बिजनेस के लिए सोशल मीडिया का स्वागत, लेकिन क़ानून का पालन करना होगा

नई दिल्‍ली। प्राइवेसी और सोशल मीडिया की नई गाइंडलाइंस को लेकर भारत सरकार और सोशल मीडिया कंपनियों ने बीच चल रहे टकराव पर इलेक्ट्रॉनिक और सूचना प्रौद्योगिक मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि सरकार सोशल मीडिया पर नागरिकों की प्राइवेसी (निजता) को लेकर प्रतिबद्ध है.
अंग्रेज़ी अख़बार द इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए उन्होंने कहा कि भारत में बिजनेस करने के लिए कंपनियों का स्वागत है लेकिन उन्हें “क़ानून और संविधान का पालन करना पड़ेगा.”
प्रसाद ने कहा, “क्या वो भारत के संविधान का पालन नहीं कर, अपने नियम बनाकर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का पालन कर रहे हैं?”
“क्या वो ये तय करेंगे कि कौन सी सामग्री दिखाई जाए और कौन सी नहीं, कौन सा अकाउंट बंद किया जाएगा और कौन सा नहीं?”
ट्विटर के दफ़्तर पर दिल्ली पुलिस की कार्यवाही लेकर उठे विवाद पर रविशंकर ने कहा, “दिल्ली पुलिस ने इस पर पहले ही सफ़ाई दे दी है. जांच में सहयोग करना सभी का कर्तव्य है. अगर आप एक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म हैं तो आपको भारत के क़ानून का पालन करना पड़ेगा.”
प्रसाद ने कहा कि लोकतांत्रिक मूल्यों को बनाए रखने के सरकार के ट्रैक रिकॉर्ड के बारे में इन कंपनियों को पता है. उन्होंने कहा, “लेकिन यदि आपके पास अन्य बड़े देशों की तुलना में भारत के लिए दोहरे मानदंड है तो यह स्पष्ट रूप से स्वीकार्य नहीं है. मुद्दा भारत की डिजिटल संप्रभुता का है.”
सरकार के नए नियमों के मुताबिक़ सभी सोशल मीडिया कंपनियों को एक चीफ कंप्लायंस ऑफ़िसर नियुक्त करने का आदेश दिया गया था. कई कंपनियां ये नहीं कर पाईं हैं.
रविशंकर ने इस पर कहा, “क्या भारत में एक अफ़सर नियुक्त करना जिसका नाम हर जगह मौजूद हो, इतना मुश्किल है?
क्या एक नोडल या कंप्लायंस अफ़सर के चयन के लिए यूपीएससी से सेलेक्शन करना होता है?”
नए नियमों के मुताबिक़ बदलाव करने के लिए कंपनियों को 3 महीने का वक्त दिया गया था.
रविशंकर के मुताबिक़ कंपनियों ने 6 महीने का समय और मांगा है. रविशंकर ने इसे बेबुनियाद बताया है. उन्होंने कहा, “इस अनुरोध का कोई आधार नहीं है. हम निष्पक्ष थे., हमने उन्हें 3 महीने का समय दिया. क्या यह उनके लिए काफी नहीं है?”
-एजेंसियां

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