अमेरिकी विदेश ने पाकिस्तान सरकार से सैन्य और खुफिया खर्च पर पूरा हिसाब किताब मांगा है। विदेश विभाग ने कहा है कि पाकिस्तान के मिलिट्री और इंटेलिजेंस खर्च पर पर्याप्त संसदीय और नागरिक निगरानी नहीं हुई है। यानि पाकिस्तान ने पैसे कहां खर्च किए हैं, इसका कोई हिसाब किताब नहीं है। इसके साथ ही अमेरिकी विदेश विभाग ने सरकारी कर्ज की सीमित जानकारी और एग्जीक्यूटिव बजट प्रस्ताव जारी करने में देरी पर भी चिंता जताई है। ये खर्च करीब 3 ट्रिलियन पाकिस्तान रुपये है। ये चिंताएं '2026 फिस्कल ट्रांसपेरेंसी रिपोर्ट' में उठाई गई हैं। इस रिपोर्ट में पाकिस्तान की पब्लिक फाइनेंशियल ट्रांसपेरेंसी यानि सार्वजनिक वित्तीय पारदर्शिता का आकलन किया गया और देश की बजट और वित्तीय जानकारियां छिपाने की बात कही गई है। 
रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान ने अपना पास किया गया बजट और साल के आखिर के वित्तीय स्टेटमेंट ऑनलाइन आसानी से उपलब्ध कराए। लेकिन मिलिट्री और इंटेलिजेंस पर कितना बजट था और पैसे कहां खर्च किए गये इसकी कोई जानकारी नहीं दी गई है। 
3 ट्रिलियन सैन्य खर्च पर फंस गया पाकिस्तान!
इसके अलावा अमेरिका ने इस्लामाबाद की इस बात के लिए भी आलोचना की है कि उसने अपना एग्जीक्यूटिव बजट प्रस्ताव उचित समय के भीतर जारी नहीं किया। आकलन के अनुसार इससे बजट को अपनाने से पहले सरकारी खर्च की जांच करने के लिए कानून बनाने वालों और सिविल सोसाइटी को मिलने वाला समय कम हो जाता है।
अमेरिकी विदेश विभाग ने पाकिस्तान के फिस्कल ट्रांसपेरेंसी फ्रेमवर्क यानि वित्तीय पारदर्शिता ढांचे में तीन अहम बदलाव करने को कहा है। 
1- पाकिस्तान अपने एग्जीक्यूटिव बजट प्रस्ताव को उचित समय के भीतर सार्वजनिक करे। 
2- सरकारी कर्ज की देनदारियों के बारे में पूरी जानकारी दें। 
3- सेना तथा खुफिया एजेंसियों के बजट को संसदीय या नागरिक निगरानी के दायरे में लाए।
3 ट्रिलियन रुपये हुआ पाकिस्तान का रक्षा बजट
अमेरिका का यह आकलन ऐसे समय में आया है जब पाकिस्तान ने 2026-27 फाइनेंशियल ईयर के लिए अपने रक्षा बजट में काफी बढ़ोत्तरी की है। 'डॉन' के अनुसार जून में पाकिस्तान की संघीय सरकार ने रक्षा सेवाओं के लिए 3 ट्रिलियन रुपये आवंटित करने का प्रस्ताव रखा है। यह पिछले साल के शुरुआती आवंटन 2.55 ट्रिलियन रुपये से 17.65 प्रतिशत ज्यादा है। रक्षा सेवाओं के लिए प्रस्तावित आवंटन पाकिस्तान की 143.6 ट्रिलियन रुपये की अनुमानित GDP का लगभग 2.08 प्रतिशत और संघीय सरकार के कुल 18.77 ट्रिलियन रुपये के खर्च का लगभग 16 प्रतिशत है। 
-Legend News

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