रिपोर्ट : LegendNews
यूपी के कैबिनेट मंत्री डॉ संजय निषाद ने सपा को बताया फूलनदेवी का हत्यारा
उत्तर प्रदेश विधानसभा के मॉनसून सत्र के दौरान निषाद पार्टी के अध्यक्ष और यूपी में कैबिनेट मंत्री डॉ संजय निषाद और विपक्षी सदस्यों के बीच ऐसा हंगामा शुरू हुआ कि आनन-फानन में स्पीकर सतीश महाना को कुर्सी पर आना पड़ा और माइक तक बंद कराना पड़ा। बाद में सतीश महाना के आग्रह पर डॉ संजय निषाद शांत हुए। इस दौरान विपक्ष के सदस्य डॉ संजय निषाद के बयान को कार्यवाही से हटाने की मांग करते रहे। दरअसल ये पूरा मामला एक नाम फूलन देवी को लेकर हुआ।
यूपी विधानसभा में विजन 2047 पर चर्चा के दौरान कैबिनेट मंत्री डॉ संजय निषाद ने अपने समाज के आरक्षण का मुद्दा उठाया। विपक्षी सदस्यों ने चुटकी ली कि लखनऊ और दिल्ली दोनों जगह आपकी ही सरकार है, दिला दीजिए। इसके बाद दोनों तरफ से आरोप-प्रत्यारोप ऐसा बढ़ा कि अचानक डॉ संजय निषाद ने सपा को फूलन देवी का हत्यारा बता दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि जब फूलन देवी ने एकलव्य पार्टी बनाई, तब 27 दिन बाद ही उनकी हत्या हो गई। मामले की सीबीआई जांच हो जाए। सच सामने आ जाएगा। इस पर विपक्षी सदस्य वेल में आकर हंगामा करने लगे और बयान को सदन की कार्यवाही से हटाने की मांग करने लगे।
लेकिन दूसरी तरफ डॉ संजय निषाद नहीं रुके उन्होंने कहा कि निषादों का कोई नेता नहीं बचाव। आज सिर्फ मैं बचा हूं। अब सवाल ये है कि क्या वाकई ऐसा है? आइए समझते है...
140 विधानसभा सीटों पर वर्चस्व
दरअसल उत्तर प्रदेश की कुल ओबीसी आबादी का 17 से 18 प्रतिशत निषाद समाज है। मोटे तौर पर माना जाता है कि यूपी की करीब 140 विधानसभा सीटों में ये समाज जीत और हार तय करने का माद्दा रखता हैं। पूर्वांचल में निषाद समाज की सबसे ज्यादा आबादी रहती है। गंगा से जुड़े तमाम जिलों में इनका वर्चस्व रहा है।
मुलायम ने जब फूलन देवी को दिया टिकट
इस समुदाय को एक वोट बैंक के तौर पर पहली बार मुलायम सिंह यादव ने चिन्हित किया। 90 के दशक में आरक्षण व्यवस्था लागू होने के बाद मुलायम सियासत में सबसे ऊपरी क्रम के नेता हो गए थे। उन्होंने अलग समाजवादी पार्टी का गठन भी कर लिया था। यादव और मुस्लिम गठजोड़ की सियासत की नींव भी उन्होंने रखी। साथ ही पूर्वी उत्तर प्रदेश में पार्टी को मजबूत करने के लिए गैर यादव ओबीसी जातियों को भी जोड़ने की कोशिश करने लगे।
1993 में मुलायम सिंह यादव जब मुख्यमंत्री बने तो उन्होंने निषाद समाज का सबसे बड़ा चेहरा मानी जाने वाली डकैत फूलन देवी से यूपी में दर्ज सभी मुकदमे वापस लिए। इसके बाद फूलन देवी को जेल से रिहाई मिल गई। रिहाई मिलने के बाद फूलन देवी को मुलायम सिंह यादव ने 1996 में लोकसभा चुनाव में मिर्जापुर से टिकट दे दिया। यहां से फूलन देवी का सियासी करियर शुरू हुआ और वह लोकसभा पहुंचीं।
-Legend News

Recent Comments