कश्‍मीर का मुद्दा उठाने पर मालदीव की संसद के स्‍पीकर ने पाक प्रतिनिधि को लगाई लताड़

माले। पाकिस्तान जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा खत्म किए जाने के भारत के आंतरिक मामले के अंतर्राष्ट्रीयकरण की हर मुमकिन कोशिश कर रहा है और हर बार उसे मुंह की खानी पड़ रही है। इस मुद्दे को लेकर अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग पड़ने और अनसुना किए जाने से उसकी बौखलाहट और हताशा भी बढ़ती ही जा रही है। हताशा का आलम यह है कि संसद के स्पीकरों के अंतर्राष्ट्रीय कार्यक्रम तक में वह कश्मीर मसला उठाने की नाकाम कोशिश कर रहा है। मालदीव में हो रहे चौथे साउथ एशियन स्पीकर्स समिट में पाकिस्तान के प्रतिनिधियों ने कश्मीर का मसला उठा दिया, जिस पर भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने आपत्ति उठाते हुए तीखा पलटवार किया। राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश ने पाकिस्तान को आईना दिखाते हुए जिस मुल्क ने बड़े पैमाने पर अपने ही लोगों का नरसंहार किया हो, उसे कश्मीर पर बोलने का नैतिक अधिकार ही नहीं है। उन्होंने पाकिस्तान को सीमापार आतंकवाद बंद करने की भी नसीहत दी।
पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल का ड्रामा जारी रहा तो कार्यक्रम का संचालन कर रहे मालदीव की संसद के स्पीकर मोहम्मद नशीद को दो टूक कहना पड़ा कि इस फोरम में किसी देश के आंतरिक मामले को नहीं उठाया जा सकता है।
दरअसल, मालदीव की संसद रविवार को सस्टेनेबल डिवेलपमेंट गोल पर चौथे साउथ एशियन स्पीकर्स समिट की मेजबानी कर रही थी। इसमें लोकसभा स्पीकर ओम बिरला और राज्यसभा उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे थे जबकि पाकिस्तान का प्रतिनिधित्व नेशनल असेंबली के डेप्युटी स्पीकर कासिम सूरी और पाकिस्तानी सेनेटर कुर्रतुल एन मारी कर रहीं थी।
अचानक पाकिस्तानी प्रतिनिधि कासिम सूरी ने कश्मीर का राग छेड़ दिया। उन्होंने कहा, ‘हम कश्मीर की जो स्थिति है, उसे नजरअंदाज नहीं कर सकते। वहां लोगों पर अत्याचार हो रहा है।’ इसका भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने जोरदार पलटवार किया। राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश ने कहा, ‘भारत के आंतरिक मामले को इस फोरम में उठाए जाने पर हम पुरजोर आपत्ति जाहिर करते हैं। इसके अलावा समिट के विषय से इतर मुद्दों को उठाकर इस फोरम के राजनीतिकरण को भी हम खारिज करते हैं।’
-एजेंसियां

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