‘वंदे भारत मिशन’ के तहत स्वदेश लौट रहे हैं सैयद अकबरुद्दीन

नई दिल्‍ली। संयुक्त राष्ट्र में भारत के अस्थायी प्रतिनिधि रहे सैयद अकबरुद्दीन ‘वंदे भारत मिशन’ के तहत स्वदेश लौट रहे हैं। उल्लेखनीय है कि लॉकडाउन लगे होने के कारण अंतर्राष्ट्रीय उड़ानों पर रोक है और इसलिए 30 अप्रैल को कार्यकाल समाप्ति के बाद भी वह स्वदेश नहीं लौट पाए थे, लेकिन अपनों की स्वदेश वापसी के लिए चलाए जा रहे स्पेशल मिशन के तहत अकबरुद्दीन भी भारत लौट रहे हैं।
अकबरुद्दीन संयुक्त राष्ट्र में भारत का पक्ष मजबूती से रखने के लिए खासे चर्चा में रहे हैं। संसद हमले के दोषी मसूद अजहर को ग्लोबल टेररिस्ट घोषित करवाने में अकबरुद्दीन की भूमिका बेहद अहम मानी जाती है।
अकबरुद्दीन ने भारत वापसी को लेकर ट्वीट किया, ‘घर वह है जहां आपका दिल रहता है। न्यूयॉर्क और संयुक्त राष्ट्र को विदाई। आज घर जा रहा हूं, उन सभी के प्रति आभार जो मां भारती की गोद में हमारी वापसी सुनिश्चित कर रहे हैं।’ उन्होंने तिरंगे के साथ दौड़ रहे बच्चों के साथ अपनी तस्वीर शेयर की है और वंदे भारत मिशन हैशटैग का इस्तेमाल किया है।
…और नमस्ते बोल UN से विदा अकबरुद्दीन
अकबरुद्दीन ने 30 अप्रैल को अपनी विदाई के दौरान संयुक्त राष्ट्र चीफ एंतेनियो गुतारेस से वीडियो लिंक के जरिये बात की। उन्‍होंने कहा, ‘जाने से पहले मेरी एक गुजारिश है। भारतीय परंपरा में जब हम मिलते हैं या विदा लेते हैं तो ‘हलो’ नहीं कहते, ना ही हाथ मिलाते हैं। बल्कि हम नमस्‍ते करते हैं इसलिए मैं कार्यकाल समाप्त करने से पहले आपको नमस्‍ते करना चाहता हूं। अगर आप भी ऐसा कर सकें तो मैं अपने एक साथी से फोटो लेने को कहूंगा।’ अकबरुद्दीन के बाद UN में भारत का प्रतिनिधित्‍व वरिष्‍ठ डिप्‍लोमेट टी एस तिरुमूर्ति करेंगे।
चीन और पाक की जब की थी ‘धुलाई’
यह मामला जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाए जाने से संबंधित है। पाकिस्तान और चीन संयुक्त राष्ट्र में इस मसले को उठाने वाले थे और इस पर क्लोज डोर मीटिंग होनी थी। लेकिन अकबरुद्दीन का राजनयिक अनुभव था जिसके कारण इस बैठक से पहले ही सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्य रूस ने जम्मू-कश्मीर को भारत-पाक का द्विपक्षीय मसला बता दिया था। इतना ही नहीं, चीन और पाकिस्तान की तमाम कोशिशों के बाद भी संयुक्त राष्ट्र ने बैठक पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया।
पश्चिम एशिया मामलों के एक्सपर्ट हैं अकबरुद्दीन
वर्ष 1985 में भारतीय विदेश सेवा जॉइन करने वाले सैयद अकबरुद्दीन के पिता एस बदरुद्दीन भी राजनयिक थे। उन्हें कतर का राजदूत बनाया गया था।अकबरुद्दीन पश्चिम एशिया के विशेषज्ञ माने जाते हैं। उन्‍होंने विदेश मंत्रालय में अब तक कई महत्‍वपूर्ण जिम्मेदारियों का निर्वहन किया है। अकबरुद्दीन ने 2012-2016 तक भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्‍ता की जिम्मेदारी भी निभाई है। इसके बाद उन्हें संयुक्त राष्ट्र भेज दिया गया था जहां 4 साल उन्होंने भारत का हर मसले पर बहुत बेबाकी और मजबूती से पक्ष रखा। उनकी लोकप्रियता की बात करें तो चुके हैं। वह सोशल मीडिया पर बेहद एक्टिव रहते हैं और भारतीय विदेश नीति को आगे बढ़ाते हैं। ट्विटर पर उनके 2.3 लाख फॉलोवर्स हैं।
-एजेंसियां

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