नई द‍िल्ली। भारत के सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) के सामने एक अजीब मामला आया, ज‍िसमें अप्रैल 2018 में आईआईएम (IIM) कलकत्ता से मैनेजमेंट की डिग्री और मास कम्युनिकेशन में डिप्लोमा हासिल कर चुकी एक महिला दिल्ली के एक फाइव-स्टार होटल के ब्यूटी सैलून में बाल कटवाने गई थी.

महिला का आरोप था कि सैलून ने उनके बाल बहुत छोटे कर दिए. उनका दावा था कि एक कॉर्पोरेट मैनेजर होने के नाते और मॉडलिंग असाइनमेंट से जुड़े होने के कारण इस खराब हेयरकट से उनका आत्मविश्वास पूरी तरह टूट गया. उन्होंने यह भी बताया कि डिप्रेशन और कॉन्फिडेंस की कमी के कारण जून 2018 में उन्हें अपनी नौकरी तक छोड़नी पड़ी. इसी नुकसान की भरपाई के लिए उन्होंने जुलाई 2018 में कंज्यूमर कमीशन का दरवाजा खटखटाया.

कंज्यूमर कमीशन ने मानी सैलून की गलती
मामले की गंभीरता को देखते हुए सितंबर 2021 में कंज्यूमर कमीशन ने सैलून को सेवा में कमी और लापरवाही का दोषी माना. कमीशन ने होटल को 2 करोड़ रुपये का भारी-भरकम मुआवजा देने का आदेश दिया. होटल प्रबंधन इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जहां से मामले को दोबारा मूल्यांकन के लिए कमीशन के पास वापस भेज दिया गया.

हैरानी की बात यह रही कि मामले के दोबारा कमीशन के पास जाने पर महिला ने अपना दावा 2 करोड़ से बढ़ाकर 5.2 करोड़ रुपये कर दिया. कमीशन ने फिर से उनके पक्ष में फैसला सुनाते हुए 9% ब्याज के साथ 2 करोड़ रुपये देने का आदेश दिया. इसके बाद हार न मानते हुए सैलून ने फिर से सुप्रीम कोर्ट का रुख किया. इस बार महिला ने बिना किसी मुफ्त कानूनी सहायता के खुद अदालत में अपना पक्ष मजबूती से रखा.

सुप्रीम कोर्ट ने करोड़ों के दावे पर उठाए सवाल
6 फरवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर अपना अंतिम फैसला सुनाते हुए मुआवजे की रकम को 2 करोड़ से घटाकर 25 लाख रुपये कर दिया. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि करोड़ों रुपये के मुआवजे का दावा महज अनुमानों, भावनाओं या दावों के आधार पर नहीं किया जा सकता.

अदालत ने पाया कि महिला ने अपने करोड़ों के नुकसान को साबित करने के लिए जो भी सबूत दिए, वे महज फोटोकॉपी थे. सैलून के वकीलों ने कोर्ट को बताया कि महिला ने अपना कोई इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) जमा नहीं किया था, जिससे यह साबित हो सके कि घटना से पहले और बाद में उनकी कमाई में वास्त्व में कोई गिरावट आई थी. इसके अलावा, जिन कंपनियों ने कथित तौर पर उन्हें मॉडलिंग के ऑफर दिए थे, उनके किसी भी अधिकारी को गवाही या क्रॉस-एग्जामिनेशन (जिरह) के लिए नहीं बुलाया गया.

बिना पुख्ता सबूतों के नहीं मिलता न्याय
सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि कंज्यूमर कमीशन ने केवल फोटोकॉपी दस्तावेजों और महिला के मानसिक आघात की बातों को आधार मानकर 2 करोड़ रुपये का फैसला देने में बड़ी गलती की है. अदालत ने कहा कि जब दावों की रकम इतनी बड़ी हो, तो उसे पुख्ता और विश्वसनीय सबूतों के साथ साबित करना अनिवार्य है.
- Legend News

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