रिपोर्ट : LegendNews
भारत के रहस्यमय हाइपरसोनिक मिसाइल परीक्षण से चीन और पाकिस्तान में क्यों हुआ भय व्याप्त?
DRDO ने शुक्रवार शाम ओडिशा के तट से एक परमाणु-सक्षम इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) का पहला परीक्षण किया है। रक्षा सूत्रों के हवाले से प्राप्त जानकारी के अनुसार "हालांकि यह परीक्षण-लॉन्च अग्नि-6 मिसाइल जैसा नहीं लगता लेकिन आज जिस मिसाइल का परीक्षण किया गया है वह ICBM श्रेणी की है।" DRDO ने अभी तक इस मिसाइल परीक्षण की आधिकारिक घोषणा नहीं की है। कुछ दिन पहले ये चर्चा जरूर थी कि DRDO ICBM क्लास की एक मिसाइल का परीक्षण करने जा रहा है। फिलहाल ये कौन सी मिसाइल है इसको लेकर रहस्य बना हुआ है लेकिन चर्चा की जा रही है कि ये अग्नि-6 मिसाइल है।
पाकिस्तानी प्रोपेगेंडा चलाने वाली मलेशियाई डिफेंस वेबसाइट 'डिफेंस सिक्योरिटी एशिया' ने इस टेस्ट को लेकर कहा है कि इसने पूरे इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में रणनीतिक समीकरणों को तेजी से बदल दिया है क्योंकि यह परीक्षण चीन और पाकिस्तान के बीच बढ़ते परमाणु आधुनिकीकरण की होड़ और उभरती हाइपरसोनिक स्ट्राइक क्षमताओं के बीच हुआ था। खासकर पाकिस्तान का डर इस बात को लेकर है कि दुनिया में सिर्फ चार देशों अमेरिका, रूस, चीन और उत्तरी कोरिया के पास ही ICBM टेक्नोलॉजी है और इन देशों ने 12,000 किलोमीटर से ज्यादा रेंज वाली ICBM मिसाइलें तैनात की हुई हैं। भारत अगर इस क्षमता में महारत हासिल कर लेता है तो उसके पास अमेरिका तक में हमला करने की क्षमता हासिल हो जाएगी और पाकिस्तान के पास ये टेक्नोलॉजी नहीं है।
पाकिस्तान और चीन ICBM मिसाइल से क्यों डर रहे हैं?
यहां आपके लिए ये जानना है कि ईरान ने जिन बैलिस्टिक मिसाइलों का इस्तेमाल किया है भारत के पास उससे कई गुणा ज्यादा क्षमता वाली मिसाइलें हैं। भारत की बैलिस्टिक मिसाइलों को दुनिया के किसी भी देश के लिए इंटरसेप्ट करना लगभग असंभव है। इसीलिए ईरान को एक साथ दर्जनों मिसाइलें लांच करने की जरूरत होती है लेकिन भारत को सिर्फ एक ही मिसाइल लांच करना है जो अपने टारगेट को 100 फीसदी हिट करेगा। भारत ने इस टेस्ट के लिए 3500 किलोमीटर का नोटम जारी किया था जिसका मतलब है ये मिसाइल एक रणनीतिक मिसाइल हो सकती है। कई ओपन-सोर्स एनालिस्ट्स ने इस घटना को अग्नि-5 के संभावित डेवलपमेंट या फिर अग्नि-6 टेक्नोलॉजी के शुरुआती प्रदर्शन से जोड़कर देखा है।
बांग्लादेश में कई लोगों ने अपने मोबाइल पर आकाश में मिसाइल को रिकॉर्ड किया है। उन वीडियोज को देखने पर पता चलता है कि इसकी स्पीड हाइपरसोनिक री-एंट्री प्रोफाइल या मैक 5 से ज्यादा हो सकती है। इसके अलावा मिसाइल को पैंतरेबाजी करते हुए देखा गया जिसका मतलब मिसाइल की क्षमता को दिखाता है। इसके अलावा एक्सपर्ट्स का ये भी मानना है कि ऐसी मिसाइलें काफी ज्यादा तबाही मचाती हैं और काफी ज्यादा महंगी भी होती हैं जिसका मतलब है कि भारत की मिसाइल डॉक्ट्रिन उच्च दबाव वाले युद्ध के दौरान सटीक हमला करने से प्रेरित है।
चीन के खिलाफ इंडो-पैसिफिक में बराबर का दम
पाकिस्तान के खिलाफ ICBM मिसाइलों की जरूरत नहीं है लेकिन इस मिसाइल के टेस्ट का मतलब है कि मकसद चीन के रणनीतिक लक्ष्य हो सकते हैं। यानि मिसाइल भंडार, परमाणु भंडार या काफी उच्च वैल्यू वाले टारगेट। भारत के रक्षा प्रतिष्ठान ने बार-बार चीन और पाकिस्तान दोनों के एक साथ बढ़ते दबाव और संभावित दो मोर्चों पर संघर्ष की स्थिति से उत्पन्न बढ़ती चुनौती पर जोर दिया है। अग्नि सीरिज की मिसाइलें लंबी दूरी तक चीन की मुख्य भूमि में रणनीतिक बुनियादी ढांचे को चाहे वो काफी ज्यादा एयर डिफेंस के घेरे में ही क्यों ना हों उन्हें नष्ट करने की क्षमता को दिखाता है। बीजिंग लगातार नौसैनिक तैनाती, निगरानी गतिविधियों और दोहरे उपयोग वाले बुनियादी ढांचे की साझेदारी के माध्यम से हिंद महासागर क्षेत्र में अपने परमाणु शस्त्रागार और सैन्य उपस्थिति दोनों का विस्तार कर रहा है।
ऐसे में MIRV-सक्षम या पैंतरेबाजी करने योग्य रणनीतिक मिसाइल सिस्टम चीनी मिसाइल रक्षा योजना को और मुश्किल बना देगा। चीन के पास ऐसी मिसाइलों का कोई जवाब नहीं है। इसीलिए हिंद-प्रशांत क्षेत्र के पर्यवेक्षकों के लिए 8 मई का प्रक्षेपण सिर्फ एक और मिसाइल परीक्षण नहीं था बल्कि क्षेत्र के अत्यधिक उत्तरजीविता, लंबी दूरी और सटीक-उन्मुख प्रतिरोध प्रणालियों की ओर तेजी से हो रहे परिवर्तन का एक स्पष्ट संकेत था।
-Legend News

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