नेपाल में सरकार भंग कर मध्यावधि चुनाव कराने का मामला पहुंचा सुप्रीम कोर्ट, PM ओली के खिलाफ पार्टी ने शुरू की अनुशासनात्मक कार्यवाही

काठमांडू। नेपाल में सरकार भंग कर मध्यावधि चुनाव की घोषणा के बाद राजनीतिक अस्थिरता का दौर शुरू हो गया है। निर्णय के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में तीन याचिका दायर की गई हैं।
प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के खिलाफ पार्टी ने अनुशासनात्मक कार्यवाही शुरू की है। पार्टी में बगावत के सुर तेज हो गए हैं। ओली विरोधियों ने सड़कों पर प्रदर्शन भी किया।
नेपाल में रविवार को तेजी से घटनाक्रम बदला था। प्रधानमंत्री ओली मंत्रिमंडल ने सरकार भंग करने की सिफारिश की। राष्ट्रपति ने इसको मंजूर करते हुए अप्रैल-मई में चुनाव कराने की घोषणा कर दी।
सरकार भंग करने के निर्णय के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में तीन याचिका दायर की गई हैं। याचिकाकर्ताओं ने इस निर्णय को संविधान की हत्या बताया है। सुप्रीम कोर्ट के प्रवक्ता भडारकली पोखरेल ने याचिकाओं की पुष्टि की है।
एक याचिकाकर्ता अधिवक्ता दिनेश त्रिपाठी ने बताया संविधान में प्रधानमंत्री को सरकार भंग करने का कोई विशेषाधिकार नहीं है।
कानून विशेषज्ञों का मानना है कि याचिका पंजीकृत होने के बाद निर्णय आने में दो सप्ताह का समय लग सकता है।
स्पीकर से सदन बुलाने की मांग
बड़ी संख्या में सासंद निर्णय के खिलाफ हैं। इन सांसदों ने हस्ताक्षर अभियान शुरू कर दिया है। सांसद अब स्पीकर से तत्काल सदन बुलाने की मांग कर रहे हैं। सांसद चाहते हैं कि ओली के खिलाफ सदन में अविश्वास प्रस्ताव लाया जाए।
ओली के खिलाफ अनुशासनहीनता की कार्यवाही
प्रधानमंत्री के पी शर्मा ओली के खिलाफ उनकी ही नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी की स्टैंडिंग कमेटी ने अनुशासनहीनता की कार्यवाही की है। ओली ने इस निर्णय को नकार दिया है। कहा है कि उनके खिलाफ कार्यवाही का अधिकार कमेटी को नहीं है।
पार्टी एक जुट, ओली के निर्णय से फर्क नहीं: प्रचंड
सत्तारूढ़ नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (एनसीपी) दूसरे नंबर के नेता पुष्प कमल दहल प्रचंड ने कहा है कि एक व्यक्ति के निर्णय से पार्टी, देश और जनता पर कोई फर्क नहीं पड़ने वाला। एनसीपी एक जुट है।
विरोधियों ने किया प्रदर्शन, पुतले फूंके
सरकार भंग करने के खिलाफ ओली विरोधी नेताओं और उनके समर्थकों ने कई स्थानों पर प्रदर्शन किए। ओली के पुतले भी फूंके।
-एजेंसियां

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