प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोमवार को इंडोनेश‍िया पहुंचे तो बहुत कुछ ऐसा हुआ, ज‍िसे जानकर आपको भी गर्व होगा. पहले तो पीएम मोदी को हवा में एस्‍कॉर्ट करने के ल‍िए इंडोनेश‍िया की सरकार ने फाइटर जेट उड़ा द‍िए. राष्ट्राध्यक्षों के स्वागत का आम प्रोटोकॉल दरकिनार करते हुए राष्‍ट्रपत‍ि प्रबोवो सुबियांतो खुद, अपने चार सबसे रसूखदार कैबिनेट मंत्रियों के साथ पीएम मोदी की अगवानी करने सीढ़ियों के पास खड़े थे.इसमें विदेश मंत्री भी थे, तो रक्षा-सुरक्षा मंत्री भी. आमतौर पर ऐसा नजर नहीं आता. क‍िसी राष्‍ट्राध्‍यक्ष के ल‍िए व‍िदेश मंत्री आ जाएं तो रक्षा मंत्री नहीं जाते. राष्‍ट्रपत‍ि आ जाएं तो अन्‍य मंत्री नहीं होते.
एक और बात, राष्‍ट्रपत‍ि प्रबोवो सुबियांतो ये तब क‍िया जब कुछ ही देर पहले वे सिंगापुर के पीएम को विदा करने एयरपोर्ट पहुंचे थे. उन्‍होंने पीएम मोदी की अगवानी के ल‍िए बकायदा एयरपोर्ट पर इंतजार क‍िया. ड‍िप्‍लोमेसी में कहते हैं क‍ि जब कोई राष्ट्राध्यक्ष अपनी आधी कैबिनेट लेकर किसी मेहमान को रिसीव करने पहुंचे, तो यह सिर्फ औपचारिकता नहीं होती. यह दुनिया और खासकर पड़ोसी मुल्कों को एक कड़ा कूटनीतिक संदेश है. इंडोनेशिया साफ कर रहा है कि इंडो-पैसिफिक रीजन में भारत उसका सबसे अहम और रणनीतिक साझेदार है. पीएम मोदी के साथ राष्ट्रपति प्रबोवो की यह पर्सनल केमिस्ट्री इस बात की गवाही दे रही है कि दोनों देशों के रिश्ते अब सिर्फ ट्रेड तक सीमित नहीं हैं, बल्कि एक ऐसे मुकाम पर हैं, जहां दोनों को एक-दूसरे की सख्त जरूरत है. 
साउथ चाइना सी में चीन की बढ़ती दादागीरी से इंडोनेशिया भी खौफ में है. अपनी समुद्री सीमाओं की सुरक्षा के लिए उसे एक ऐसा हथियार चाहिए जो ड्रैगन की चालबाजियों पर लगाम कस सके. यहीं भारत की अहमियत बढ़ती है. फिलीपींस के बाद अब इंडोनेशिया भी भारत से ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल की एक अतिरिक्त बैटरी खरीदने की तैयारी में है. भारत अब दुनिया के लिए सिर्फ एक बड़ा बाजार नहीं, बल्कि एक मजबूत ड‍िफेंस एक्‍सपोर्टर बन चुका है, जिस पर साउथ पूर्व एशिया के देश आंख मूंदकर भरोसा कर रहे हैं.
डिजिटल इंडिया का मुरीद इंडोनेशिया
ड‍िफेंस के अलावा इंडोनेशिया भारत के डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर का भी मुरीद है. पिछले एक दशक में भारत ने यूपीआई और डिजिटल पेमेंट के जरिए जो क्रांति की है, इंडोनेशिया उसे अपने देश में उतारना चाहता है. इंडोनेशिया की सरकार भारत के इसी डिजिटल ब्लूप्रिंट का इस्तेमाल करके अपना खुद का डिजिटल इकोसिस्टम बनाना चाहती है. इसके साथ ही स्वास्थ्य, शिक्षा, अंतरिक्ष और फार्मास्यूटिकल्स के क्षेत्र में भी दोनों देशों के बीच कई बेहद अहम समझौते होने जा रहे हैं. 
भारत के लिए इंडोनेशिया क्यों है जरूरी? 
सवाल ये भी है क‍ि भारत के ल‍िए इंड‍ोनेश‍िया क्‍यों जरूरी है? दरअसल, पीएम मोदी जानते हैं क‍ि भविष्य की दुनिया इलेक्ट्रिक व्हीकल और क्लीन एनर्जी पर चलेगी, जिसके लिए निकल सबसे जरूरी मेटल है. इंडोनेशिया के पास दुनिया का सबसे बड़ा निकल भंडार मौजूद है. भारत की नजरें इसी खजाने पर हैं. भारत चाहता है कि क्रिटिकल मिनरल्स की प्रोसेसिंग और माइनिंग के लिए दोनों देशों के बीच जॉइंट वेंचर हों, ताकि ईवी बैटरियों और रक्षा उपकरणों के लिए सप्लाई चेन सुरक्षित हो सके और चीन पर निर्भरता खत्म हो जाए.
ज‍ियो-पॉल‍िट‍िकल नजर‍िये से भी इंडोनेशिया भारत के लिए तुरुप का इक्का है. दुनिया का एक बहुत बड़ा ट्रेड रूट स्‍ट्रेट ऑफ मलक्का से होकर गुजरता है. इंडो-पैसिफिक में अपनी पकड़ मजबूत बनाए रखने और अपनी समुद्री सप्लाई चेन को सुरक्षित करने के लिए भारत को इंडोनेशिया के साथ यह मजबूत दोस्‍ती चाह‍िए ही. पीएम मोदी का यह भारत की एक्ट ईस्ट पॉलिसी को नए मुकाम पर ले जाएगा.
टूर‍िस्‍टों को होने वाला है बड़ा फायदा
पीएम मोदी के इस दौरे में बड़ा ऐलान होने की उम्मीद है, जिसका सीधा फायदा टूरिस्ट्स और व्यापारियों को मिलेगा. कहा जा रहा क‍ि भारत के UPI और इंडोनेशिया के QRIS डिजिटल पेमेंट सिस्टम को आपस में लिंक किया जा रहा है. इसका सीधा मतलब यह है कि अगर कोई भारतीय इंडोनेशिया जैसे बाली या जकार्ता घूमने जाता है, तो उसे करंसी एक्सचेंज के झंझट में नहीं पड़ना होगा. वह सीधे अपने फोन से यूपीआई के जरिए भारतीय रुपयों में पेमेंट कर सकेगा. 
-Legend News

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