अमेरिका-ईरान के बीच जारी संघर्ष का पूरा असर भारत पर अभी भले ही महसूस नहीं हुआ हो, लेकिन आगे मुश्किल दिन आ सकते हैं. ये बात दिग्गज बैंकर और कोटक महिंद्रा बैंक के फाउंडर उदय कोटक ने कही है. CII एनुअल बिजनेस समिट 2026 में उदय कोटक ने चेतावनी दी कि वेस्ट एशिया में बढ़ते तनाव से जुड़े एनर्जी कीमतों में उछाल का असर जल्द ही उपभोक्ताओं और कारोबारों पर पड़ सकता है, खासकर उन लोगों पर जो पहले से सीमित आय की चुनौती झेल रहे हैं. 
उदय कोटक ने कंपनियों और परिवारों दोनों से अपील की कि आर्थिक असर साफ तौर पर दिखने का इंतजार करने के बजाय अभी से कठिन समय के लिए तैयार रहें. उदय कोटक ने कहा कि पिछले दो महीनों में हमने ऊर्जा कीमतों के असर को पूरी तरह महसूस नहीं किया है. ये मिडिल ईस्ट युद्ध के कारण पैदा हुआ है. लेकिन इसका असर आने वाला है और बहुत बड़ा आने वाला है. 
कोटक ने कहा कि कई भारतीयों ने अभी तक तेल की बढ़ती कीमतों का पूरा असर महसूस नहीं किया है, क्योंकि पुराने स्टॉक और इन्वेंट्री फिलहाल तुरंत पड़ने वाले प्रभाव को कम कर रहे हैं. हालांकि, उनका मानना है कि जल्द ही महंगे ईंधन और रोजमर्रा की वस्तुओं की बढ़ती कीमतों के रूप में इसका दबाव घरों तक पहुंचेगा. उपभोक्ताओं ने अभी तक इस दबाव को बिल्कुल महसूस नहीं किया है. उनका मानना है कि सीमित आय वाले परिवारों के लिए बढ़ते खर्चों को संभालना खास तौर पर मुश्किल हो सकता है.
उन्होंने समझाया कि भले ही लोग सीधे तौर पर ईंधन पर ज्यादा खर्च न करें, लेकिन परिवहन और ईंधन से जुड़े खर्च अक्सर रोजमर्रा की कई जरूरी चीजों की कीमतें बढ़ा देते हैं. सोचिए उस उपभोक्ता के बारे में जिसकी आय सीमित है और जिसे सीधे ईंधन पर और अप्रत्यक्ष रूप से ईंधन पर निर्भर अन्य वस्तुओं पर ज्यादा खर्च करना पड़ेगा. 
उदय कोटक की ये टिप्पणियां ऐसे समय में आई हैं जब अमेरिका-ईरान संघर्षविराम की अनिश्चित स्थिति और होर्मुज के जरिए आपूर्ति बाधित होने की आशंकाओं के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी हो रही है. भारतीय रुपया भी अमेरिकी डॉलर के मुकाबले कमजोर हुआ है, जबकि शेयर बाजारों में तेज उतार-चढ़ाव देखा गया है.
भारत को सबसे खराब स्थिति के लिए तैयार रहना चाहिए
कोटक ने ये भी कहा कि अनिश्चित वैश्विक परिस्थितियों के दौरान भारत को 'कम्फर्ट जोन' में नहीं रहना चाहिए. हमें सबसे खराब स्थिति के लिए तैयार रहना चाहिए. उन्होंने कहा कि आयातित तेल पर भारत की भारी निर्भरता अर्थव्यवस्था को वैश्विक झटकों के प्रति संवेदनशील बनाती है. भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का 85% से ज्यादा हिस्सा आयात करता है. इसलिए कीमतों में तेज बढ़ोतरी महंगाई, रुपये और देश की वित्तीय स्थिरता को प्रभावित कर सकती है.
अनिश्चित समय में खर्चों पर नियंत्रण जरूरी
उदय कोटक की ये टिप्पणियां प्रधानमंत्री मोदी की उस अपील के तुरंत बाद आई हैं जिसमें उन्होंने नागरिकों से ईंधन बचाने, गैर-जरूरी विदेशी यात्राओं से बचने और अनावश्यक सोने की खरीद टालने को कहा था, क्योंकि वैश्विक अनिश्चितता बढ़ रही है. कोटक ने कहा कि अस्थिरता के दौर में देशों को 'अपनी क्षमता से ज्यादा खर्च' करने से बचना चाहिए. 
-Legend News

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