रिपोर्ट : LegendNews
ट्रंप प्रशासन की नई पेशकश: परमाणु संधि के लिए की जाए तीन-तरफा डील
डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने एक नई संधि की पेशकश की है, जिसमें अमेरिका, रूस के साथ चीन को शामिल किया जाए। अमेरिका की ओर से शुक्रवार को कहा गया है कि तीन-तरफा डील की जाए ताकि परमाणु हथियारों पर नई सीमाएं तय हो सकें। अमेरिका और रूस का न्यूक्लियर हथियारों पर कंट्रोल रखने वाला समझौता 5 फरवरी को खत्म हो गया है। इसके बाद अमेरिका की ओर से ये बयान आया है। अमेरिका का कहना है कि चीन अपने परमाणु हथियारों का जखीरा बढ़ा रहा है। ऐसे में किसी भी नई डील चीन को जरूर रखा जाना जाए।
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो की ओर से कहा गया है कि हथियारों पर नियंत्रण सिर्फ अमेरिका और रूस के बीच का द्विपक्षीय मुद्दा नहीं हो सकता है। दूसरे देशों की भी रणनीतिक स्थिरता सुनिश्चित करने में मदद करने की जिम्मेदारी है और इसमें सबसे अहम नाम चीन का है। चीन बहुत तेजी से और सीक्रेटली परमाणु हथियारों को बढ़ा रहा है।
चीन की डील में शामिल होने की योजना नहीं
अमेरिका और रूस की न्यू START संधि के खत्म होने से परमाणु हथियारों को कम करने के लिए कोई रुकावट नहीं रह गई है। इससे हथियारों की नई होड़ का डर पैदा हो गया है। ऐसे में नए स्तर से इस पर चर्चा की बात की जा रही है। अमेरिका ने चीन तो वहीं रूस ने ब्रिटेन और फ्रांस जैसे परमाणु-सशस्त्र देशों को बातचीत में शामिल करने पर जोर दिया है।
रूस-अमेरिका की संधि खत्म होने के एक दिन बाद शुक्रवार को चीन की ओर से इस पर बयान आ गया है। चीन ने दोहराया है कि वह इस स्तर पर किसी निरस्त्रीकरण वार्ता में शामिल होने की कोई योजना नहीं बना रहा है। ऐसे में फिलहाल चीन के अमेरिका की ओर से प्रस्तावित किसी नई परमाणु संधि में शामिल होने की संभावना बनती नहीं दिख रही है।
चीन कर रहा गुप्त परमाणु परीक्षण?
अमेरिकी विदेश उप सचिव थॉमस डिनानो ने जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र में निरस्त्रीकरण सम्मेलन में नई अमेरिकी योजना प्रस्तुत की है। इस दौरान उन्होंने चीन पर कानूनी रूप से बाध्यकारी अमेरिकी-रूसी संयम का फायदा उठाकर अपने हथियारों के जखीरे का विस्तार करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि चीन साल 2030 तक 1,000 परमाणु हथियार बना सकता है।
डिनोनो ने कहा, 'चीन के परमाणु जखीरे की कोई सीमा नहीं है ना ही वह कोई पारदर्शिता रखते हैं। बीजिंग सीक्रेट तरीके से परमाणु विस्फोटक परीक्षण कर रहा है। इसमें सैकड़ों टन की निर्धारित क्षमता वाले परीक्षणों की तैयारी करना भी शामिल है। ऐसा ही एक परीक्षण 22 जूनृ 2020 को किया गया था। चीन परमाणु विस्फोटों को अस्पष्ट करके परीक्षण छिपाने की कोशिश करता है।'
चीन ने अमेरिका को दिया जवाब
चीन के राजदूत शेन जियान ने वॉशिंगटन के परमाणु हथियारों के परीक्षण वाले बयान को गैर जिम्मेदाराना कहा है। उन्होंने कहा, 'चीन इस स्टेज पर परमाणु निरस्त्रीकरण बातचीत में हिस्सा नहीं लेगा। जिन देशों के पास सबसे बड़े परमाणु हथियार हैं। उन्हें परमाणु निरस्त्रीकरण के लिए अपनी खास और प्राथमिक जिम्मेदारियों को निभाते रहना चाहिए।'
रूस और अमेरिका मिलकर दुनिया के 80 प्रतिशत से ज्यादा परमाणु हथियार कंट्रोल करते हैं। चीन भी परमाणु ताकत तेजी से बढ़ा रहा है। स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट के अनुसार, चीन का परमाणु हथियारों का जखीरा किसी भी दूसरे देश की तुलना में तेजी से बढ़ रहा है। साल 2023 से हर वर्ष लगभग 100 नए हथियार चीन बना रहा है।
-Legend News

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