भारत सरकार देश के अंदर विदेशी फंडिंग से जुड़े कानून में बड़े बदलाव पर विचार कर रही है। इसे लेकर संसोधन विधेयक को सोमवार को पेश किया जा सकता है, जिस पर दुनिया भर के ईसाई संगठन तिलमिला उठे हैं। फॉरेन कंट्रीब्यूशन (रेगुलेशन) एक्ट (FCRA) में संशोधन वाला यह बिल 25 मार्च को लोकसभा में पेश किया गया था लेकिन विपक्षी दलों और सिविल सोसाइटी संगठनों के कड़े विरोध के बाद इसे टाल दिया गया था। अब इसे एक बार फिर लाने की तैयारी चल रही है।
ईसाई संगठनों का आरोप है कि इससे सरकार को NGO की संपत्तियों पर अभूतपूर्व अधिकार मिल सकते हैं। इनमें वे ईसाई संस्थाएं, अस्पताल, स्कूल और चैरिटेबल संगठन शामिल हैं, जो विदेशी चंदे पर निर्भर हैं। दुनिया भर के ईसाई संगठनों का कहना है कि यह कानून खासतौर पर ईसाई संस्थाओं की भारत में स्वतंत्र रूप से काम करने की क्षमता को प्रभावित कर सकता है। 
भारत सरकार का क्या है कहना?
हालांकि, भारत सरकार का कहना है कि इस संशोधन का मकसद विदेशों से आने वाले चंदे की निगरानी रखना और फंड के दुरुपयोग को रोकना है। यह संसोधन बिल ऐसे समय में लाने की कोशिश हो रही है, जब विदेशी फंडिंग वाले संगठनों की जांच-पड़ताल तेज हो गई है।
अमेरिका के वॉशिंगटन डीसी स्थित इंटरनेशनल क्रिश्चियन कंसर्न (ICC) का आरोप है कि भारत के FCRA सिस्टम का इस्तेमाल ईसाई संगठनों के कामकाज को रोकने के लिए किया गया है। इसने कहा है कि नए ढांचे के तहत संगठनों पर FCRA रजिस्ट्रेशन खोने का खतरा बढ़ जाएगा। इसके न केवल संगठन की विदेशी फंडिंग पाने की क्षमता पर खतरा हो सकता है, बल्कि ईसाई संगठनों के कामकाज पर भी खतरा हो सकता है। 
ईसाई समूहों के लिए कहा खतरा
अमेरिकी संगठन ICC ने इसे ईसाई समूहों के लिए खतरा बताया है। इसने आरोप लगाया कि भारतीय अधिकारियों का कहना है विदेशों से फंड पाने वाले ईसाई समूह धर्मार्थ कार्यों की आड़ में जबरन धर्म परिवर्तन करवाते हैं। इंटरनेशल क्रिश्चियन कंसर्न ने कहा कि इन आरोपों का इस्तेमाल ईसाई संस्थाओं के मानव सेवा के जायज कामों को निशाना बनाने के लिए किया जाता है।
मुसलमानों के उत्पीड़न की तरह बताया
ICC ने यूएस कमीशीन ऑन इंटरनेशनल रिलीजियस फ्रीडम (USCIRF) की प्रोपेगैंडा भरी सिफारिशों का जिक्र किया है, जिसमें भारत को धार्मिक स्वतंत्रता को लेकर खास चिंता वाले देश का दर्जा देने की मांग की गई है। USCIRF के निशाने पर भारत लगातार रहा है। कहा जाता है कि यह समूह की रिपोर्टों का इस्तेमाल भारत पर दबाव बनाने के लिए किया जाता है। ICC ने अपने लेख में आरोप लगाया गया है कि भारत में ईसाई समूहों को उसी तरह के प्रतिबंध पैटर्न का सामना करना पड़ रहा है, जैसा पहले मुसलमानों को करना पड़ा था। 
-Legend News

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