ताइवान के तेवर सख्‍त: चीन से कहा, अपनी सीमा में रहें… हम आपके मातहत नहीं

ताइपे। चीन की दादागिरी और बेवजह आक्रामकता को लेकर ताइवान ने अपने तेवर सख्त कर दिए हैं। उपराष्ट्रपति लाइ चिंग ते ने चीन को आगाह किया है कि वह अपनी सीमा में रहे। ताइवान चीन का मातहत नहीं है और पूरी तरह संप्रभुता संपन्न देश है। एक संगोष्ठी में ताइवानी उपराष्ट्रपति लाई चिंग ते (Taiwanese Vice President Lai Ching-te) ने कहा कि चीन ताइवान पर अपनी दादागिरी ऐसे दिखा रहा है, जैसे हमारा देश उसका सहायक है।
उन्होंने कहा कि चीन को समझ लेना चाहिए कि इस देश की दो करोड़ तीस लाख की आबादी को अपना भविष्य खुद तय करने का अधिकार है। चीन की आक्रामकता और निर्मम व्यवहार इस कदर बढ़ गया है कि वह ताइवान के सहयोगी देशों को दिक्कत पहुंचाना चाहता है। यही नहीं ताइवान को व‌र्ल्ड हेल्थ असेंबली (डब्ल्यूएचए) जैसी अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में भाग लेने से रोकना चाहता है।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि चीन सिंतबर माह से लगातार अपने लड़ाकू विमान भेज रहा है, जो ताइवान की सीमा में घुसकर अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं। उल्लेखनीय है कि चीन पहले की चेतावनी दे चुका है कि ताइवान की स्वतंत्रता का मतलब युद्ध है।
ताइवान और चीन के बीच दुश्‍मनी जग जाहिर है। एक तरफ जहां चीन ताइवान पर अपना अधिकार जताता है वहीं दूसरी तरफ ताइवान खुद को एक स्‍वतंत्र देश मानता है। यही वजह है कि दोनों के बीच तीखी बयानबाजी से लेकर डराने और धमकाने की बात भी होती रहती है।
चीन से मुकाबले को वियतनाम तैयार कर रहा समुद्री सेना
दक्षिण चीन सागर में चीन के नियंत्रण की मंशा पर लगाम लगाने के लिए वियतनाम अपनी समुद्री सेना तैयार कर रहा है। नौसेना से संबधित एक पत्रिका ने कहा है कि वियतनाम आने वाले समय में चीन के समुद्र संबंधी नियमों के लिए खतरा बन सकता है। वियतनाम ने 2009 में एक कानून पारित किया था, जिसके तहत वियतनाम की समुद्री सेना को सीमा निगरानी का अधिकार दिया था। इसके साथ ही विदेशी पनडुब्बी या जहाज के घुसने पर कार्रवाई का भी अधिकार दिया था।
-एजेंसियां

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