रिपोर्ट : LegendNews
हंगामा करते रह गए अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप, पीएम मोदी ने चुपचाप बना दिया 35 देशों का ग्रिड
जब से अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप दूसरी बार सत्ता में आए हैं, तब से दुनिया में कहीं न कहीं हंगामा मचा हुआ है। जनवरी, 2025 में सत्ता संभालते ही ट्रंप ने पूरी दुनिया पर ट्रेड टैरिफ लगाकर हंगामा मचाया तो वहीं, इस साल फरवरी के आखिर से ईरान के साथ हुए युद्ध मोल लेकर भारत समेत पूरी दुनिया को मुश्किल में डाल दिया। मगर, भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जून, 2024 में जब से तीसरी बार सत्ता में आए तो वह गुपचुप एक मिशन पर लग गए। इसका नतीजा यह रहा कि बीते करीब 2 साल में पीएम मोदी ने 35 देशों का एक ग्रिड बना लिया, जो भारत को क्रिटिकल मिनरल्स और रेयर अर्थ मिनरल्स की जरूरतों को पूरा करने में मददगार साबित होगा।
पीएम मोदी ने भारत को 35 देशों के ग्रिड से जोड़ा
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के दौर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तीसरी बार सत्ता में आने के साथ ही क्रिटिकल मिनरल्स और रेयर अर्थ मिनरल्स की जरूरतों को पूरा करने के लिए बड़ी नींव रख दी थी। उन्होंने अपने विदेशी दौरों के साथ चुपचाप इस मिशन को पूरा किया।
पीएम मोदी ने भारत को 35 देशों के उस ग्रिड से जोड़ दिया, जिनके पास रेयर अर्थ और क्रिटिकल मिनरल्स हैं।
हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इंडोनेशिया यात्रा के दौरान यह घोषणा की गई कि भारत इंडोनेशिया में स्टील, निकेल और रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट के निर्माण में निवेश करेगा। इसका मकसद जरूरी मिनरल्स की सप्लाई चेन को मजबूत करना है।
पीएम ने कहा-'आज के दौर में टेक्नोलॉजी की सप्लाई चेन की मजबूती बहुत अहम है। अहम मिनरल्स और स्टील सेक्टर में सप्लाई चेन को और मजबूत करने के लिए एक जरूरी समझौता हुआ है।'
वैश्विक भू-राजनीति में इन मिनरल्स की बड़ी भूमिका
जैसे-जैसे साफ ऊर्जा और एडवांस्ड टेक्नोलॉजी की ओर दुनिया का झुकाव तेजी से बढ़ रहा है, रेयर अर्थ मिनरल्स और क्रिटिकल मिनरल्स वैश्विक भू-राजनीति में एक अहम रणनीतिक संपत्ति के तौर पर उभरे हैं। ऐसे में भारत के बनाए इस ग्रिड की अहमियत बढ़ जाती है।
भारत ने रख दी नेशनल क्रिटिकल मिनरल मिशन की नींव
भारत ने 2024-25 से 2030-31 तक सात साल की अवधि के लिए जनवरी 2025 में 'नेशनल क्रिटिकल मिनरल मिशन' (NCMM) शुरू किया है।
यह मिशन सामान्य माइनिंग पहल से कहीं आगे की चीज है। इसमें एक लंबी अवधि की रणनीति बनाई गई है, जिसका मकसद भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करना, औद्योगिक विकास को तेजी देना और तकनीकी रूप से आत्मनिर्भरता को बढ़ाना है।
क्या होते हैं क्रिटिकल मिनरल्स
क्रिटिकल मिनरल्स ऐसे संसाधन हैं जो आर्थिक विकास और राष्ट्रीय सुरक्षा, दोनों के लिए जरूरी हैं। तांबा, लिथियम, निकिल, कोबाल्ट, ग्रेफाइट, एल्युमिनियम, मैंगनीज, सिलिकॉन, चांदी के अलावा, रेयर अर्थ एलिमेंट के अलावा अन्य महत्वपूर्ण मिनरल्स शामिल हैं।
ये क्लीन एनर्जी, एडवांस्ड इलेक्ट्रॉनिक्स, ट्रांसपोर्टेशन, टेलीकम्युनिकेशन और डिफेंस जैसे सेक्टर में अहम भूमिका निभाते हैं और साथ ही कम-कार्बन वाली अर्थव्यवस्था की ओर वैश्विक बदलाव में भी मदद करते हैं। चूंकि इन मिनरल्स की सप्लाई चेन में अक्सर रुकावटें आ सकती हैं, इसलिए देश इनकी भरोसेमंद सप्लाई सुनिश्चित करने के लिए तेजी से काम कर रहे हैं।
चीन की रेयर अर्थ और क्रिटिकल मिनरल्स पर बढ़त
चीन दुर्लभ मृदा सहित कई क्रिटिकल मिनरल्स के वैश्विक प्रसंस्करण में योगदान देता है। वहीं, प्रसंस्करण क्षमता का अनुमानित 80-90 फीसदी हिस्सा चीन के नियंत्रण में है। वैश्विक कच्चे और प्रोसेस्ड क्रिटिकल मिनरल्स के निर्यात में चीन की हिस्सेदारी 17.6 फीसदी है। वहीं, भारत की हिस्सेदारी करीब 3.3 फीसदी है।
क्रिटिकल मिनरल्स में क्या शामिल हैं?
रेयर अर्थ मिनरल्स की अहमियत बहुत बढ़ चुकी है। ये ऐसे खनिज हैं, जिनके दम पर ही आज स्मार्टफोन, इलेक्ट्रिक वाहन, डिफेंस, एयरोस्पेस, स्पेस से लेकर न्यूक्लियर क्षेत्र के लिए जरूरी उपकरण बनाए जा सकते हैं।
इन क्रिटिकल मिनरल्स और रेयर अर्थ मिनरल्स के मामले में भारत ने अपना नेशनल मिशन शुरू किया है, ताकि 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को पूरा किया जा सके।
-Legend News

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