राजनीतिक funding मामले में केंद्र, चुनाव आयोग को सुप्रीम कोर्ट का नोटिस

नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने राजनीतिक funding से संबंधित कानून में हालिया संशोधन को चुनौती देने वाली एक याचिका पर आज केंद्र सरकार और निर्वाचन आयोग से जवाब तलब किया।

मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर और न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ की पीठ ने आयोग और केंद्र को नोटिस जारी करके पूछा है कि क्यों न राजनीतिक चंदे से संबंधित कुछ नियमों को रद्द कर दिया जाये? न्यायालय ने एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) की जनहित याचिका पर नोटिस जारी किये हैं।
प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर और न्यायमूर्ति धनन्जय वाई चन्द्रचूड़ की तीन सदस्यीय खंडपीठ ने गैर सरकारी संगठन एसोसिएशन फार डेमोक्रेटिक रिफार्म्स की जनहित याचिका पर नोटिस जारी किये।

गैर सरकारी संगठन की ओर से वकील प्रशांत भूषण ने दलील दी कि इस संशोधन ने किसी भी राजनीतिक दल को अपने कुल औसत लाभ का साढे सात प्रतिशत से अधिक चंदा देने पर लगी पाबंदी हटा दी है।

उन्होंने यह भी कहा कि राजनीतिक दल अब स्रोत की जानकारी का खुलासा किये बगैर ही चुनाव बाण्ड की शक्ल में चंदा ले सकते हैं।

लोकसभा ने वित्त विधेयक 2017 में संशोधनों के अनुरुप राजनीतिक दलों को कार्पोरेट घरानों से मिलने वाले चंदे में ढील देने के सरकार के प्रस्ताव को इस साल मार्च में मंजूरी दे दी थी।

एडीआर ने अपनी याचिका में राजनीतिक चंदे से संबंधित उन नियमों को रद्द करने की मांग की है, जिनमें चुनावी बांड के जरिये पार्टियों को बिना नाम का खुलासा किये कितना भी चंदा दिया जा सकता है।

याचिकाकर्ता ने विदेशी कंपनी की किसी भी सहायक कंपनी से funding लेने के नियम को भी रद्द करने का अनुरोध किया है।

 

-एजेंसी