विश्व बैंक के अध्यक्ष अजय बंगा ने कहा है कि भारत विकास के ऐसे चरण में पहुंच गया है, जहां डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे और तकनीक आधारित कृषि सहित उसके विकास के अनुभवों को अन्य देशों के साथ साझा किया जा सकता है।
जी20 वित्त मंत्रियों की बैठक से इतर आईएएनएस को दिए एक विशेष साक्षात्कार में बंगा ने कहा कि विश्व बैंक भारत के साथ ज्ञान के आदान-प्रदान को बढ़ा रहा है, क्योंकि देश 2047 तक अपने विकास लक्ष्यों को हासिल करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
बंगा ने कहा, मेरा मानना है कि भारत विकास के ऐसे चरण में पहुंच गया है, जहां उसके अनुभवों से अन्य देश सीख सकते हैं।
उन्होंने भारत के डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे का उल्लेख करते हुए कहा कि आधार से लेकर बैंक खातों तक डिजिटल सेवाओं के विस्तार से अन्य देशों को सीख मिल सकती है। उन्होंने कृषि क्षेत्र में तकनीक के इस्तेमाल को भी ऐसा क्षेत्र बताया, जिससे अन्य देश लाभ ले सकते हैं।
उन्होंने कहा, भारत के डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे को देखें, जो आधार से लेकर बैंक खातों तक फैला हुआ है। कृषि के क्षेत्र में जो काम किया जा रहा है, उससे भी अन्य देश सीख सकते हैं।
2047 के लक्ष्य में भारत की वैश्विक भूमिका भी महत्वपूर्ण
बंगा ने कहा कि 2047 तक भारत के विकसित राष्ट्र बनने की दिशा केवल घरेलू अर्थव्यवस्था के आकार या उसकी वृद्धि दर पर निर्भर नहीं होगी। वैश्विक आर्थिक और राजनीतिक मामलों में भारत की भूमिका भी महत्वपूर्ण होगी।
उन्होंने कहा, 2047 तक विकसित भारत बनने के लिए अर्थव्यवस्था का आकार केवल घरेलू वृद्धि से तय नहीं होगा, बल्कि विश्व अर्थव्यवस्था और विश्व राजनीति में भारत की स्थिति भी महत्वपूर्ण होगी।
उन्होंने कहा कि अगले 15 वर्षों में भारत के विकास की दिशा में ये दोनों पहलू महत्वपूर्ण होंगे।
कृषि और स्वास्थ्य क्षेत्रों में तकनीक का इस्तेमाल
विश्व बैंक प्रमुख ने कहा कि संस्था भारत के साथ विभिन्न क्षेत्रों में काम कर रही है और भारत के विकास अनुभवों से मिले ज्ञान के आदान-प्रदान को भी बढ़ावा दे रही है।
उन्होंने छोटे किसानों की सहायता के लिए तकनीक और साझेदारी के जरिए चल रही कृषि परियोजनाओं का उदाहरण दिया। उत्तर प्रदेश की अपनी पिछली यात्रा का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि वहां उन्होंने सहकारी समितियों को गूगल और विश्व बैंक के साथ मिलकर काम करते देखा।
उन्होंने कहा, जब मैं पिछली बार भारत में था, तो उत्तर प्रदेश गया था। वहां मैंने देखा कि सहकारी समितियां गूगल और हमारे साथ तकनीक के माध्यम से काम कर रही हैं, ताकि छोटे किसानों को बड़े स्तर पर जरूरी कृषि इनपुट और अन्य सहायता मिल सके।
उन्होंने कहा कि स्थानीय स्तर पर उपलब्ध सेवाओं को तकनीक से जोड़ने का यह तरीका अन्य क्षेत्रों में भी उपयोगी हो सकता है।
बंगा ने प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं के संदर्भ में कहा कि डिजिटल कनेक्टिविटी के जरिए विकेंद्रीकृत प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को डॉक्टरों और क्षेत्रीय अस्पतालों से जोड़ा जा सकता है।
उन्होंने कहा, इसके बाद आप इसे तकनीक और डिजिटलीकरण के माध्यम से क्षेत्रीय अस्पतालों और डॉक्टरों से जोड़ सकते हैं।
बुनियादी ढांचे और निजी निवेश पर भी सहयोग
बंगा ने कहा कि विश्व बैंक का भारत के साथ सहयोग भौतिक बुनियादी ढांचे, शिक्षा, कौशल विकास, स्वास्थ्य सेवाओं, नियामकीय सुधारों और निजी निवेश जुटाने सहित कई क्षेत्रों में है।
उन्होंने कहा कि विश्व बैंक पर्यटन क्षेत्र में अवसरों और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को समर्थन देने की संभावनाओं पर भी काम कर रहा है।
उन्होंने कहा, भारत सरकार के साथ हम इसी तरह के क्षेत्रों में काम कर रहे हैं।
नेतृत्व की भूमिका पर अजय बंगा की टिप्पणी
भारत की आर्थिक प्रगति में नेतृत्व की भूमिका के सवाल पर बंगा ने कहा कि जनता और नेतृत्व को अलग-अलग करके नहीं देखा जा सकता।
उन्होंने कहा, मेरा मानना है कि जनता और नेतृत्व एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। लोगों को वही नेतृत्व मिलता है जिसके वे हकदार होते हैं।
उन्होंने कहा कि भारत के लिए यह महत्वपूर्ण है कि उसका नेतृत्व देश को किस दिशा में ले जा रहा है। 
-Legend News

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