रिपोर्ट : LegendNews
अभूतपूर्व कामयाबी: भारत की पहली प्राइवेट स्पेस स्टार्टअप कंपनी ने रवाना किया विक्रम-1
भारत के अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में देश की पहली प्राइवेट स्पेस स्टार्टअप कंपनी 'स्काईरूट एयरोस्पेस' ने एक अभूतपूर्व और ऐतिहासिक कामयाबी हासिल की है। हैदराबाद आधारित इस एरोस्पेस कंपनी ने भारत का पहला पूर्णतः निजी ऑर्बिटल रॉकेट 'विक्रम-1' आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से दोपहर ठीक 12:05 बजे सफलतापूर्वक अंतरिक्ष में रवाना कर दिया।
बता दें कि भारत से पहले केवल दो देश- अमेरिका और चीन ही ऐसा कर पाए हैं। यानी इन्हीं दो देशों में प्राइवेट स्पेस कंपनियों ने रॉकेट लॉन्च किए हैं। अब भारत भी इस लिस्ट में शुमार हो गया है।
इस महत्वाकांक्षी टेस्ट फ़्लाइट लॉन्च को "मिशन आगमन" का विशिष्ट नाम दिया गया था। हालांकि, शुरुआत में इस ऐतिहासिक प्रक्षेपण का समय सुबह 11:30 बजे तय किया गया था, लेकिन खराब मौसम और नेविगेशन संबंधी कुछ आखिरी मिनटों की तकनीकी दिक्कतों के कारण काउंटडाउन को कुछ देर के लिए रोकना पड़ा, जिसके चलते यह लॉन्च निर्धारित समय से करीब 35 मिनट की देरी से पूरा हो सका।
पृथ्वी की 450 किमी निचली कक्षा में स्थापित होंगे पेलोड्स; हल्के और मजबूत कार्बन-कंपोजिट से बना है रॉकेट
"मिशन आगमन" के तहत उड़ान भरने वाला यह रॉकेट लगभग 16 मिनट की अपनी शुरुआती यात्रा तय करने के बाद, अपने साथ ले गए महत्वपूर्ण घरेलू और विदेशी पेलोड्स को पृथ्वी की सतह से 450 किलोमीटर की ऊंचाई और 60 डिग्री के झुकाव पर स्थित लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) में स्थापित करेगा।
उल्लेखनीय है कि पृथ्वी की यह वही सर्कुलर निचली कक्षा है जहां इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन भी लगातार चक्कर लगाता है और ज्यादातर व्यावसायिक व मौसम संबंधी उपग्रह भी इसी ऑर्बिट में सक्रिय रहते हैं। तकनीक के लिहाज से 'विक्रम-1' पूरी तरह से अत्यधिक हल्के और बेहद मजबूत कार्बन-कंपोजिट स्ट्रक्चर से निर्मित भारत का पहला प्राइवेट ऑर्बिटल रॉकेट है। इस रॉकेट में प्रयुक्त कार्बन फाइबर धातु स्टील के मुकाबले करीब 5 गुना तक हल्का होता है, जिसकी वजह से न सिर्फ पूरे रॉकेट का कुल वजन काफी कम हो गया, बल्कि इसकी ईंधन दक्षता में भी जबर्दस्त बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
3 सॉलिड और 1 लिक्विड मॉड्यूल चरण से संचालित है विक्रम-1
स्काईरूट एयरोस्पेस के इस आधुनिक रॉकेट को विशाल ऊर्जा प्रदान करने के लिए इसमें 3 सॉलिड-फ्यूल स्टेज और 1 अत्यंत सटीक लिक्विड ऑर्बिटल एडजस्टमेंट मॉड्यूल (LOAM) को असेंबल किया गया है। इसमें लगे 3 सॉलिड चरण रॉकेट को जमीन से तीव्र गति के साथ उठाकर सीधे लो अर्थ ऑर्बिट तक धकेलने का काम करते हैं, जबकि शीर्ष पर लगा लिक्विड मॉड्यूल अंतरिक्ष में पहुंचने के बाद उपग्रहों को उनकी बिल्कुल सटीक कक्षा में व्यवस्थित तरीके से स्थापित करता है।
यह मिशन सिर्फ अत्याधुनिक तकनीक का ही नहीं, बल्कि विज्ञान और सूक्ष्म कला का एक अद्भुत संगम भी साबित हुआ है। रॉकेट अपने साथ 'ग्रह स्पेस' का टेक्नोलॉजी पेलोड, 'कॉस्मोसर्व स्पेस' का पेलोड, 'डीक्यूब्ड' का स्पेस रिसर्च पेलोड और स्काईरूट का अपना इन-हाउस 'स्कोप पेलोड' लेकर गया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दीं शुभकामनाएं
लॉन्च से ठीक पहले, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर स्काईरूट एयरोस्पेस की टीम को बधाई दी। उन्होंने इसे भारत की अंतरिक्ष यात्रा का "एक ऐतिहासिक नया फ्रंटियर" बताया। पीएम मोदी ने कहा कि यह मिशन हमारे युवाओं की प्रतिभा, दृढ़ संकल्प और उद्यमशीलता को दर्शाता है। साथ ही, उन्होंने देशवासियों और विशेषकर युवाओं से इस ऐतिहासिक मिशन से जुड़ने और #IndiaWithVikram1 हैशटैग का इस्तेमाल कर टीम का हौसला बढ़ाने की अपील की है।
-Legend News

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