दक्षिण अफ्रीका में गृह युद्ध जैसे हालात, व्यापारिक संस्थानों में लूट और आगजनी

दक्षिण अफ्रीका में गृह युद्ध जैसे हालात हो गए हैं। पूर्व राष्ट्रपति जैकब जुमा ने 8 जुलाई को अदालत के सामने समर्पण किया। उसके बाद से ही उनके समर्थक विरोध-प्रदर्शन करने लगे और देखते ही देखते वो बेकाबू हिंसक भीड़ में तब्दील हो गए। मॉल, शॉपिंग सेंटर, बिजनस सेंटर लूट लिए गए। प्रतिष्ठानों को आग के हवाले कर दिया गया। हिंसक प्रदर्शनकारियों ने भारतीयों को चुन-चुनकर निशाना बनाया है। राजधानी डरबन में भारतीयों की दुकानों और अन्य व्यापारिक संस्थानों में लूट-पाट की और जब कुछ नहीं बचा तो आग लगा दी। हालांक, द. अफ्रीकी सरकार का कहना है कि भारतीयों के खिलाफ हिंसा नस्लभेदी भावना या राजनीतिक कारणों से नहीं हो रही है, बल्कि अपराधियों ने दंगों के जरिए लूटपाट और अराजकता का मौका तलाश लिया है।
जयशंकर ने की द. अफ्रीकी विदेश मंत्री से बात
भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने द. अफ्रीका में भारतीयों के खिलाफ भड़की भावना के मद्देनजर वहां की विदेश मंत्री नलेदी पंडोर से बातचीत की। जयशंकर ने ट्वीट कर बताया कि पंडोर ने उन्हें भारतीय की जान-माल की सुरक्षा का आश्वासन दिया है।
इधर, विदेश मंत्रालय के सचिव संजय भट्टाचार्य ने भी भारत में दक्षिण अफ्रीका के उच्चायुक्त जोएल सिबुसिसो नदेबेले से भी मुलाकात की लेकिन हैरत की बात है कि जिस देश में भारत के महान सपूत महात्मा गांधी ने रंगभेद के लिए अंग्रेजों के खिलाफ आंदोलन छेड़ दिया था और वहां जिनकी मूर्ति की पूजा आज भी होती है, वहीं भारतीयों के खिलाफ जातीय हिंसा भड़क गई! सवाल है कि आखिर द. अफ्रीकियों में वहां रह रहे भारतीयों के खिलाफ अचानक इतनी नफरत कैसे पनप गई?
दंगों का सहारनपुर के गुप्ता बंधु का कनेक्शन?
इस सवाल का जवाब है उत्तर प्रदेश के सहारनपुर से वर्ष 1993 में द. अफ्रीका गया गुप्ता परिवार। गुप्ता बंधुओं अजय, अतुल और राजेश ने तत्कालीन द. अफ्रीकी राष्ट्रपति जैकब जुमा के साथ मिलकर सरकारी खजाने को खूब चूना लगाया। गुप्ता परिवार ने वहां खनन, टेक्नोलॉजी, मीडिया, कंप्यूटिंग, विमानन, ऊर्जा समेत कई क्षेत्रों में अपना कारोबार फैलाया। जुमा के कई पारिवारिक सदस्यों को अपनी कंपनियों में नौकरी दी और बदले में गलत तरीकों से सरकारी ठेके अपने नाम करवाए। भ्रष्टाचार की बदौलत जुमा और गुप्ता परिवार खूब फला-फूला।
द. अफ्रीका से भाग UAE में छिपा है गुप्ता परिवार
जब जुमा के खिलाफ भ्रष्टाचार की शिकायत अदालत के पास गई तो गुप्ता परिवार द. अफ्रीका छोड़कर संयुक्त अरब अमीरात (UAE) का रुख कर लिया। गुप्ता बंधु वहीं निर्वासन की जिंदगी बिता रहे हैं, हालांकि द. अफ्रीका की सरकार उनका प्रत्यर्पण करवाने की कोशिशों में जुटी है। इसी मामले में पिछले महीने ही इकबाल मीर शर्मा नाम के एक भारतीय को गिरफ्तार किया गया है। शर्मा दक्षिण अफ्रीकी सरकार के उद्योग-व्यापार विभाग में वरिष्ठ अधिकारी थे।
राष्ट्रपति रहते जुमा ने खूब मचाई अंधेरगर्दी
दरअसल, 79 साल के जैकब जुमा पर 2009 से 2018 के बीच करीब नौ वर्षों तक राष्ट्रपति पद पर रहते हुए सरकारी खजाने में लूट-खसोट करने का आरोप लगा है। जुमा ने अपने ऊपर भ्रष्टाचार के लगे गंभीर आरोपों की जांच में कभी एजेंसियों की मदद की और न ही कभी सुनवाई में शामिल होने अदालत ही गए लेकिन जब अदालत ने साफ कर दिया कि उनके गुनाहों की सजा माफ नहीं की जा सकती है तो जुमा ने 8 जुलाई को सरेंडर कर दिया। 79 वर्षीय जुमा को 15 महीने की जेल की सजा सुनाई गई है।
जुमा के समर्पण करते ही भड़क गई हिंसा
अंतर्राष्ट्रीय मीडिया की खबरों की मानें तो जुमा समर्थकों ने अपनी नाराजगी जाहिर करने के लिए पहले तो सड़कों पर आवाजाही बाधित की, रैलियों के जरिए विरोध जताया लेकिन बहुत जल्द उनका गुस्सा हिंसक रूप ले लिया। वो व्यापारिक संस्थानों पर टूट पड़े। हिंसक भीड़ ने दुकानों, मॉलों एवं अन्य प्रतिष्ठानों में जबरन प्रवेश किया और वहां सारे सामान लूट लिए। साथ ही एटीएम, रेस्त्रां, शराब और कपड़ों की दुकानों में भी तोड़फोड़ मचाई गई। यह सिलसिला दिन-ब-दिन बढ़ता ही चला गया। इस बीच कई इलाकों से आगजनी की भी खबरें आने लगीं। हिंसक भीड़ लूटपाट के बाद मॉलों एवं अन्य व्यापारिक प्रतिष्ठानों में आग लगाने लगी। जिधर देखो अराजकता का आलम। पुलिस ने एहतियाती कदम उठाए लेकिन उसकी सारी कोशिशें नाकाम होती गईं।
जुलू राजा ने भारतीयों के पक्ष में की अपील
द. अफ्रीका में करीब 14 लाख भारतीय रहते हैं। ऐसा नहीं है कि पूरे देश में उनके खिलाफ नफरत की भावना उबल रही है या उन्हें हिंसा एवं लूटपाट का शिकार बनाया जा रहा है लेकिन जहां जुमा की जुलु जाति का वर्चस्व है, वहां भारतीयों पर खतरा बना है। जुलु समुदाय की द. अफ्रीका में सबसे बड़ी आबादी है। यही वजह है कि जुलु राजा मिसुजुलू काज्वेलिथिनी ने अपने लोगों से भारतीयों के साथ शांति से रहने की अपील की है। उन्होंने अपने समुदाय को संबोधित करने के लिए टेलिविजन का सहारा लिया। उन्होंने टेलिविजन संदेश में कहा कि क्वाजुलू नटाल प्रांत के लोगों को भारतीयों के साथ मिलजुल कर रहना चाहिए। ध्यान रहे कि भारतीय मूल की एक तिहाई आबादी इसी प्रांत में रहती है जो जैकब जुमा का गृह प्रांत है। क्वाजुलु-नताल और गौतेंग प्रांत मुख्य रूप से हिंसा से प्रभावित हुए हैं।
दंगा प्रभावित प्रांत में उतरी सेना
क्वाजुलु-नताल प्रांत में शॉपिंग केंद्रों पर गुरुवार को फिर से हमले हुए तथा कई कारखानों में तोड़फोड़ और आगजनी की गई। इस कारण से दक्षिण अफ्रीका की सेना ने दंगों और हिंसा पर रोक लगाने में पुलिस की मदद करने के लिए 25 हजार सैनिकों की तैनाती शुरू कर दी। वर्ष 1994 में श्वेत अल्पसंख्यकों का शासन समाप्त होने के बाद सैनिकों की सबसे बड़ी तैनाती में साउथ अफ्रीकन नेशनल डिफेंस फोर्स ने 12 हजार सैनिकों के अपने रिजर्व बल को भी मैदान में उतार दिया है। हिंसा वाले गाउतेंग और क्वाजुलु-नताल प्रांतों में सैनिकों को ले जाने के लिए ट्रकों, बख्तरबंद वाहनों और हेलीकॉप्टरों का इस्तेमाल किया जा रहा है। लेकिन, कई इलाकों में खाने-पीने का सामानों की आपूर्ति ठप हो गई। ऐसे में वहां सरकार की तरफ से भोजन की व्यवस्था करवाई जा रही है।
दंगे के विरोध में भी प्रदर्शन
बहरहाल, इन दंगों में अब तक 80 से ज्यादा लोगों की जानें जा चुकी हैं। स्थानीय लोगों ने दंगेबाजों के विरोध में प्रदर्शन भी किया है। वो हिंसा के खिलाफ सड़कों पर उतर रहे हैं। हाथ में बैनर-पोस्टर लिए ये लोग हिंसक भीड़ को लुटेरों और अपराधियों का जत्था बताते हुए इनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। ये लोग दंगे की भेंट चढ़ी दुकानों, मॉलों, शॉपिंग सेंटरों की सफाई में भी हाथ बंटा रहे हैं।
-एजेंसियां

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