समता एवं संतुलन की साधना है सामायिक: मंजुला जैन

सुविधा और सुख का संबंध नहीं है। पदार्थ की प्रचुरता है, किन्तु सुख नहीं है। पदार्थ की अल्पता है, किन्तु

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Jain Samaj मानवता की सेवा के लिए तत्पर: गणि राजेन्द्र विजय

Jain Samaj केे धर्मयोग मानव सेवा यज्ञ में निर्धन एवं असहाय लोगों को वस्त्र एवं भोजन सामग्री वितरित नई दिल्ली।

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