जांच प्रमुख बोबडे से जजों की मुलाकात पर आई Media Report को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज़ किया

नई दिल्‍ली। आज रविवार को अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्‍सप्रेस उस Media Report को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया जिसमें न्यायमूर्ति आर एफ नरीमन, न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ के न्यायमूर्ति एस ए बोबडे से मिलने का दावा किया गया था। न्यायमूर्ति एस ए बोबडे प्रधान न्यायाधीश के खिलाफ लगे आरोपों पर बने इन-हाउस जांच पैनल के प्रमुख हैं।

उच्चतम न्यायालय ने एक बयान में कहा कि यह खबर पूरी तरह गलत है कि दो न्यायमूर्तियों ने शुक्रवार शाम न्यायमूर्ति बोबडे से मुलाकात की।

पूरी खबर के लिए  Indian Express News Link देखें –

https://indianexpress.com/article/india/cji-gogoi-sexual-harassment-allegations-supreme-court-chandrachud-womans-absence-5710760/?pfrom=HP

सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया है कि चीफ जस्टिस के खिलाफ लगाए गए सेक्शुअल हैरसमेंट की शिकायत की जांच के लिए बनाए गए 3 जजों के पैनल से जस्टिस डी. वाई. चंद्रचूड़ और जस्टिस रोहिंटन नरीमन नहीं मिले। एक अंग्रेजी अखबार ने खबर में दावा किया था कि दोनों जजों ने 3 जजों की जांच पैनल से मुलाकात कर कहा था कि महिला के आरोपों की जांच कर रही कमिटी एक्स पार्टी (महिला के पक्ष के बिना) जांच को आगे न बढ़ाएं। सुप्रीम कोर्ट के सेक्रटरी जनरल के हवाले से बयान जारी कर कहा गया है कि अखबार की पूरी खबर गलत है।

सुप्रीम कोर्ट ने अपने आधिकारिक बयान में कहा है कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि एक प्रमुख अखबार ने लिखा है कि जस्टिस चंद्रचूड़ और जस्टिस नरीमन ने पैनल से मुलाकात की। यह पूरी तरह से गलत है और इन हाउस कमिटी चीफ जस्टिस के मामले को बिना किसी जज के इनपुट के खुद मामले को देख रहे हैं।

शीर्ष अदालत ने कहा कि इन-हाउस पैनल उच्चतम न्यायालय के किसी भी अन्य न्यायाधीश से किसी तरह की जानकारी लिए बिना अपने आप विचार-विमर्श करता है।

गौरतलब है कि आज रविवार को एक अखबार में यह खबर प्रकाशित हुई है कि न्यायमूर्ति नरीमन और न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने न्यायमूर्ति बोबडे से मुलाकात की और अपना विचार जाहिर किया कि तीन सदस्यीय समिति को एकतरफा कार्यवाही जारी नहीं रखनी चाहिए।

उच्चतम न्यायालय की एक पूर्व महिला कर्मचारी ने प्रधान न्यायाधीश के खिलाफ यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया है। आरोप लगाने वाली महिला ने जांच समिति के समक्ष पेश होने से इनकार कर दिया है और कार्रवाई के दौरान वकील मौजूद रहने की मंजूरी नहीं मिलने समेत कई मुद्दों पर आपत्ति जताई है।

अखबार ने अपनी खबर में कहा है कि न्यायमूर्ति नरीमन और न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने इन-हाउस कमेटी की सहायता के लिए एक वकील न्यायमित्र नियुक्त किए जाने की सलाह दी है।

न्यायमूर्ति बोबडे के अलावा इस समिति में उच्चतम न्यायालय की दो महिला न्यायाधीश न्यायमूर्ति इंदु मल्होत्रा और न्यायमूर्ति इंदिरा बनर्जी शामिल हैं।
-एजेंसी

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