रिपोर्ट : LegendNews
पश्चिम एशिया संकट: कांग्रेस ने जयशंकर के बयान पर जताया असंतोष, चर्चा की मांग
कांग्रेस ने सोमवार को पश्चिम एशिया संकट पर संसद में विदेश मंत्री एस जयशंकर के बयान पर असंतोष जताते हुए कहा कि इस मामले पर तत्काल चर्चा होनी चाहिए। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि राज्यसभा में इस मुद्दे पर चर्चा की मांग को अस्वीकार कर दिया गया, जिसके बाद विपक्ष को वॉकआउट करना पड़ा।
जयराम रमेश ने बताई संसद में हंगामे की वजह
जयराम रमेश ने ‘एक्स’ पर पोस्ट में कहा कि जैसा कि अपेक्षित था, विदेश मंत्री ने राज्यसभा में स्थिति पर स्वत: संज्ञान लेते हुए वक्तव्य दिया, जिस पर कोई प्रश्न नहीं पूछा जा सकता या स्पष्टीकरण नहीं मांगा जा सकता। संपूर्ण विपक्ष पश्चिम एशिया के हालात पर तत्काल चर्चा चाहता था। इसे अस्वीकार कर दिया गया और इसलिए विपक्ष ने विरोध के बाद वॉकआउट कर दिया।
खरगे ने पूरे मामले में क्या कहा
कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि मैं सदन में नियम 176 के तहत Emerging challenges for India's Energy Security के विषय पर शॉर्ट ड्यूरेशन डिस्कसन का अनुरोध कर रहा हूं। पश्चिमी एशिया में तेजी से बदल रही जियो पॉलिटिकल सिचुएशन अब वहीं तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर भारत की एनर्जी सिक्योरिटी पर भी पड़ रहा है। साथ ही, इसका असर भारत की साख और छवि पर भी हो रहा है।
संसद परिसर में विपक्ष का हंगामा
संसद में बजट सत्र के दूसरे चरण की शुरुआत हंगामे के साथ हुई है। पश्चिम एशिया संघर्ष के मुद्दे पर कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने संसद परिसर में विरोध प्रदर्शन किया और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। सोमवार को लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे समेत विपक्षी सांसद संसद के मकर द्वार पर इकट्ठा हुए। एक बड़ा बैनर पकड़े हुए विपक्षी सदस्यों ने पश्चिम एशिया संघर्ष के मुद्दे पर विरोध प्रदर्शन किया।
कांग्रेस ने केंद्र सरकार साधा निशाना
कांग्रेस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट किया, 'खाड़ी के देश जल रहे हैं, भारतीय फंसे हुए हैं और केंद्र सरकार चुप है।' पार्टी ने एक अन्य पोस्ट में लिखा, 'आज भारत को ऐसे लीडरशिप की जरूरत है, जो देश के हितों की रक्षा कर सके। केंद्र सरकार का डर देश को नुकसान पहुंचा रहा है।'
पश्चिम एशिया के हालात पर जयशंकर ने क्या कहा
पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष पर विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि भारत शांति, संवाद और कूटनीति की ओर लौटने का पक्षधर है।
तनाव कम करने, संयम बरतने और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की वकालत करता है।
क्षेत्र में रह रहे भारतीय समुदाय का कल्याण और सुरक्षा सरकार की प्राथमिकता बनी हुई है।
हम क्षेत्र के देशों की सरकारों के साथ काम करना जारी रखेंगे।
हमारे राष्ट्रीय हित हमेशा सर्वोपरि रहेंगे, जिनमें ऊर्जा सुरक्षा और व्यापारिक लक्ष्य शामिल हैं।
प्रधानमंत्री पश्चिम एशिया के घटनाक्रम पर लगातार नजर रख रहे हैं।
पश्चिम एशिया में संघर्ष शुरू होने के बाद से भारत सरकार वहां की स्थिति का लगातार आकलन कर रही है।
जयशंकर ने कहा कि पश्चिम एशिया में फंसे भारतीयों को सुरक्षित वापस लाने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं।
मौजूदा परिस्थितियों में ईरान के शीर्ष नेतृत्व से संपर्क करना जाहिर रूप से कठिन है, हालांकि उन्होंने ईरान के विदेश मंत्री से बातचीत की है।
कल तक हमारे लगभग 67,000 नागरिक लौटने के लिए इंटरनेशनल बॉर्डर पार कर चुके हैं।
वेस्ट एशिया से हमारे लोगों को वापस लाने की पूरी कोशिश की जा रही है।
-Legend News

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