यूपी विधानसभा का मानसून सत्र एक दिन पहले ही बुधवार को समाप्त कर दिया गया। समाजवादी पार्टी के भारी हंगामे और बवाल के बाद स्पीकर सतीश महाना ने सदन की कार्यवाही को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी। पहले इस सत्र की कार्यवाही छह अगस्त गुरुवार तक चलनी थी। विधानसभा इस तरह अचानक स्थगित होने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समाजवादी पार्टी पर हमला किया। कहा कि सपा ने सदन में कोई चर्चा नहीं होने दी। उनका यह आचरण महिला, किसान, युवा विरोधी है। कहा कि 59000 करोड़ के अनुपूरक बजट से हर वर्ग के लिए धनराशि की व्यवस्था की गई है। सपा नहीं चाहती थी कि सरकार विकास के कार्यों को आगे बढ़ाए, इसलिए सदन की कार्यवाही में व्यवधान पैदा किया। सपा के इस रुकावट के बाद भी अनुपूरक बजट को पास कराया गया है। 
मंगलवार की तरह बुधवार को भी सदन की कार्यवाही शुरू होने से पहले ही राम मंदिर चढ़ावा चोरी और अपने विधायक के निलंबन के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी गई थी। इस हंगामे को लेकर स्पीकर महाना भी बेहद भावुक नजर आए। उन्होंने यहां तक कह दिया कि मुझे यह देखना होगा कि इस कुर्सी के लायक हूं या नहीं। 
सीएम योगी का सपा पर हमला
विधानसभा की कार्यवाही स्थगित होने के बाद सीएम योगी ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि समाजवादी पार्टी ने एकबार फिर से अपना जन विरोधी चेहरा दिखा दिया है। विधानसभा सत्र को हंगामे के हवाले करना प्रदेश के युवाओं, किसानों, महिलाओं के साथ भारी अन्याय है। हम लोग इनके लिए कुछ नई योजना घोषित करने, गरीबो के कल्याण के लिए कुछ नए कार्यक्रम शुरू करने के लिए ही 59000 करोड़ रुपये से अधिक का अनुपूरक बजट लेकर आये थे। समाजवादी पार्टी के नकारात्मक रवैये के कारण इस पर सदन में कोई चर्चा नही हो सकी है।
सपा ने विकास कार्यों में डाली रुकावट
हमने आंगनबाड़ी, रसोइया, ग्राम चौकीदार के साथ हर तबके को छूने का प्रयास किया था। इनके मानदेय बढ़ने हैं, महिला पेंशन, दिव्यांगजन पेंशन, वृद्धावस्था पेंशन इन सबपर चर्चा होनी थी। लेकिन समाजवादी पार्टी ने इसमें भी रुकावट डाली है। इन सबके बावजूद विधानसभा ने सप्लीमेंट्री डिमांड पारित किया और बहुत जल्द इन सभी तबके के लिए कार्य होगा। 
महाना ने स्पीकर ने पद छोड़ने की चेतावनी दी
इससे पहले विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने पद छोड़ने की चेतावनी तक दे दी। उन्होंने कहा कि कल सदन में जो हुआ, उससे बहुत ज्यादा आहत और दुखी हूं। मुझे पहली बार लगा कि या तो हमारे प्रयास में कहीं कमी रह गई या फिर डॉक्टर आंबेडकर की बात सही है कि कमी संविधान में नहीं, बल्कि व्यक्तियों में होती है।
उन्होंने कहा कि मेरे मना करने के बाद भी कई सदस्यों ने यहां की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया में डाली। यह बेहद निंदनीय है। उन्होंने कहा कि मेरी लंबी राजनीतिक पारी अब अंतिम चरण में है। मुझे गंभीरता से विचार करना पड़ेगा कि पिछले साढ़े चार वर्षों में मैंने जो किया, वह उचित था या अनुचित। मैं इस कुर्सी के योग्य हूं या नहीं, इस पर भी विचार करूंगा और इस पर जल्द फैसला लूंगा।
क्या है पूरा मामला
दरअसल, मंगलवार को समाजवादी पार्टी के विधायकों ने राम मंदिर दान चोरी को लेकर विधानसभा में चर्चा की मांग करते हुए हंगामा किया था। इसी दौरान सपा विधायक सचिन यादव ने एक पोस्टर लहराया था। महाना ने उन्हें ऐसा नहीं करने की चेतावनी दी लेकिन वह नहीं माने। इस पर पूरे सत्र के लिए सचिन को निलंबित करने का आदेश भी जारी कर दिया और मार्शलों को विधायक को बाहर करने का आदेश दिया। इस आदेश के बाद मार्शलों और विधायकों के साथ धक्कामुक्की भी हुई।
बुधवार को भी जारी रहा हंगामा
बुधवार भी सपा विधायकों के तेवर में कोई कमी नजर नहीं आई। वह मंगलवार से ज्यादा आक्रामक तेवरों के साथ विधानसभा में दोबारा कई पोस्टर लेकर पहुंचे और सदन से बाहर से लेकर अंदर तक हंगामा जारी रखा। इसी के बाद दो बार सदन को कुछ-कुछ देर के लिए स्थगित करने के बाद अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया। 
-Legend News

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