संस्कृति विवि पहुंची Ishwariya विवि की स्वर्णिम भारत यात्रा

मथुरा। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी Ishwariya विवि की स्वर्णिम भारत यात्रा आज संस्कृति विश्वविद्यालय पहुंची। यात्रा में शामिल शिक्षिकाओं ने छात्र-छात्राओं को इस अखिल भारतीय यात्रा का मंतव्य समझाया। उन्‍‍‍‍‍‍‍‍होंने कहा कि सकारात्मक सोच से हम स्वयं की समस्याओं को दूर कर वातावरण बदल सकते हैं। हम मुस्कुराने की आदत डालें, मुस्कुराते रहने से हमारी आधी से ज्यादा समस्याओं का समाधान हो जाता है।

ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विवि की शिक्षिका शिवानी ने विद्यार्थियों को बताया कि भूलने की समस्या पढ़ाई को प्रभावित करती है। हमारे मस्तिष्क में सवसे ज्यादा नकारात्मक और व्यर्थ के विचार चलते रहते हैं। ये हमारा ध्यान भटकाते हैं। यदि हम सकारात्मक सोचना शुरू कर दें हमारा ध्यान विषय की ओर केंद्रित होने लगेगा। उन्होंने कहा कि हमारी सोच बहुत महत्वपूर्ण है। हमारे मन में चार प्रकार के विचार चलते रहते हैं, सकारात्मक, नकारत्मक, साधारण और व्यर्थ विचार। ऋणात्मक और व्यर्थ विचार 90 प्रतिशत होते हैं और 10 प्रतिशत सकारात्मक व साधारण विचार होते हैं। हमें अपने सकारात्मक विचारों की ताकत बढ़ानी चाहिए। इसके लिए हम लोगों के अच्छे गुणों को भी याद करना शुरू कर दें, मात्र इतना करने से हम देखेंगे कि उनमें परिवर्तन आ रहा है। हम जैसा देते हैं, वैसा ही हमें मिल रहा है। हमें यह ध्यान रखना होगा कि, मेरा विचार जीवन का आधार। उन्होंने ध्यान के महत्व को बताते हुए विद्यार्थियों को तीन मिनट का ध्यान कराया।

स्वर्णिम भारत यात्रा में शामिल आगरा के पूर्व मण्डलायुक्त सीताराम मीणा अनेक उदाहरण देते हुए बताया कि व्रह्माकुमारी आश्रम से मुझे ऐसा ज्ञान मिला जिससे मैंने अपने कार्यकाल के दौरान बड़ी-बड़ी समस्याओं को आसानी से हल कर लिया। प्रतिदिन सुबह ब्रह्माकुमारी आश्रम में ज्ञान मुरली कहलाए जाने वाले प्रवचन मन के सारे मैल को धोकर प्रफुल्लित कर देते हैं। मैं ईश्वरीय विवि से पिछले 19 साल से ध्यान की शिक्षा ले रहा हूं। मुझे लगता है कि हर विद्यार्थी को राजयोग सीखना चाहिए।

कार्यक्रम के अंत में स्वर्णिम भारत यात्रा के साथ आए विभोर भाई ने छात्र-छात्राओं से अच्छी सोच के साथ जीने का संकल्प लिया और स्वच्छता के महत्व को बताने वाले दो नारे भी लगवाए। इस मौके पर विवि के कुलपति डाॅ. राणा सिंह भी मौजूद रहे।

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