गौतमबुद्धनगर जिले में निजी स्कूलों द्वारा मनमाने तरीके से फीस बढ़ाने पर अंकुश लगाने के लिए गौतमबुद्धनगर जिला प्रशासन ने एक बड़ा और सख्त कदम उठाया है। मंगलवार को जिलाधिकारी की अध्यक्षता में जिला शुल्क नियामक समिति की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें निजी स्कूलों द्वारा शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए की गई फीस वृद्धि की गहन समीक्षा की गई।
फीस स्ट्रक्चर सार्वजनिक न करने का मामला भी आया सामने
इस जांच में एक बड़ी अनियमितता सामने आई है, जिसमें जिले के छह नामी निजी स्कूलों द्वारा निर्धारित सीमा से काफी अधिक फीस बढ़ाने का मामला उजागर हुआ। इसके अलावा, एक अन्य स्कूल द्वारा कंपोजिट फीस के अलावा अतिरिक्त वार्षिक शुल्क वसूलने और अपना फीस स्ट्रक्चर सार्वजनिक न करने का मामला भी सामने आया। 
इस गंभीर उल्लंघन पर कड़ी कार्रवाई करते हुए जिला शुल्क नियामक समिति ने सभी संबंधित निजी स्कूलों पर एक-एक लाख रुपये का भारी अर्थदंड लगाया है। 
निजी स्कूल अधिकतम 7.23 प्रतिशत तक ही फीस बढ़ा सकते
जिला विद्यालय निरीक्षक चंदशेखर ने इस संबंध में विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि उत्तर प्रदेश स्ववित्तपोषित स्वतंत्र विद्यालय (शुल्क विनियमन) अधिनियम-2018 के तहत शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए निजी स्कूल अधिकतम 7.23 प्रतिशत तक ही फीस बढ़ा सकते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि जांच में यह पाया गया कि छह स्कूलों ने निर्धारित नियमों को ताक पर रखकर इस सीमा से अधिक फीस वसूली की। 
किन-किन स्कूलों पर लगा जुर्माना
नियमों का उल्लंघन करने वाले जिन छह स्कूलों पर अधिनियम की धारा 4(1) के तहत पहली बार उल्लंघन मानते हुए एक-एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है, वे हैं- जेपी इंटरनेशनल स्कूल (सेक्टर-18), फॉर्च्यून वर्ल्ड स्कूल (सेक्टर-20), रामाज्ञा स्कूल (सेक्टर-50), विश्व भारती पब्लिक स्कूल (सेक्टर-28), श्री चैतन्य टेक्नो स्कूल (सिटी सेंटर) और सेंट जोसेफ स्कूल (सेक्टर-2)। 
निजी स्कूलों को सख्त संदेश
इसके अलावा, समिति ने विश्व भारती पब्लिक स्कूल, सेक्टर-21 पर भी एक अलग मामले में एक लाख रुपये का अतिरिक्त अर्थदंड लगाया है। इस स्कूल पर आरोप है कि उसने वर्ष 2025-26 का फीस स्ट्रक्चर अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड नहीं किया था, साथ ही वह कंपोजिट फीस के अलावा छात्रों से अतिरिक्त वार्षिक शुल्क वसूल रहा था। जिलाधिकारी की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में की गई यह बड़ी कार्रवाई जिले के अभिभावकों को एक बड़ी राहत देने वाली है और यह निजी स्कूलों के लिए एक सख्त संदेश है कि वे नियमों का उल्लंघन न करें। 
-Legend News

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