भारतीय क्रिकेट टीम के अनुभवी स्पिनर रविचंद्रन अश्विन ने भारतीय क्रिकेट फैंस से ऑनलाइन बातचीत में सम्मान और संतुलन बनाए रखने की अपील की है। उन्होंने पूर्व कोच गौतम गंभीर की तरह ही, सोशल मीडिया पर स्वस्थ चर्चा की वकालत की है। अश्विन ने चिंता व्यक्त की कि व्यक्तिगत हमलों का बढ़ता चलन खेल को ऐसी जगह ले जा रहा है, जहां उसे कभी नहीं होना चाहिए था। यह प्रवृत्ति तब और बढ़ गई जब पिछले महीने साउथ अफ्रीका के खिलाफ घरेलू टेस्ट सीरीज में भारत को हार मिली और गौतम गंभीर को आलोचना का सामना करना पड़ा।
व्यक्तिगत हमलों पर बोले अश्विन
एक कार्यक्रम के दौरान अश्विन ने ऑनलाइन चर्चाओं में बढ़ते व्यक्तिगत हमलों के बारे में बात की। उन्होंने बताया कि कैसे कुछ खराब प्रदर्शन के बाद किसी खिलाड़ी या कोच को तुरंत खारिज कर दिया जाता है, जबकि एक अच्छे दिन के बाद उसकी खूब तारीफ होती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रदर्शन पर सवाल उठाना सामान्य है, लेकिन बातचीत का मुख्य बिंदु चयन के तर्क और मैदान पर खिलाड़ी के प्रदर्शन पर केंद्रित होना चाहिए न कि व्यक्तित्व को नीचा दिखाने पर। 
अश्विन ने जोर देकर कहा कि चर्चाओं में यह देखना चाहिए कि क्या किसी खिलाड़ी की स्थिति को मजबूत करता है और क्या नहीं, बजाय इसके कि खिलाड़ियों को अच्छा या बुरा करार दिया जाए। उन्होंने युवा खिलाड़ी रियान पराग के वनडे क्रिकेट में चयन को लेकर चल रही बहस का उदाहरण देते हुए कहा, 'चर्चा यह नहीं होनी चाहिए कि पराग अच्छा है या बुरा। यह इस बारे में होनी चाहिए कि उसके चयन का समर्थन क्या करता है और क्या नहीं। इसके बजाय, हम अक्सर व्यक्तित्वों को नीचा दिखाने लगते हैं।' 
समर्थन का मतलब नफरत नहीं
अश्विन ने फैंस से आग्रह किया कि एक खिलाड़ी का समर्थन करने का मतलब यह नहीं है कि आपको दूसरे से नफरत करनी पड़े। उन्होंने तेज गेंदबाजों प्रसिद्ध कृष्णा और हर्षित राणा का भी जिक्र किया, जिन्होंने ऑनलाइन आलोचना के बाद दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ वनडे सीरीज में शानदार वापसी की। उन्होंने सवाल उठाया कि फैंस क्यों किसी फिल्म की कहानी की तरह बन गए हैं, जहां एक खिलाड़ी का समर्थन करने का मतलब दूसरे से नफरत करना है। 
-Legend News

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