत्रों में बगावत की कमान संभाली थी। पंजशीर में तालिबान और विरोधी गुटों के बीच भीषण लड़ाई जारी है। तालिबान के लड़ाके अमेरिकी हथियारों के साथ पंजशीर के काफी इलाकों पर कब्‍जा कर लिया है। संकट की इस घड़ी में पंजशीर के शेर अहमद मसूद के दोस्त अब्‍दुल रशीद दोस्‍तम ने भी मुसीबत के समय उनका साथ छोड़ दिया है। पहले ऐसी खबरें आई थी कि वह मसूद के मोर्चे का समर्थन करने के लिए एक गठबंधन का ऐलान करने वाले थे।दरअसल, तालिबान के कट्टर विरोधी अता मोहम्मद नूर, सलाहुद्दीन रब्बानी, मार्शल अब्दुल रशीद दोस्तम और मोहम्मद मोहकिक साथ मिलकर अहमद मसूद के समर्थन में एक गठबंधन बनाने वाले थे। अब खबर आ रही है कि तुर्की और ईरान सरकार के विरोध के कारण इन नेताओं ने फिलहाल गठबंधन बनाने से किनारा कर लिया है। इन दोनों देशों का तालिबान के साथ नजदीकी संबंध हैं। ऐसे में ये देश अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर अफगानिस्तान के इन वॉरलॉर्ड्स को रोक रहे हैं।
-एजेंसियां

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