सुप्रीम कोर्ट ने कहा, ने IT एक्‍ट की धारा 66 ए में गिरफ्तारी का आदेश देने वाले अधिकारी जेल जाएंगे

नई दिल्‍ली। उच्चतम न्यायालय ने IT अधिनियम की धारा 66 ए के तहत की गई गिरफ्तारी को रोकने के लिए उचित कदम नहीं उठाने पर आज केंद्र सरकार को फटकार लगाई।
जस्टिस आरएफ नरीमन की पीठ ने गिरफ्तारी का दावा करने वाली जनहित याचिका पर अपना जवाब दाखिल करने के लिए केंद्र को चार हफ्तों का समय दिया है। इस मामले में मानवाधिकारों के लिए काम करने वाली संस्था पीपुल्स यूनियस फॉर सिविल लिबर्टीज (पीयूसीएल) ने जनहित याचिका दायर की है। जस्टिस आरएफ नरीमन की बेंच ने इस पर जवाब दाखिल करने के लिए केंद्र सरकार को चार हफ्ते का समय दिया है।
पीयूसीएल ने अपनी याचिका में कहा है कि IT कानून की धारा 66ए को खत्म किए जाने के बाद भी इस मामले में 22 से ज्यादा लोगों के खिलाफ केस दायर किए गए हैं।
जस्टिस नरीमन ने कहा, ‘यदि इन्होंने जो आरोप लगाए हैं वह सही हैं तो आप लोगों को कड़ी से कड़ी कार्यवाही का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने उन लोगों की सूची दी है जिन पर मुकद्दमा चलाया गया है। हम उन सभी लोगों को जेल में भेज देंगे, जिन्होंने गिरफ्तारी का आदेश दिया था। हम सख्त कदम उठाने वाले हैं।’
उच्चतम न्यायालय ने कहा कि अगर IT कानून की धारा 66ए को समाप्त करने के उसके आदेश का उल्लंघन किया गया तो संबंधित अधिकारियों को गिरफ्तार किया जाएगा। पीयूसीएल ने न्यायालय में दायर की गई याचिका में कहा है कि शीर्ष अदालत द्वारा IT कानून की धारा 66ए को समाप्त करने के बाद 22 से अधिक लोगों के खिलाफ मुकदमे दायर किए गए हैं।
-एजेंसियां

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