रिपोर्ट : LegendNews
पश्चिम बंगाल: चुनावों से पहले पूर्व शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी के आवास पर ED का छापा
पश्चिम बंगाल में चुनावों से पहले एक बड़ी खबर सामने आई है। यहां प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने पूर्व शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी के आवास पर फिर से छापा मारा है। इस घटना के बाद से राजनीतिक हलकों में हलचल बढ़ गई है। ईडी ने शिक्षक भर्ती घोटाले का मामले में यह कार्रवाई की है। यह मामला लंबे समय से राज्य की राजनीति के केंद्र में बना हुआ है। विधानसभा चुनावों से ठीक पहले ईडी द्वारा यह कार्रवाई करना राजनीतिक पहलू से भी काफी अहम माना जा रहा है।
कई बार समन के बावजूद पेश नहीं हुए चटर्जी
जानकारी के अनुसार, ईडी ने शनिवार को दक्षिण कोलकाता के नकटला स्थित चटर्जी के घर पर छापा मारा। इस दौरान भारी संख्या में केंद्रीय बल चटर्जी के घर के बाहर मौजूद रहा। बताया जा रहा है कि एजेंसी इस मामले में पार्थ चटर्जी से फिर से पूछताछ करना चाहती है, क्योंकि वह पहले कई बार समन के बावजूद पेश नहीं हुए थे। बता दें कि इस पूरे मामले का संबंध स्कूल शिक्षक भर्ती घोटाले से है, जिसमें करोड़ों रुपये के लेनदेन का आरोप है। ईडी को शक है कि इस घोटाले में कई प्रभावशाली लोगों की भूमिका रही है। सूत्रों के मुताबिक, पार्थ चटर्जी को पहले भी कई बार पूछताछ के लिए बुलाया गया था, लेकिन उन्होंने बीमारी का हवाला देकर पेशी से बचने की कोशिश की। इसी वजह से एजेंसी ने सीधे उनके घर पहुंचकर कार्रवाई की है।
प्रसन्ना रॉय के कार्यालय में भी छापेमारी
इसके साथ ही ईडी की एक टीम न्यू टाउन स्थित प्रसन्ना रॉय के कार्यालय में भी छापेमारी कर रही है। प्रसन्ना रॉय को इस मामले में आरोपी माना जा रहा है। जांच एजेंसी अब इस पूरे नेटवर्क को खंगालने में जुटी है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि भर्ती प्रक्रिया में किस तरह की अनियमितताएं हुईं। यह मामला जुलाई 2022 में उस समय चर्चा में आया था, जब ईडी ने पार्थ चटर्जी को गिरफ्तार किया था। उसी दौरान उनकी करीबी सहयोगी अर्पिता मुखर्जी के घर से करीब 20 करोड़ रुपये नकद बरामद हुए थे। इस बरामदगी ने पूरे देश को चौंका दिया था और मामले की गंभीरता को उजागर किया था।
चटर्जी को सितंबर में मिली जमानत
बाद में अदालत ने अर्पिता मुखर्जी को जमानत दे दी थी, जबकि पार्थ चटर्जी को भी सितंबर में कलकत्ता हाई कोर्ट से जमानत मिली। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के कारण उनकी रिहाई में देरी हुई और आखिरकार उन्हें नवंबर में न्यायिक हिरासत से रिहा किया गया। इसके बावजूद जांच एजेंसियां लगातार सक्रिय बनी हुई हैं। ईडी की इस ताजा कार्रवाई से वेस्ट बंगाल की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। विपक्ष इस मुद्दे को लेकर सरकार पर निशाना साध रहा है, जबकि सत्तारूढ़ दल इसे राजनीतिक साजिश बता रहा है। आने वाले समय में यह मामला और भी तूल पकड़ सकता है, खासकर जब जांच एजेंसी लगातार नए सिरे से पूछताछ और छापेमारी कर रही है। जांच एजेंसियों का कहना है कि इस मामले में अभी और खुलासे हो सकते हैं।
-Legend News

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