बहुत कुछ कहती है अमेजॉन पर ब‍िक रही ये ऐश ट्रे

शाद लखनवी का एक शेर है – बुझ गई आतिश-ए-गुल देख तू ऐ दीदा-ए-तर क्या सुलगता है जो पहलू में

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TV पर TRP की तरह अखबारों, वेब मीडिया और सोशल मीडिया प्‍लेटफार्म पर भी होता है बड़ा घपला

मीडिया से बाहर की दुनिया के बहुत कम लोग इस कड़वी सच्‍चाई से परिचित होंगे कि फेक TRP दिखाने के

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पत्रकारिता और पत्रकारों को समर्पित है यह आर्टिकल क्‍योंकि…

अधिकांशत: पत्रकारों का एक बड़ा वर्ग इस बात से क्षुब्‍ध रहता है कि सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के अधीन कार्यरत

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पत्रकारिता दिवस पर विशेष: गाली बन चुके गलीज़ धंधे का सच!

आज हिंदी पत्रकारिता दिवस है। इस वर्ष के पत्रकारिता दिवस का महत्‍व इसलिए और बढ़ जाता है क्‍योंकि इन दिनों

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