स्मृत‍ि ईरानी ने पहना ज‍िस इकत का मास्क, जान‍िए उसके ताने बाने की कहानी

आज केंद्रीय कपड़ा मंत्री स्मृत‍ि ईरानी ने कोरोना वायरस को देखते हुए कॉटन के कपड़े का मास्क बांधकर दस्तकारों को प्रमोट करते हुए ट्व‍िटर पर संदेश द‍िया। इसमें वे इकत के मास्क को बांधे हुए द‍िखाई दे रही हैं। आप में से क‍ितने ऐसे लोग होंगे जो इकत के कपड़े तो पहनते होंगे परंतु इसके बोर में अध‍िक जानकारी न रखते होंगे। अब इकत स्टाइल स्टेटमेंट बन चुका है। तो सुन‍िए इस इकत की दस्तकारी को क‍ितनी मेहनत से हम तक पहुंचाया जाता है। तो आज आपको इकत की प्रक्र‍िया और हम तक इसके पहुंचने की दास्तां सुनाते हैं।

इकत की बुनाई
तेलिया रुमाल, ऐसी दोहरी इकत बुनाई है जिसकी शुरुआत आंध्र प्रदेश के चिराला में हुई थी. ‘इकत’ शब्द को मलय-इंडोनेशियाई शब्द ‘मांग-इकत’ से लिया गया है. इसका मतलब है बांधना या गांठ लगाना (जैसे कपड़े की बुनाई से पहले, धागे को बांधा और डाई किया जाता है). सामान्य तौर पर, तेलिया रुमाल बुनने की कला में गणित की अच्छी जानकारी होनी ज़रूरी है. इकत बुनाई में, गणित की इस जानकारी को एक बिल्कुल अलग लेवल पर ले जाया जाता है. यह हिसाब लगाने की बुनियादी तरकीबों से आगे और उससे परे है.

दुनिया में सिर्फ़ भारत, इंडोनेशिया, और जापान में ही दोहरी इकत बनाई जाती है.

डिज़ाइन
इकत बुनाई के डिज़ाइन की कल्पना बुनाई करने वाले के मन में बनती है. इसके बाद, एक ग्राफ़ पर उसका खाका खींचा जाता है. उत्पाद की बुनाई शुरू करने से पहले, धागे को सटीक ढंग से मज़बूती से कसने और डाई करने की कई चरणों वाली प्रक्रिया से बनाया जाता है. इकत बुनाई में, गणित की इस जानकारी को एक बिल्कुल अलग लेवल पर ले जाया जाता है. यह हिसाब लगाने की बुनियादी तरकीबों से आगे और उससे परे है.

यहां, इकत बुनाई के डिज़ाइन की कल्पना बुनाई करने वाले के मन में बनती है. इसके बाद, एक ग्राफ़ पर उसका खाका खींचा जाता है. आखिर में, उत्पाद की बुनाई शुरू करने से पहले धागे को मज़बूती से कसने और डाई करने की कई चरणों वाली प्रक्रिया से बनाया जाता है.

डिज़ाइन अपने असली रूप में दिखाई देना तब शुरू होता है, जब करघे पर धागों का ताना-बाना बनता है.
धागों को बांधना
कपड़ा बुननेवाले, आसानी से धागे की एक खास मोटाई का इस्तेमाल करके, खास सघनता वाले एक इंच कपड़े को बुनने में लगने वाले धागों की संख्या का हिसाब लगाते हैं. इस तरह से, वे एक खास लंबाई का ताना बुनने के लिए ज़रूरी धागे के वज़न का हिसाब लगाते हैं. इसके लिए अलग-अलग धागों के खास सेट, निर्माण, और मनचाहा उत्पाद तैयार करने को ध्यान में रखा जाता है. आखिर में तैयार किया गया धागा कुछ ऐसा दिखाई देता है

काम की शुरुआत, धागे को खींचकर और डिज़ाइन के मुताबिक ज़रूरी धागों के समूह बनाने से होती है.इसके बाद, इसे तय बिंदुओं पर बांधा जाता है. इनका हिसाब डिज़ाइन के पैटर्न और रंगों के क्रम से लगाया जाता है.रबर बाइंड कसकर बांधे जाते हैं, ताकि जिस रंग से धागे को डाई किया जाना है उसे इस हिस्से को सोखने से बचाया जा सके.

ताने (वार्प) को डाई करना
ताने के धागों को तय बिंदुओं पर बांधने के बाद रबर बाइंड कसकर बांध दिए जाते हैं, ताकि जिस रंग से धागे को डाई किया जाना है उसे इस हिस्से को सोखने से बचाया जा सके. इसके लिए तय बिंदु, डिज़ाइन के पैटर्न और रंग से तय किए जाते है. पूरी तरह डाई किया गया लेआउट हासिल करने के लिए, धागे को डाई करने, मज़बूती से कसने और फिर से डाई करने के कई चरणों की प्रक्रिया शामिल है.

रंगों का मनचाहा लेआउट हासिल करने के लिए, धागे को डाई करने, मज़बूती से कसने और फिर से डाई करने के कई चरणों से गुज़ारा जाता है. ताने के लिए, बेहतर तरीके से डाई किया हुआ धागा तैयार किया जाता है.

कपड़ा तैयार करना
इस शिल्प की महारत, डिज़ाइन की कल्पना करने और इसे अज्ञात रूप से अजीबोगरीब ताने-बाने में ढालने में है. जैसे ही ताना डाई करके करघे पर रखे जाने के लिए तैयार हो जाता है, वैसे ही बुनकर कपड़े के धागों को डिज़ाइन के मुताबिक कसता और उन्हें डाई करता जाता है.
इसके बाद, मुश्किल और सटीक हिसाब लगाने की ज़रूरत होती है. फिर धागे को कुशलता से बांधा जाता है ताकि जिस डाई में इसे प्रोसेस किया जाता है वह उसमें बनी रहे. यह एक मेहनत भरी और बार-बार की जाने वाली प्रक्रिया है.
परंपरागत महारथी कपड़े बुननेवाले, इसमें से ज़्यादातर प्रक्रिया अपने मन में ही कर लेते हैं. एक ड्रॉइंग या ग्राफ़ के रूप में दी गई जानकारी, इस प्रक्रिया को ज़्यादा आसान बना सकती है.आजकल, कुछ युवा बुनकर सॉफ़्टवेयर की मदद से नए-नए डिज़ाइन बनाने लगे हैं. साथ ही, वे खरीदारों के बताए हुए डिज़ाइन और निर्देशों को कंप्यूटर में डालकर जनरेट भी करते हैं.
बुनाई करना
कपड़े का ताना-बाना डाई हो जाने के बाद, कपड़े बुननेवाला करघे को तैयार करके बुनाई शुरू करता है. इकत की बुनाई कर कुशलता के साथ ‘एकल इकत’, ‘ताना इकत’ या ‘दोहरी इकत’ वाले कपड़े तैयार कर सकता है. इकत बुनाई में कारीगरी और बारीकी की जानकारी होनी चाहिए. डिज़ाइन जितना मुश्किल होगा और उसमें जितने ज़्यादा रंगों का इस्तेमाल होगा, कपड़ा बनाने का हर एक चरण उतना ही ज़्यादा मुश्किल और मेहनत भरा होगा.
इकत का सबसे आसान रूप ‘एकल इकत’ है. इसके पैटर्न को ताने या बाने (वार्प या वेफ़्ट) में से किसी एक में रिज़िस्ट किए हुए धागे से तय किया जाता है.

ताना इकत में, ताने के सेट हो जाने पर, करघे पर बैठा कपड़े बुननेवाला, किसी एक रंग के बाने का इस्तेमाल करता है. बुनाई करना फिर भी एक आसान प्रक्रिया है.
बाना (वेफ़्ट) इकत में, जहां ताना (वार्प) सादा होता है और बाने का धागा रिज़िस्ट डाई किया हुआ होता है, वहां बुनाई में बेहतरीन कारीगरी की ज़रूरत होती है.

बाने का धागा सावधानी से लगाया जाना चाहिए ताकि डिज़ाइन में सफ़ाई आ सके.
दोहरी इकत’ के कपड़े में ताने-बाने में रिज़िस्ट डाई किया हुआ धागा होता है और करघे पर इनके मेल से पैटर्न उभरता है. इसलिए, बुनाई की कला सीखने के लिए कुशल और सटीक होने की ज़रूरत होती है.
डिज़ाइन जितना मुश्किल होगा और उसमें जितने ज़्यादा रंगों का इस्तेमाल होगा, कपड़ा बनाने का हर एक चरण उतना ही ज़्यादा मुश्किल और मेहनत भरा होगा.

Lifestyle Desk: Legend News

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