INS विराट को ‘कबाड़’ बनाने की प्रक्रिया पर सुप्रीम कोर्ट की रोक

नई दिल्‍ली। कभी देश का गौरव रहे नौसेना के रिटायर हो चुके पोत INS विराट को ‘कबाड़’ बनाने की प्रक्रिया रुक गई है। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को ‘विराट’ की यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया। इस विमान वाहक पोत ने भारतीय नौसेना में करीब तीन दशक तक सेवा दी है और इसे अब सेवा से बाहर कर दिया गया है। गुजरात के अलंग में इसे रिसाइकल करने का काम चल रहा है लेकिन एक याचिका के बाद अब फिलहाल इस पर रोक लग गई है।
नौसेना से कब रिटायर हुआ INS विराट?
भारतीय नौसेना ने तीन साल पहले इस युद्धपोत को सेवानिवृत्त कर दिया था। सेंटॉर-श्रेणी के इस विमानवाहक पोत ने करीब 30 साल तक भारतीय नौसेना में अपनी सेवाएं दीं। इसके नाम सबसे अधिक सेवा देने वाले युद्धपोत का गिनीज बुक में रिकॉर्ड है।
INS विराट नौसेना को कब मिला और कहां-कहां तैनात रहा?
आईएनएस विराट को 1959 में ब्रिटिश नौसेना में शामिल किया गया था। तब इसका नाम एचएमएस हर्मिस था। 1984 में इसे सेवानिवृत्त कर दिया गया। बाद में इसे भारत को बेचा गया। भारतीय नौसेना में इसे 12 मई, 1987 में शामिल किया गया। आईएनएस विराट कई महत्वपूर्ण अभियानों में शामिल रहा। इनमें ‘ऑपरेशन ज्यूपिटर’ और 1989 में श्रीलंका में शांति बरकरार रखने का अभियान शामिल है। इसके अलावा 2001 में भारतीय संसद पर हमले के बाद यह ‘ऑपरेशन पराक्रम’ में भी शामिल रहा। अधिकारियों ने बताया कि इस जहाज को 2012 में सेवानिवृत्त किया जाना था, लेकिन आईएनएस विक्रमादित्य के आने में देरी की वजह से इसे टालना पड़ा।
INS विराट ने कितना सफर किया है?
इस ऐतिहासिक युद्धपोत ने 11 लाख किलोमीटर की यात्रा की है। यह पृथ्वी के 27 चक्कर लगाने के बराबर है।
हर साल दुनिया में कितने पोत किए जाते हैं रिसाइकल?
हर साल वैश्विक स्तर पर करीब 30 प्रतिशत या 280 जहाजों को रिसाइकिल किया जाता है। गुजरात का अलंग इसका बड़ा केंद्र है। यह ओडिशा, उत्तर प्रदेश, झारखंड, बिहार, गुजरात और अन्य राज्यों के करीब 30,000 लोगों को रोजगार उपलब्ध कराता है।
आखिर याचिका देने वाले क्या चाहते हैं?
नौसेना की शान रहे इस पोत को तोड़ा जाना है, लेकिन एक कंपनी ने इसपर रोक लगाने के लिए याचिका दायर की। चीफ जस्टिस एस ए बोबडे की अध्यक्षता वाली पीठ ने कंपनी की याचिका पर केंद्र सरकार और अन्य को नोटिस जारी कर उनका जवाब मांगा है। कंपनी इसे संग्रहालय बनाना चाहती है।
केंद्र सरकार ने 2019 में विराट को कबाड़ में देने का फैसला किया था
सेंटूर वर्ग का विमान वाहक पोत आईएनएस विराट 29 साल तक भारतीय नौसेना में रहा और मार्च 2017 में इसे सेवा से हटा दिया गया। केंद्र ने जुलाई 2019 को संसद को सूचित किया था कि भारतीय नौसेना के साथ सलाह मशविरा के बाद ‘विराट’ को कबाड़ में देने का फैसला किया गया।
-एजेंसियां

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