बीटी बैंगन की खेती पर कड़ी कार्यवाही, नष्‍ट की खड़ी फसल

हिसार। हरियाणा के फतेहाबाद जिला अंतर्गत रतिया के निकटवर्ती गांव नथवान के किसान जीवन सिंह द्वारा बीटी बैंगन की खेती करने के मामले में कार्यवाही करते हुए हॉर्टिकल्चर डिपार्टमेंट और जिला प्रशासन के अधिकारियों ने खेत में खड़ी फसल को उखड़वाकर नष्ट कर दिया।
हालांकि, इस बैंगन के खतरनाक असर से अंजान किसान इससे पहले काफी बैंगन को मार्केट में सप्लाई कर चुका था।
खतरनाक बीटी के प्रकोप को फैलने से रोकने के लिए उखाड़ी गई फसल को 15 फीट गहरे गड्ढे में दबा दिया गया है। चार कनाल में करीब 18 क्विंटल फसल हुई है। देश में बीटी बैंगन की खेती का यह पहला मामला पकड़ में आया है।
बता दें कि बीटी बैंगन दिखने में तो साधारण बैंगन जैसा ही होता है, लेकिन फर्क इसकी बुनियादी बनावट में है। इस बैंगन और इसके पौधे की हर कोशिका में एक खास तरह का जहर पैदा करने वाला जीन होता है। इसे बीटी यानी बैसिलस थुरियनजीनिसस नामक एक बैक्टीरिया से निकालकर बैंगन की कोशिका में डाला गया है।
दो महीने पहले शिकायत पर अब कार्यवाही
रोहतक में कुदरती खेती अभियान से जुड़े एमडीयू के रिटायर्ड प्रोफेसर राजेंद्र चौधरी ने इस संबंध में दो महीने पहले कृषि विभाग और बागवानी विभाग के डायरेक्टर से शिकायत की थी। शिकायत के बाद बीटी बैंगन का सैंपल लेने के लिए रतिया में चंडीगढ़ से बागवानी विभाग की टीम आई थी। इस टीम ने बैंगन के सैंपल लेकर जांच के लिए मुख्यालय पंचकुला भेजे थे। जांच रिपोर्ट में बीटी बैंगन की पुष्टि होने के बाद शुक्रवार को फतेहाबाद के जिला उपायुक्त धीरेन्द्र खड़गटा द्वारा बनाए गए नोडल अधिकारी नायब तहसीलदार गोपीचंद की देखरेख में बीटी बैंगन की फसल उखाड़ दी गई। इस दौरान कृषि विभाग के एसडीओ भीम सिंह और पटवारी मदन मौजूद रहे।
6 महीने पहले की थी खेती
गांव नथवान के किसान जीवन सिंह ने 6 महीने पहले बैंगन की खेती की थी। उसने प्रशासन के अधिकारियों को बताया कि वह बैंगन की पौध डबवाली से लेकर आया था। जीवन सिंह ने कहा कि उसे जानकारी नहीं थी कि जो पौध खरीदकर लाया हैं, वह बीटी बैंगन के हैं। पिछले दो महीनों से वह रतिया के अलावा फतेहाबाद की मंडी में भी इन बैंगनों को बेच चुका है।
आदेश पर कार्यवाही हुई: अधिकारी
नोडल अधिकारी एवं नायब तहसीलदार गोपीचंद ने कहा कि चंडीगढ़ से आई टीम ने बैंगन की फसल के सैंपल लिए थे। अब सैंपल रिपोर्ट में सामने आया कि नथवान के जिस किसान ने बैंगन लगाए थे वो बीटी बैंगन हैं। ऐसे में हमने किसान की फसल को उखाड़वाते हुए नष्ट करवा दी। बीटी बैंगन की फसल को उखाड़कर करीब 15 फीट गहरे गड्ढे में दबाया गया है।
खतरनाक है बीटी बैंगन पकाना: कृषि विशेषज्ञ
हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय हिसार के कृषि विशेषज्ञ एसके सेठी ने बताया किसी भी संशोधित किस्म के उत्पादन के लिए पहले भारत सरकार की कमेटी और फिर राज्य सरकार की मंजूरी लेनी होती है। बीटी बैंगन को यह मंजूरी नहीं दी गई है। बीटी बैंगन की सब्जी खाने से कैंसर, किडनी फेल होने की आशंका है। वहीं पौधों को इसलिए दबाया गया है ताकि किसी तरह का वायरस हो तो वह नुकसान न पहुंचाए। किसान की बेची गई बीटी बैंगन की सब्जी को खाने से नुकसान हो सकता है, इसलिए लोग सजगता बरतें।
बीज बेचने वालों को पकड़ें
पूरे मामले का खुलासा करने वाले कुदरती खेती अभियान के संयोजक और महर्षि दयानंद यूनिवर्सिटी के पूर्व प्रोफेसर राजेंद्र चौधरी ने कहा कि यह प्रदेश सरकार की जिम्मेदारी है कि वह बीटी बैंगन के अवैध बीज को बाजार में लाने वालों पर कार्यवाही करे। उन्होंने कहा कि ऐसे खतरनाक बीज विकसित करने वालों की पहचान की जाए। साथ ही बाजार में फैलाव पर रोक लगाने साथ ही किसानों की नष्ट फसल पर मुआवजा भी दिया जाए। उन्होंने कहा कि किसान को ये नहीं पता कि जो फसल उसने उगाई है, वह अवैध है या वैध इसलिए उसे मुआवजे का पूरा हक है। उन्होंने सरकार की अब तक की कार्यवाही को लीपापोती करार दिया।
-एजेंसियां

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