संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार विशेषज्ञों ने बलूच मानवाधिकार कार्यकर्ता महरंग बलूच और अन्य नेताओं को उम्रकैद की सजा सुनाए जाने पर पाकिस्तान की कड़ी आलोचना की है।
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय (ओएचसीएचआर) ने कहा कि क्वेटा की आतंकवाद निरोधी अदालत द्वारा दिया गया फैसला न्याय का उपहास है और आतंकवाद विरोधी कानूनों के दुरुपयोग को दर्शाता है। 
उन्होंने इसे घोर अन्याय बताया है और कहा, इस सज़ा से बलूचिस्तान में स्वतंत्र आवाज़ों के दबने और नागरिकों के लिए काम करने की संभावना कम होने का ख़तरा है।
महरंग बलूच बलूच यकजेहती कमेटी की प्रमुख हैं। महरंग को जुलाई 2024 में ग्वादर में प्रदर्शन के दौरान फ्रंटियर कॉर्प्स के एक जवान की मौत से जुड़े मामले में दोषी ठहराया गया। उनके साथ बलूच नेता सिबगतुल्लाह शाहजी को भी सजा सुनाई गई। 
अभियोजन पक्ष ने दोनों पर आरोप लगाया कि उन्होंने भीड़ को उकसाया, जिसने अर्द्धसैनिक बल के जवान शब्बीर अहमद पर जानलेवा हमला किया, जिससे उनकी मौत हो गई। 
संयुक्त राष्ट्र विशेषज्ञों ने कहा कि शांतिपूर्ण विरोध, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और संगठन के अधिकारों को दबाने के लिए हत्या और आतंकवाद के आरोपों का इस्तेमाल किया गया।
उन्होंने आरोप लगाया कि मुकदमे के दौरान उचित प्रक्रिया का पालन नहीं हुआ और आरोपितों को अपनी पसंद के वकील की सुविधा नहीं मिली।
पाकिस्तान की मध्यस्थ भूमिका पर अमेरिकी सीनेटर ने उठाए सवाल
अमेरिकी सीनेटर रिक स्कट ने अमेरिका-ईरान संघर्षविराम समझौते में पाकिस्तान की मध्यस्थ भूमिका पर सवाल उठाते हुए इस्लामाबाद पर पाखंड का आरोप लगाया है।
उन्होंने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की ईरान यात्रा और वहां के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई को श्रद्धांजलि देने पर टिप्पणी की।
स्कॉट ने पाकिस्तान के आतंकवाद से जुड़े पुराने आरोपों और धार्मिक स्वतंत्रता को लेकर चिंताएं जताईं। उन्होंने कहा कि अमेरिका पाकिस्तान की गतिविधियों पर नजर रख रहा है। 
-Legend News

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