कमलनाथ पर भारी पड़े दिग्‍गी, सोनिया ने सौंपी बड़ी जिम्‍मेदारी

भोपाल। एमपी में कुछ कथित सियासी गलतियों की वजह से कांग्रेस में कमलनाथ की स्थिति कमजोर हुई है। ‘कमजोर’ कमलनाथ पर अब फिर से दिग्विजय सिंह भारी पड़ने लगे हैं। केंद्र में फिर से उनका ओहदा बढ़ा है। अगामी विधानसभा चुनावों के लिए सोनिया गांधी ने दो राज्यों में दिग्विजय सिंह को बड़ी जिम्मेदारी दी है। इसके साथ ही एमपी के पॉलिटिक्स में भी दिग्विजय सिंह जबरदस्त तरीके से एक्टिव हो गए हैं।
दरअसल, देश के पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं। पुदुचेरी और तमिलनाडु चुनाव के लिए सोनिया गांधी ने दिग्विजय सिंह को स्क्रीनिंग कमेटी का अध्यक्ष बनाया है। स्क्रीनिंग कमेटी का अध्यक्ष राज्य में उम्मीदवारों का चयन करता है। इस हिसाब से यह बड़ी जिम्मेदारी मानी जा रही है। वो भी तब जब कमलनाथ की गिनती भी गांधी परिवार के खास लोगों में है।
गोडसे भक्त की एंट्री से घिरे कमलनाथ
सियासी जानकार मानते हैं कि कमलनाथ की कुछ सियासी गलतियां उनके ऊपर भारी पड़ रही है। सत्ता में वापसी के बाद वह एमपी में कांग्रेस की सरकार को संभाल नहीं पाए। उपचुनाव में भी वह पार्टी को जीत नहीं दिला पाए। ये सारी चीजें उनके फेवर में नहीं है। यहीं वजह है कि पार्टी के कुछ नेता परिवर्तन की मांग करते रहे हैं। हालिया में उन्होंने हिंदू महासभा के नेता को कांग्रेस की सदस्यता दिलवा दी।
इस घटना के बाद कांग्रेस के बड़े नेता खुलकर कमलनाथ के फैसले के खिलाफ आ गए। पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष अरुण यादव ने तो यहां तक कह दिया कि क्या हम साध्वी प्रज्ञा को भी अपनी पार्टी में स्वीकार कर लेंगे। साथ ही उन्होंने बड़े नेताओं की चुप्पी पर भी सवाल किया था। दिग्विजय सिंह खुल कर तो नहीं बोल पाए थे लेकिन इशारों-इशारों में अपने इरादे स्पष्ट कर दिए थे। उन्होंने कहा था कि बाबूलाल चौरसिया कौन है।
कमलनाथ के लोग बचाव में उतरे
वहीं, गोडसे भक्त की एंट्री से अपनी ही पार्टी में चौतरफा घिरे कमलनाथ खुद तो खामोश रहे, लेकिन उनके समर्थक खुलकर मैदान में उतर आए। सज्जन सिंह वर्मा जैसे कद्दावर नेताओं ने कहा कि गांधीवादी विचारधारा को अपनाने वाले लोगों को हम स्वीकार रहे हैं। इस मुद्दे पर एक बार फिर से कांग्रेस में गुटबाजी चरम पर दिखी है। राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि दोनों के समर्थक एक-दूसरे को पसंद नहीं करते हैं।
किसान महापंचायत करेंगे दिग्विजय सिंह
कहा जाता है कि एमपी कांग्रेस में दिग्विजय सिंह इकलौते ऐसे नेता हैं, जिनका पूरे प्रदेश में जनाधार है। यहीं वजह है कि पार्टी में पर्दे के पीछ रहकर भी वो उतना ही दबदबा रखते हैं, जितना लोग फ्रंट पर रहकर रखते हैं। एमपी कमलनाथ की सरकार के दौरान इसकी झलक लोगों ने देखी है। निकाय चुनाव से पहले अपनी पैंठ बढ़ाने के लिए दिग्विजय सिंह पूरे मध्यप्रदेश में किसान महापंचायत कर रहे हैं। 4 मार्च को रतलाम में पहली किसान महापंचायत है।
-एजेंसियां

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