ठंड के दिनों में बॉडी हीट बढ़ा देता है सूर्यभेदी प्राणायाम

इस वक्त का मौसम पूरी तरह से बदल रहा है। सुबह और रात के वक्त तापमान गिर जाता है अच्छी खासी ठंड रहती है और दिन के वक्त तापमान अधिक रहने की वजह से गर्मी महसूस होती है। ऐसे मौसम में खुद को बीमार पड़ने से बचाने का बेस्ट तरीका है योग।
सूर्यभेदी प्राणायाम को राइट नॉस्ट्रिल ब्रीदिंग यानी दाईं नासिका छिद्र से श्वास लेना भी कहते हैं और यह योग की सबसे फायेदमंद टेक्नीक्स में से एक है। ठंड के दिनों के लिए यह एक अद्भुत प्राणायाम है, जो हमारे शरीर में ऊर्जा और गर्मी यानी बॉडी हीट बढ़ा देता है जिससे मौसम की सर्दी का असर हमारे शरीर पर कम पड़ने लगता है।
इतना ही नहीं, अभी का मौसम जैसा हो रखा है यानी कभी सर्दी, कभी गर्मी, इस तरह के बदलते मौसम में शरीर के प्राकृतिक तापमान में गड़बड़ी होने लगती है। ऐसे में सूर्यभेदी प्राणायाम शरीर के तापमान को संतुलित रखने में मदद करता है।
शरीर और दिमाग को रिलैक्स करने में मददगार
यह प्राणायाम हमारे शरीर के सातों चक्रों का शोधन करने में हमारी मदद करता है और कुण्डलिनी शक्ति जगाने में सहायक होता है। प्राणायाम की इस टेक्नीक का मुख्य मकसद शरीर और दिमाग को रिलैक्स करना है, लिहाजा योग की इस प्रक्रिया के दौरान खुद को बहुत ज्यादा थकाने की जरूरत नहीं है। एक बार जब आप इस प्राणायाम को शुरू कर दें उसके बाद आपको अपने शरीर को पूरी तरह से शांत और स्थिर रखना है।
सूर्यभेदी प्राणायाम के फायदे
– अस्थमा, वात रोग व कफ से जुड़ी बीमारियों को दूर करता है
– खून को साफ करता है और खून से जुड़ी बीमारियां भी दूर होती हैं
– झुर्रियां हटती हैं, किसी भी तरह की स्किन प्रॉब्लम दूर होती है और त्वचा की रंगत भी निखरती है
– पेट के कीड़े नष्ट होते हैं
– पाचन तंत्र बेहतर होता है और पेट से जुड़ी बीमारियां ठीक होती हैं
– लो ब्लड प्रेशर की समस्या दूर होती है
– डिप्रेशन और ऐंग्जाइटी को दूर करने में सहयोग करता है
कैसे करें सूर्यभेदी प्राणायाम
सूर्यभेदी प्राणायाम करने के लिए सबसे पहले सीधे बैठकर आंखें बंद कर लें। सीधे हाथ की प्राणायाम मुद्रा बनाएं। प्राणायाम मुद्रा के लिए तर्जनी और मध्यमा अंगुलियों को माथे पर रख लें और बाएं नाक की छेद को बाकि दो अंगुलियों से बंद कर, दाएं नाक की छेद से सांस को धीरे-धीरे बाहर निकाल दें। फिर दाएं नाक से आवाज़ करते हुए लंबी सांस भीतर लें, और उसके बाद थोड़ी देर के लिए सांस अंदर रोक लें। फिर बिना आवाज किए बाईं नाक से सांस बाहर निकाल दें। यह एक चक्र सूर्यभेदी प्राणायाम कहलाता है। इस प्रकार 15-20 बार इसका अभ्यास करें। अंत में बाईं नाक से सांस बाहर निकालकर हाथ नीचे लाएं व थोड़ी देर के लिए शांत भाव से बैठे रहे। वैसे तो यह प्राणायाम तीनों बन्धों के साथ किया जाता है, लेकिन प्रारम्भ में बिना लंबी सांस रोके ही इसका अभ्यास करें।
जरूर बरतें ये सावधानी
अगर आप हाई ब्लड प्रेशर के मरीज हैं, अगर आपको हृदय रोग है, मिर्गी के दौरे आते हैं या फिर अगर आप पित्त प्रवृत्ति वाले व्यक्ति हैं तो इस सूर्यभेदी प्राणायाम का अभ्यास न करें। साथ ही साथ गर्मी के दिनों में भी इस प्राणायाम का अभ्यास नहीं करना चाहिए क्योंकि इसको करने से शरीर का तापमान यानी बॉडी हीट बढ़ती है।
-एजेंसियां

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