श‍िक्षा के ल‍िए कृृष्‍ण भी संदीपन मुनि आश्रम गए थे: डाॅ. विष्णु सक्सेना

मथुरा। गोवर्धन रोड स्थित ज्ञानदीप श‍िक्षा भारती में श‍िक्षक दिवस की पूर्व बेला पर आयोजित कार्यक्रम में अन्तर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त गीतकार डा. विष्णु सक्सेना ने कहा कि श‍िक्षक वेतनभोगी अध्यापक नहीं, श‍िक्षक वे हैं जो विद्यार्थियों में ज्ञान और संस्कार प्रदान कर आदर्श परिवार, आदर्श समाज और आदर्श राष्ट्र का निर्माण करते हैं।

डा. विष्णु सक्सेना ने कहा कि श्रीकृष्ण ब्रह्मांड नायक थे किन्तु श‍िक्षा प्राप्त करने के लिए संदीपन मुनि के आश्रम में गए थे।
उन्होंने इस अवसर पर विद्यार्थियों से कहा कि वे अपने गुरूओं और साथ ही माता-पिता का आदर करते रहें। इसी सन्दर्भ में उन्होंने सरस कण्ठ से काव्य धारा प्रवाहित की।

एक दिन मैंने मन्दिर में पूछा प्रभु, आपसे भी बड़ा कौन कलि काल में,
बोले प्रभु-
माँ-बाप से है न कोई बड़ा,
सब चढ़ा दो वहाँ जो रखा थाल में।

डा. विष्णु सक्सैना ने श‍िक्षक-श‍िक्षिकाओं से भेंट कर कहा कि वे श‍िक्षण-कार्य के अतिरिक्त अपने विद्यार्थियों को वे आदर्श उपस्थित करें जिनकी छाप उनके जीवन पर्यन्त रहे।

कार्यक्रम के प्रारंभ में ज्ञानदीप के संस्थापक सचिव मोहन स्वरूप भाटिया ने डा0 विष्णु सक्सेना का स्वागत करते हुए कहा कि डा0 विष्णु सक्सेना मात्र काव्य-पाठ करने वाले कवि नहीं हैं, उनकी कविताओं में समाज के लिए सार्थक सन्देश रहता है।

कार्यक्रम के अन्त में प्रधानाचार्या रजनी नौटियाल ने धन्यवाद ज्ञापन किया। इस अवसर पर शैक्षिक निदेशक प्रीति भाटिया, सुनीता रोहरा, जितेन्द्र कुमार, श‍िवम राठी, संदीप कुलश्रेष्ठ, अंजु शर्मा, ऋतु रानी, पूजा वर्मा आदि उपस्थित रहे।

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